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Lakhimpur Kheri News: केले पर बाढ़ की मार, भाव पर बिचौलियों का वार
Wed, 09 Sep 2026 12:08 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 09 Sep 2026 12:08 AM IST
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जटपुरवा गांव में गिरी केले की फसल। संवाद
निघासन/धौरहरा। बारिश और बाढ़ से केले की तैयार फसल को नुकसान पहुंच रहा है। कई जगह तेज हवाओं से पौधे जमीन पर गिर गए हैं। वहीं, फसल खराब होने के डर से किसान इसे कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर हैं। किसानों का आरोप है कि बाढ़ और बारिश की मजबूरी का फायदा बिचौलिये और स्थानीय दलाल उठा रहे हैं।
बाजार में केले का भाव करीब 1450 रुपये प्रति क्विंटल है। स्थानीय बिचौलिये किसानों से 800 से 1000 रुपये प्रति क्विंटल में केला खरीद रहे हैं। किसानों के मुताबिक, बुरहानपुर मंडी में केले का उच्चतम भाव 2301 रुपये और प्रचलित भाव करीब 1450 रुपये प्रति क्विंटल है। उनका कहना है कि स्थानीय स्तर पर कम दाम में खरीदकर बाहर भेजने वाले व्यापारी और बिचौलिये अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।
किसान मनोज वर्मा ने बताया कि केले की फसल तैयार करने में पौध लगाने से कटाई तक करीब 16 महीने लगते हैं। एक पेड़ पर करीब 116 रुपये लागत आती है। इस हिसाब से एक एकड़ में करीब 1.62 लाख रुपये खर्च होता है। औसतन 65 क्विंटल प्रति बीघा और करीब 325 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन होता है। इससे करीब 2.60 लाख रुपये का केला निकलता है।
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किसानों का कहना है कि 800 से 1000 रुपये प्रति क्विंटल में बिक्री होने पर लागत और मेहनत के अनुरूप मुनाफा नहीं मिल रहा है। निघासन निवासी किसान सुनील मौर्य ने बताया कि उनकी केले की फसल पूरी तरह तैयार थी। करीब एक सप्ताह से लगातार बारिश के कारण केले के पेड़ गिरने लगे हैं। प्रत्येक पेड़ में करीब 30 से 40 किलो की गहर लगी हुई थी। फसल खेत में ज्यादा दिन रोकने पर नुकसान बढ़ने का डर है। इसी मजबूरी का फायदा उठाकर व्यापारी कम दाम में केला खरीद रहे हैं।
किसानों के अनुसार पंजाब, हरियाणा, हिसार, दिल्ली, हिमाचल, बिहार और महाराष्ट्र समेत अन्य स्थानों के व्यापारी केला खरीदकर बाहर भेजते हैं। आरोप है कि स्थानीय दलाल इन व्यापारियों को किसानों के खेत तक सीधे नहीं पहुंचने देते। पहले व्यापारी को फसल दिखाकर वापस भेज दिया जाता है। बाद में दलाल किसान से कम कीमत पर केला खरीदकर बाहरी व्यापारी को अधिक दाम में बेच देते हैं। इससे किसानों को फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है।
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बाढ़, बारिश और तेज हवाओं से फसल बर्बाद
धौरहरा। क्षेत्र में बाढ़ के पानी, लगातार बारिश और तेज हवाओं से केले की फसल को भारी नुकसान हुआ है। खेतों में तैयार केले के पौधे तेज हवाओं से जमीन पर गिर गए। इससे किसानों की महीनों की मेहनत और लागत व्यर्थ हो गई।
शिवशंकर वर्मा, अखिलेश और अभिषेक सहित कई किसानों की केले की फसल तेज हवाओं से गिर गई। किसानों के अनुसार, फसल तैयार होने के समय पौधे गिरने से उन्हें भारी नुकसान हुआ है। लगातार बारिश और खेतों में भरे पानी से पहले ही फसल प्रभावित हो रही थी।
केले की खेती में पौध, खाद, दवा, सिंचाई और मजदूरी पर काफी खर्च होता है। फसल तैयार होने के बाद प्राकृतिक आपदा ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। किसानों ने प्रशासन से फसलों का सर्वे कराकर उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है। संवाद
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बाजार में केले का भाव करीब 1450 रुपये प्रति क्विंटल है। स्थानीय बिचौलिये किसानों से 800 से 1000 रुपये प्रति क्विंटल में केला खरीद रहे हैं। किसानों के मुताबिक, बुरहानपुर मंडी में केले का उच्चतम भाव 2301 रुपये और प्रचलित भाव करीब 1450 रुपये प्रति क्विंटल है। उनका कहना है कि स्थानीय स्तर पर कम दाम में खरीदकर बाहर भेजने वाले व्यापारी और बिचौलिये अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।
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किसान मनोज वर्मा ने बताया कि केले की फसल तैयार करने में पौध लगाने से कटाई तक करीब 16 महीने लगते हैं। एक पेड़ पर करीब 116 रुपये लागत आती है। इस हिसाब से एक एकड़ में करीब 1.62 लाख रुपये खर्च होता है। औसतन 65 क्विंटल प्रति बीघा और करीब 325 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन होता है। इससे करीब 2.60 लाख रुपये का केला निकलता है।
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किसानों का कहना है कि 800 से 1000 रुपये प्रति क्विंटल में बिक्री होने पर लागत और मेहनत के अनुरूप मुनाफा नहीं मिल रहा है। निघासन निवासी किसान सुनील मौर्य ने बताया कि उनकी केले की फसल पूरी तरह तैयार थी। करीब एक सप्ताह से लगातार बारिश के कारण केले के पेड़ गिरने लगे हैं। प्रत्येक पेड़ में करीब 30 से 40 किलो की गहर लगी हुई थी। फसल खेत में ज्यादा दिन रोकने पर नुकसान बढ़ने का डर है। इसी मजबूरी का फायदा उठाकर व्यापारी कम दाम में केला खरीद रहे हैं।
किसानों के अनुसार पंजाब, हरियाणा, हिसार, दिल्ली, हिमाचल, बिहार और महाराष्ट्र समेत अन्य स्थानों के व्यापारी केला खरीदकर बाहर भेजते हैं। आरोप है कि स्थानीय दलाल इन व्यापारियों को किसानों के खेत तक सीधे नहीं पहुंचने देते। पहले व्यापारी को फसल दिखाकर वापस भेज दिया जाता है। बाद में दलाल किसान से कम कीमत पर केला खरीदकर बाहरी व्यापारी को अधिक दाम में बेच देते हैं। इससे किसानों को फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है।
बाढ़, बारिश और तेज हवाओं से फसल बर्बाद
धौरहरा। क्षेत्र में बाढ़ के पानी, लगातार बारिश और तेज हवाओं से केले की फसल को भारी नुकसान हुआ है। खेतों में तैयार केले के पौधे तेज हवाओं से जमीन पर गिर गए। इससे किसानों की महीनों की मेहनत और लागत व्यर्थ हो गई।
शिवशंकर वर्मा, अखिलेश और अभिषेक सहित कई किसानों की केले की फसल तेज हवाओं से गिर गई। किसानों के अनुसार, फसल तैयार होने के समय पौधे गिरने से उन्हें भारी नुकसान हुआ है। लगातार बारिश और खेतों में भरे पानी से पहले ही फसल प्रभावित हो रही थी।
केले की खेती में पौध, खाद, दवा, सिंचाई और मजदूरी पर काफी खर्च होता है। फसल तैयार होने के बाद प्राकृतिक आपदा ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। किसानों ने प्रशासन से फसलों का सर्वे कराकर उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है। संवाद