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Lakhimpur Kheri News: तानों को बनाया ताकत, मोटापे को दी मात
Sat, 10 Oct 2026 11:16 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 10 Oct 2026 11:16 PM IST
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राजेंद्र सिंह। स्वयं
लखीमपुर खीरी। कभी बढ़ते वजन के कारण साथियों के ताने सुनने पड़े, तो कभी कुछ कदम चलते ही सांस फूलने लगती थी। बैठने-उठने में परेशानी और शरीर में बढ़ती दिक्कतों ने जिंदगी को मुश्किल बना दिया था, लेकिन इन लोगों ने हालात के आगे हार नहीं मानी।
किसी ने आठ से दस माह में 34 किलो वजन घटाया, तो किसी ने आठ माह में करीब 49 किलो कम कर लिया। खानपान, दिनचर्या और व्यायाम में बदलाव कर इन्होंने न केवल वजन घटाया, बल्कि जीवन को नई दिशा भी दी। विश्व मोटापा दिवस पर इनकी कहानियां बताती हैं कि बदलाव की शुरुआत खुद से होती है।
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चिकित्सक के परामर्श पर दिनचर्या और खानपान बदला
व्यापारी राजेंद्र सिंह का वजन एक समय 99 किलो था। भारी वजन के कारण थोड़ी देर चलने पर ही सांस फूलने लगती थी। अधिक देर तक बैठने और उठने में भी परेशानी होती थी। साथी मोटापे को लेकर मजाक करते थे। इसके बाद उन्होंने वजन घटाने का फैसला किया। चिकित्सक के परामर्श पर दिनचर्या और खानपान बदला। करीब आठ से दस माह में 34 किलो वजन घटाकर 65 किलो तक पहुंच गए।
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राजेंद्र सिंह ने तला-भुना खाना, दूध से बनी सामग्री और मीठा खाना बंद कर दिया। सुबह फल खाते हैं। दोपहर में पहले भरपेट सलाद, फिर दाल-रोटी और हरी सब्जी लेते हैं। शाम छह बजे से पहले रोटी-सब्जी, भुने चने या फल खाते हैं। दूध की चाय की जगह कहवा पीते हैं। पहले पांच लीटर पानी पीते थे, अब तीन लीटर पीते हैं।
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49 किलो वजन घटाकर बदली जीवनशैली
पूर्व व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास अधिकारी अनूप सिंह का वजन करीब काफी बढ़ गया था। कुछ कदम चलते ही सांस फूलने लगती थी। खर्राटे, थकान, घुटनों और कमर का दर्द, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और बढ़ा हुआ यूरिक एसिड उनकी जिंदगी को कठिन बना रहे थे।
उन्होंने जीवनशैली में बदलाव किया। संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या और उचित मार्गदर्शन से आठ महीने में करीब 49 किलो वजन कम किया। अनूप सिंह के मुताबिक, 68 वर्ष की उम्र में अब वह दवाओं से मुक्त जीवन जी रहे हैं और सक्रिय रहते हैं। उनके लिए यह बदलाव स्वस्थ और आत्मनिर्भर जीवन की नई शुरुआत है।
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140 से 98 किलो पर पहुंचे डॉ. रोहित
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. रोहित पाठक भी मोटापे से जूझ चुके हैं। उन्होंने व्यायाम और खानपान में सुधार कर अपना वजन 140 किलो से घटाकर 98 किलो किया। उनके मुताबिक, मोटापा केवल बढ़ते वजन तक सीमित नहीं है। यह टाइप-2 मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और जोड़ों की समस्याओं सहित कई स्वास्थ्य जोखिमों से जुड़ा हो सकता है।
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किसी ने आठ से दस माह में 34 किलो वजन घटाया, तो किसी ने आठ माह में करीब 49 किलो कम कर लिया। खानपान, दिनचर्या और व्यायाम में बदलाव कर इन्होंने न केवल वजन घटाया, बल्कि जीवन को नई दिशा भी दी। विश्व मोटापा दिवस पर इनकी कहानियां बताती हैं कि बदलाव की शुरुआत खुद से होती है।
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चिकित्सक के परामर्श पर दिनचर्या और खानपान बदला
व्यापारी राजेंद्र सिंह का वजन एक समय 99 किलो था। भारी वजन के कारण थोड़ी देर चलने पर ही सांस फूलने लगती थी। अधिक देर तक बैठने और उठने में भी परेशानी होती थी। साथी मोटापे को लेकर मजाक करते थे। इसके बाद उन्होंने वजन घटाने का फैसला किया। चिकित्सक के परामर्श पर दिनचर्या और खानपान बदला। करीब आठ से दस माह में 34 किलो वजन घटाकर 65 किलो तक पहुंच गए।
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राजेंद्र सिंह ने तला-भुना खाना, दूध से बनी सामग्री और मीठा खाना बंद कर दिया। सुबह फल खाते हैं। दोपहर में पहले भरपेट सलाद, फिर दाल-रोटी और हरी सब्जी लेते हैं। शाम छह बजे से पहले रोटी-सब्जी, भुने चने या फल खाते हैं। दूध की चाय की जगह कहवा पीते हैं। पहले पांच लीटर पानी पीते थे, अब तीन लीटर पीते हैं।
49 किलो वजन घटाकर बदली जीवनशैली
पूर्व व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास अधिकारी अनूप सिंह का वजन करीब काफी बढ़ गया था। कुछ कदम चलते ही सांस फूलने लगती थी। खर्राटे, थकान, घुटनों और कमर का दर्द, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और बढ़ा हुआ यूरिक एसिड उनकी जिंदगी को कठिन बना रहे थे।
उन्होंने जीवनशैली में बदलाव किया। संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या और उचित मार्गदर्शन से आठ महीने में करीब 49 किलो वजन कम किया। अनूप सिंह के मुताबिक, 68 वर्ष की उम्र में अब वह दवाओं से मुक्त जीवन जी रहे हैं और सक्रिय रहते हैं। उनके लिए यह बदलाव स्वस्थ और आत्मनिर्भर जीवन की नई शुरुआत है।
140 से 98 किलो पर पहुंचे डॉ. रोहित
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. रोहित पाठक भी मोटापे से जूझ चुके हैं। उन्होंने व्यायाम और खानपान में सुधार कर अपना वजन 140 किलो से घटाकर 98 किलो किया। उनके मुताबिक, मोटापा केवल बढ़ते वजन तक सीमित नहीं है। यह टाइप-2 मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और जोड़ों की समस्याओं सहित कई स्वास्थ्य जोखिमों से जुड़ा हो सकता है।

राजेंद्र सिंह। स्वयं