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मैदान का पता नहीं कहां लड़ें कुपोषण की लड़ाई!
लखीमपुर खीरी
Updated Thu, 30 Apr 2015 07:39 PM IST
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जिले में कुपोषण के खिलाफ शुरू की गई मुहिम की धार कुंद पड़ती जा रही है। डीएम के तमाम प्रयासों के बावजूद अधिकारियों की लापरवाही इसमें बड़ा रोड़ा बन रही है। ग्रामीण पोषण पुनर्वास मिशन के तहत चलाए गए अभियान की समीक्षा में यह बात खुलकर सामने आई है। गौर करने वाली बात है कि अधिकारियों के आंकड़ों में जिले के तीन ब्लाकों बिजुआ में तीन, नकहा में चार और मोहम्मदी में सिर्फ दो महिलाएं ही कुपोषित (एनमिक) पाई गई हैं। शेष 12 ब्लाकों में कुपोषित महिलाओं की संख्या शून्य है। कुपोषण को लेकर 22 जिला स्तरीय अधिकारियों की टीम द्वारा जिले भर के 36 ग्राम पंचायतों से जुटाए गए यह आंकड़े भले ही चौंकाने वाले हों, लेकिन लापरवाह अधिकारियों ने इन्हीं आंकड़ों को समीक्षा बैठक में प्रस्तुत कर दिया। जिसे देखने के बाद डीएम और सीडीओ भी आश्चर्यचकित रह गए। इन आंकड़ों से साफ जाहिर है कि कुपोषण के खिलाफ कतई गंभीरता नहीं बरती जा रही है।
प्रदेश भर में 42 फीसदी कुपोषण मिला है, जिसके बाद जिले में कुपोषित गांवों को चिह्नित कर अधिकारियों ने गांवों को गोद लिया था। करीब तीन माह पहले जिले में कुपोषण के खिलाफ छेड़ी गई मुहिम के तहत स्वास्थ्य विभाग और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को गांवों में जाकर बच्चों का वजन तौलने और उनके इलाज की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। साथ ही जिला स्तरीय अधिकारियों को गांवों में भ्रमण कर रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया था, लेकिन अधिकारियों की इस रिपोर्ट के बाद अब यह सवाल खड़ा हो गया है कि खीरी जिले में कुपोषण को लेकर आखिर कहां अभियान चलाना है और इससे किसका इलाज करना है।
जिले में कुपोषित बच्चे सूचीबद्ध
डीएम किंजल सिंह के निर्देश के बाद जिले के सभी ब्लाकों में कुपोषित बच्चों को सूचीबद्ध किया गया है। इनमें बिजुआ ब्लाक में आंशिक रूप से कुपोषित 1660 और गंभीर स्थिति में 69 बच्चे सूचीबद्ध किए गए हैं। जबकि ईसानगर में कुपोषण से आंशिक बच्चों की संख्या छह और गंभीर बच्चों की संख्या शून्य है। ईसानगर का आंकड़ा जिले में सबसे कम है। इसी तरह अन्य ब्लाकों में भी कुपोषित बच्चों की सूची तैयार की गई है।
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जिला कार्यक्रम अधिकारी नंदलाल ने बताया कि कुपोषण को लेकर अब फिर रिपोर्ट तैयार करनी है। समीक्षा बैठक में डीएम ने इस बाबत निर्देश दिया है। सभी अधिकारी गांवों में जाकर कुपोषण को लेकर महिलाओं को चिह्नित करेंगे और अगली बैठक में इसकी रिपोर्ट सौपने को कहा गया है।
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प्रदेश भर में 42 फीसदी कुपोषण मिला है, जिसके बाद जिले में कुपोषित गांवों को चिह्नित कर अधिकारियों ने गांवों को गोद लिया था। करीब तीन माह पहले जिले में कुपोषण के खिलाफ छेड़ी गई मुहिम के तहत स्वास्थ्य विभाग और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को गांवों में जाकर बच्चों का वजन तौलने और उनके इलाज की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। साथ ही जिला स्तरीय अधिकारियों को गांवों में भ्रमण कर रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया था, लेकिन अधिकारियों की इस रिपोर्ट के बाद अब यह सवाल खड़ा हो गया है कि खीरी जिले में कुपोषण को लेकर आखिर कहां अभियान चलाना है और इससे किसका इलाज करना है।
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जिले में कुपोषित बच्चे सूचीबद्ध
डीएम किंजल सिंह के निर्देश के बाद जिले के सभी ब्लाकों में कुपोषित बच्चों को सूचीबद्ध किया गया है। इनमें बिजुआ ब्लाक में आंशिक रूप से कुपोषित 1660 और गंभीर स्थिति में 69 बच्चे सूचीबद्ध किए गए हैं। जबकि ईसानगर में कुपोषण से आंशिक बच्चों की संख्या छह और गंभीर बच्चों की संख्या शून्य है। ईसानगर का आंकड़ा जिले में सबसे कम है। इसी तरह अन्य ब्लाकों में भी कुपोषित बच्चों की सूची तैयार की गई है।
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जिला कार्यक्रम अधिकारी नंदलाल ने बताया कि कुपोषण को लेकर अब फिर रिपोर्ट तैयार करनी है। समीक्षा बैठक में डीएम ने इस बाबत निर्देश दिया है। सभी अधिकारी गांवों में जाकर कुपोषण को लेकर महिलाओं को चिह्नित करेंगे और अगली बैठक में इसकी रिपोर्ट सौपने को कहा गया है।