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सुप्रीम कोेर्ट के तीन तलाक के फैसले से महिलाएं खुश 

Tue, 22 Aug 2017 10:57 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी। Updated Tue, 22 Aug 2017 10:57 PM IST
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Supreme Court Women's Pleasures With Three Divorce Decisions
Divorce - फोटो : अमर उजाला
कहा, महिलाओं की सामाजिक सुरक्षा को मील का पत्थर
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 तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट का फैसले से मुस्लिम महिलाएं खुश हैं। उनका कहना है मुस्लिम महिलाओं की सुरक्षा की दिशा में यह सराहनीय कदम है। जबकि धर्म गुरुओं का है कि तीन तलाक का मामला मजहबी है इसका निर्णय मजहब के मंच पर ही होना चाहिए। कुछ महिलाएं तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से इत्तिफाक रखती हैं। इसे महिलाओं के हित में मानती हैं लेकिन उनका कहना है इस मामले में धार्मिक पहलुओं को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। 
 
सुप्रीम कोर्ट का फैसला मुस्लिम समाज की महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा और सम्मान देगा। इससे पुरुषों को अपनी मनमानी करने का मौका नहीं मिल पाएगा। फैसला स्वागत योग्य है लेकिन यदि धर्म गुरुओं को साथ लेकर फैसला लिया जाता तो सर्वमान्य और ज्यादा सार्थक होता। 
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तरन्नुम जहां, गृहणी 
 
तीन तलाक के चलते मुस्लिम समाज की हजारों महिलाओं की जिंदगी तबाह हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट का निर्णय स्वागत योग्य है यह महिलाओं की सामाजिक सुरक्षा की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। तीन तलाक करने वालों के लिए सजा का प्रावधान हो। 
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अनवर बेगम, गृहणी
 
सुप्रीम कोर्ट का फैसला महिलाओं के पक्ष में है। इससे शादी के बाद महिलाओं में असुरक्षा की जो भावना है वह खत्म होगी। सरकार की पहल और सुप्रीम कोर्ट केे निर्णय दोनों ही स्वागत योग्य है। सरकार को ऐसा कानून बनाया जाना चाहिए जिससे महिलाओं को बराबरी का हक मिले। 
शहनाज सिद्दीकी
 
 
तलाक का कानून हमारे मोहम्मद साहब द्वारा बनाया हुआ है। यह शरीयत हिसाब से पहले ही बना है जो कुरआन और हदीसों में मौजूद है इस लिए शरीयत के बने कानून में मुस्लिम समुदाय किसी दूसरे कानून का हस्तक्षेप नहीं चाहती है और न किसी अन्य कानून बनाने के पक्ष में है।

उस्मामियां खातून, पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष खीरी। 
 
जामा मस्जिद लखीमपुर के पेश इमाम मौलाना इशहाक कहते हैं कि तीन तलाक का मामला पूरी तरह मजहबी है। इस्लाम के कानून में महिलाओं की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा गया है। इसमें किसी दूसरे कानून की कोई गुंजाइश नहीं है। सुप्रीम कोर्ट की मंशा ठीक है लेकिन यह फैसला धार्मिक मंच पर ही होना चाहिए। 
 
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