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कड़ी मेहनत के आगे हार गई संसाधनों की कमी
बेहजम
Updated Thu, 25 Jun 2015 06:50 PM IST
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ब्लाक क्षेत्र के मानपुर के लाल ने आईईटी प्रवेश परीक्षा में 824 वीं रैंक हासिल कर अपने परिवार और जिले का नाम रोशन किया है। मानपुर में ट्यूबवेल आपरेटर राम औतार के छोटे बेटे अभिषेक ने संसाधनों के अभाव और आर्थिक तंगी के बीच अपनी कड़ी मेहनत से यह सफलता प्राप्त की है।
जवाहर नवोदय विद्यालय मितौली से वर्ष 2014 में प्रथम श्रेणी में इंटर पास करने के बाद अभिषेक ने कोटा राजस्थान से एक साल तक कोचिंग की। इसके बाद 2015 की आईआईटी की प्रवेश परीक्षा दी। पहले ही प्रयास में उसने इसमें 824 वीं रैंक हासिल की। इस सफलता पर अभिषेक के परिवार वालों की खुशी का ठिकाना न रहा। वह अपनी सफलता का श्रेय शिक्षकों, माता-पिता और वृद्ध बाबा को देता है।
अभिषेक ने बताया कि बचपन से ही उसका इंजीनियर बनने का सपना था लेकिन घर की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं थी कि माता-पिता उसे इंजीनियरिंग की शिक्षा दिला पाते। ऐसे में उसका प्रवेश जवाहर नवोदय विद्यालय में हो गया। जहां नाममात्र को फीस देनी पड़ती थी। इससे पैसा बचाता रहा और इंटर परीक्षा पास कर कोटा कोचिंग के लिए चला गया। माता-पिता और बाबा ने भी घर के खर्चों में कटौती कर उसकी पढ़ाई का खर्च पूरा किया, इससे उसे बहुत बल मिला।
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अभिषेक ने कहा कि कोचिंग के दौरान वह प्रतिदिन आठ घंटे कड़ी मेहनत कर पढ़ाई करता था। वह इंजीनियरिंग करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाना चाहता है। अभिषेक का बड़ा भाई अमित भी नोयडा से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक कर रहा है, यह उसका अंतिम वर्ष है। मां पुष्पा देवी आंगनबाड़ी कार्यकत्री हैं। पुष्पा और पिता राम औतार का कहना है कि वह अपने होनहार बेटे की पढ़ाई में कोई कमी नहीं होने देंगे भले ही उन्हें कितने ही कष्ट क्यों न उठाने पड़ें।
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जवाहर नवोदय विद्यालय मितौली से वर्ष 2014 में प्रथम श्रेणी में इंटर पास करने के बाद अभिषेक ने कोटा राजस्थान से एक साल तक कोचिंग की। इसके बाद 2015 की आईआईटी की प्रवेश परीक्षा दी। पहले ही प्रयास में उसने इसमें 824 वीं रैंक हासिल की। इस सफलता पर अभिषेक के परिवार वालों की खुशी का ठिकाना न रहा। वह अपनी सफलता का श्रेय शिक्षकों, माता-पिता और वृद्ध बाबा को देता है।
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अभिषेक ने बताया कि बचपन से ही उसका इंजीनियर बनने का सपना था लेकिन घर की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं थी कि माता-पिता उसे इंजीनियरिंग की शिक्षा दिला पाते। ऐसे में उसका प्रवेश जवाहर नवोदय विद्यालय में हो गया। जहां नाममात्र को फीस देनी पड़ती थी। इससे पैसा बचाता रहा और इंटर परीक्षा पास कर कोटा कोचिंग के लिए चला गया। माता-पिता और बाबा ने भी घर के खर्चों में कटौती कर उसकी पढ़ाई का खर्च पूरा किया, इससे उसे बहुत बल मिला।
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अभिषेक ने कहा कि कोचिंग के दौरान वह प्रतिदिन आठ घंटे कड़ी मेहनत कर पढ़ाई करता था। वह इंजीनियरिंग करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाना चाहता है। अभिषेक का बड़ा भाई अमित भी नोयडा से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक कर रहा है, यह उसका अंतिम वर्ष है। मां पुष्पा देवी आंगनबाड़ी कार्यकत्री हैं। पुष्पा और पिता राम औतार का कहना है कि वह अपने होनहार बेटे की पढ़ाई में कोई कमी नहीं होने देंगे भले ही उन्हें कितने ही कष्ट क्यों न उठाने पड़ें।