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सुनील की एमबीए में पहली रैंक
लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 20 May 2015 10:13 PM IST
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यूपीटीयू (उत्तर प्रदेश टेक्निकल यूनीवर्सिटी) की प्रवेश परीक्षा में शहर के सुनील वर्मा ने प्रदेश में पहली रैंक (एमबीए) हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है। जबकि इसी परीक्षा में एमसीए के आप्शन में नौंवी रैंक हासिल की है। मैथ पर अच्छी पकड़ रखने वाले सुनील अब एमबीए फाइनेंस की तैयारी में जुटे हैं, जिसके लिए पंजाब यूनीवर्सिटी चंडीगढ़ में मंगलवार को ग्रुप डिस्कशन (जीडी) इंटरव्यू में शामिल हो चुके हैं।
मोहल्ला राजगढ़ निवासी रिटायर्ड फौजी मायाराम वर्मा के पुत्र सुनील वर्मा शुरुआत से ही मेधावी छात्र रहे हैं। डान बास्को कॉलेज से र्हाईस्कूल और इंटरमीडिएट करने के बाद युवराज दत्त महाविद्यालय से बीएससी और 2006 में एमए इकोनामिक्स पास किया। इसके बाद सुनील ने अक्तूबर 2009 में एफर्सीआई में मैनेजर मूवमेंट के पद पर पहली नौकरी शुरू की, जिसके बाद अगस्त 2010 में रिजाइन कर दिया। इसके बाद बैंक आफ बड़ौदा में बतौर पीओ सितंबर 2011 से नौकरी शुरू की, जिसके बाद ज्वाइंट मैनेजर पद पर पहुंचकर मार्र्च 2015 में इस्तीफा देकर बाय-बाय कर लिया। दोनों नौकरियां छोड़ने के पीछे सुनील बताते हैं कि रूचि के मुताबिक जॉब नहीं था। बैंक में मशीन की तरह काम करना रास नहीं आया। इस दौरान सुनील प्रतियोगी परीक्षाओं में किस्मत आजमाते रहे। कैट इग्जाम में 96.42 फीसदी अंकों के साथ सफलता हासिल की। 2007 में बीएचयू की एमसीए प्रवेश परीक्षा में ऑल इंडिया आठवीं रैंक हासिल की थी, लेकिन एमसीए पसंदीदा सब्जेक्ट न होने के चलते प्रवेश नहीं लिया। 2014 में यूपीटीयू प्रवेश परीक्षा (एमबीए) में दूसरी और एमसीए में 23वीं रैैंक हासिल की थी। सुनील बताते हैं कि एमबीए फाइनेंस में करियर की बेहतर संभावनाएं हैं, जिसमें अच्छा पैकेज मिलने की संभावना है। लिहाजा इलाहाबाद यूनीवर्सिटी में लिखित परीक्षा दे चुके हैं, जिसका परिणाम आना है। इसके अलावा सुनील वर्मा पंजाब यूनीवर्सिटी चंडीगढ़ में जीडी इंटरव्यू में शामिल होकर लौटे हैं। उनकी प्राथमिकता पंजाब यूनीवर्सिटी से एमबीए फाइनेंस करने की है। परिवार में उनकी पत्नी और बेटी के अलावा माता-पिता हैं। जबकि चार बहनों की शादी हो चुकी है।
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मोहल्ला राजगढ़ निवासी रिटायर्ड फौजी मायाराम वर्मा के पुत्र सुनील वर्मा शुरुआत से ही मेधावी छात्र रहे हैं। डान बास्को कॉलेज से र्हाईस्कूल और इंटरमीडिएट करने के बाद युवराज दत्त महाविद्यालय से बीएससी और 2006 में एमए इकोनामिक्स पास किया। इसके बाद सुनील ने अक्तूबर 2009 में एफर्सीआई में मैनेजर मूवमेंट के पद पर पहली नौकरी शुरू की, जिसके बाद अगस्त 2010 में रिजाइन कर दिया। इसके बाद बैंक आफ बड़ौदा में बतौर पीओ सितंबर 2011 से नौकरी शुरू की, जिसके बाद ज्वाइंट मैनेजर पद पर पहुंचकर मार्र्च 2015 में इस्तीफा देकर बाय-बाय कर लिया। दोनों नौकरियां छोड़ने के पीछे सुनील बताते हैं कि रूचि के मुताबिक जॉब नहीं था। बैंक में मशीन की तरह काम करना रास नहीं आया। इस दौरान सुनील प्रतियोगी परीक्षाओं में किस्मत आजमाते रहे। कैट इग्जाम में 96.42 फीसदी अंकों के साथ सफलता हासिल की। 2007 में बीएचयू की एमसीए प्रवेश परीक्षा में ऑल इंडिया आठवीं रैंक हासिल की थी, लेकिन एमसीए पसंदीदा सब्जेक्ट न होने के चलते प्रवेश नहीं लिया। 2014 में यूपीटीयू प्रवेश परीक्षा (एमबीए) में दूसरी और एमसीए में 23वीं रैैंक हासिल की थी। सुनील बताते हैं कि एमबीए फाइनेंस में करियर की बेहतर संभावनाएं हैं, जिसमें अच्छा पैकेज मिलने की संभावना है। लिहाजा इलाहाबाद यूनीवर्सिटी में लिखित परीक्षा दे चुके हैं, जिसका परिणाम आना है। इसके अलावा सुनील वर्मा पंजाब यूनीवर्सिटी चंडीगढ़ में जीडी इंटरव्यू में शामिल होकर लौटे हैं। उनकी प्राथमिकता पंजाब यूनीवर्सिटी से एमबीए फाइनेंस करने की है। परिवार में उनकी पत्नी और बेटी के अलावा माता-पिता हैं। जबकि चार बहनों की शादी हो चुकी है।
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