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हाईस्कूल में फेल होने पर छात्र ने फंदा लगाकर जान दी

Sun, 28 Jun 2020 11:11 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 28 Jun 2020 11:11 PM IST
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Student hangs himself after failing high school
छात्र दिव्यांश (फाइल फोटो) - फोटो : LAKHIMPUR
सिकंद्राबाद (लखीमपुर खीरी)। हाईस्कूल में फेल होने पर छात्र ने साड़ी का फंदा गले में डाल लिया और कमरे के अंदर कुंडे से लटककर आत्महत्या कर ली। घर वालों ने दरवाजा तोड़कर शव नीचे उतारा। परिवार वालों ने पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया। इस पर पुलिस ने पंचायतनामा भर कर शव घर वालों को सौंप दिया है।
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गांव कैमा बुजुर्ग निवासी रामकुमार ने बताया कि पुत्र दिव्यांश (18) ने इस बार हाईस्कूल की परीक्षा दी थी। 27 जून को परीक्षा परिणाम आया था, जिसमें वह फेल हो गया। परिणाम आने से पहले वह परिवार के साथ रिश्तेदारी में लखनऊ चले गए थे। घर पर दिव्यांश अपनी दादी (80) के साथ था। दादी को कम दिखाई और सुनाई पड़ता है। उन्होंने बताया कि दिव्यांश ने फेल होने की जानकारी उन्हें मोबाइल पर दी थी। उन्होंने उसे समझाया था कि कोई बात नहीं, फिर मेहनत से पढ़ना और अच्छे नंबरों से पास होना। उन्होंने आशंका जताई कि फेल होने से ही क्षुब्ध होकर दिव्यांश ने फंदे से लटककर आत्महत्या की है। रविवार की शाम को जब वह परिवार समेत घर लौटे तो कमरा अंदर से बंद देख दिव्यांश को आवाज लगाई, लेकिन कोई हलचल नहीं हुई। दरवाजा तोड़ा तो देखा कि दिव्यांश का शव फंदे से लटक रहा था। शव देखते ही परिवार में कोहराम मच गया। परिवार वालों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। घर वालों ने पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया। प्रभारी निरीक्षक अमर सिंह रघुवंशी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में फेल होने से क्षुब्ध होकर फांसी लगाने की बात सामने आई है। घर वालों ने पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया है। इस पर पुलिस ने पंचायतनामा भर शव घर वालों को सौंप दिया है।
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छात्र की मौत से गांव में पसरा सन्नाटा
सिकंद्राबाद। छात्र के फंदे से लटककर जान देने की खबर जब गांव में फैली तो सभी लोग अवाक रह गए। तमाम लोगों की भीड़ उसके घर पर जुट गई। गांव में मातमी सन्नाटा पसर गया।
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गांव कैमा बुजुर्ग निवासी दिव्यांश काफी सीधे स्वभाव का था। उससे किसी से झगड़ा फसाद नहीं हुआ। पढ़ाई करने के साथ ही वह काम में अपने पिता का हाथ बंटाता था। गांव के लोगों को भी इस बात का कतई आभास नहीं था कि दिव्यांश इस तरह का आत्मघाती कदम उठा सकता है। उसके फंदे पर लटकने की जब जानकारी गांव में हुई तो लोग अवाक रह गए। तमाम लोगों की भीड़ उसके घर पर जुट गई। उसके दो भाई और एक बहन है।


‘बच्चों को अकेला न छोड़ें’
रिजल्ट को लेकर बच्चे तनाव में हैं। ऐसे में अभिभावक एक दो सप्ताह बच्चों को अकेला न छोड़ें। उनसे बात करते रहे और बताएं कि नंबर कम आने का मतलब कॅरियर खत्म होना नहीं है। इससे नसीहत लेकर आने वाली परीक्षाओं में बेहतर करने का संकल्प लें। बच्चों के व्यवहार में परिवर्तन लगने पर मनोचिकित्सक को दिखाएं।
-डॉ. अखिलेश शुक्ला, मनोचिकित्सक, जिला अस्पताल
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