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अग्निशमन यंत्र होने के बावजूद प्रयोग नहीं कर पाया स्टाफ
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लखीमपुर खीरी। मोहम्मदी ब्लॉक क्षेत्र के संविलियन विद्यालय सहदेवा में गैस सिलिंडर के लीकेज से लगी आग में एक रसोइया की मौत के बाद स्कूलों की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं। अग्निशमन यंत्र तो हैं लेकिन स्टाफ को पता ही नहीं कि इसे कैसे उपयोग करना है। यही हालात मोहम्मदी में देखने को मिले थे। अग्निशमन यंत्र होने के बावजूद विद्यालय स्टाफ का कोई भी शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक व अन्य रसोइया इसका प्रयोग नहीं कर पाया था।
बेसिक शिक्षा विभाग के कुल करीब 3800 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं, जिनमें बच्चों को मिड डे मील बनाकर खिलाया जाता है। पांच लाख से अधिक बच्चे पंजीकृत हैं। प्रत्येक विद्यालय में सैकड़ों बच्चों के लिए छोटे से किचन में खाना बनाया जाता है, जहां पर आग से बचाव के पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं है। अग्निशमन यंत्र खरीदकर रखे गए हैं, जो महज शोपीस बने हुए हैं। क्योंकि इसे प्रयोग करने के बारे में स्टाफ व रसोइया तक को जानकारी नहीं है। आग से बचाव के इंतजाम में बालू भरी बाल्टियां रखने का भी प्रावधान हैं, लेकिन यह मानक किसी विद्यालय में पूरे नहीं है।
इसके अलावा विद्यालयों में आग से बचाव के लिए बाल्टियों में बालू भरकर रखे जाने का प्रावधान है, जिससे आग लगने की दुर्घटना होने की दशा में बालू डालकर आग पर काबू पाया जा सकता है। संविलियन विद्यालय सहदेवा में बालू भरी बाल्टियां मौजूद नहीं थीं।
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फर्रुखाबाद की एजेंसी कर रही रिफिल - परिषदीय विद्यालयों में कई साल पहले अग्निशमन यंत्र खरीदे गए थे। रिफिलिंग न कराए जाने से कई खराब हो चुके हैं। हालांकि फर्रुखाबाद की एक एजेंसी द्वारा विद्यालयों के अग्निशमन यंत्रों को रिफिल किए जाने की बात सामने आई है, लेकिन इसमें भी संदेह जताया जा रहा है।
बकौल रसोइया कल्याण समिति के अध्यक्ष कैलाश कुमार के अनुसार अग्निशमन यंत्रों को सही ढंग से रिफिल नहीं किया जा रहा है, बल्कि खानापूर्ति कराई जा रही है। इससे यह यंत्र समय आने पर काम नहीं करते हैं। बस डेट बदलकर कागजी कार्यवाही की जाती है।
संविलियन विद्यालय सहदेवा में अग्निशमन यंत्र मौजूद था, जिसे जनवरी में रिफिल कराया गया था। इसे प्रयोग करने की जानकारी स्टाफ को अवश्यहोनी चाहिए थी, जो शायद स्टाफ के किसी सदस्य को नहीं थी। मामला संवेदनशील है, इसलिए सभी विद्यालयों के अग्निशमन यंत्रों व व्यवस्थाओं की जांच कराई जाएगी। ऐसी दुर्घटना की पुनरावृत्ति न हो, जिसके लिए आवश्यक व्यवस्थाएं पूर्ण कराई जाएंगी।
डॉ लक्ष्मीकांत पांडेय, बीएसए
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बेसिक शिक्षा विभाग के कुल करीब 3800 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं, जिनमें बच्चों को मिड डे मील बनाकर खिलाया जाता है। पांच लाख से अधिक बच्चे पंजीकृत हैं। प्रत्येक विद्यालय में सैकड़ों बच्चों के लिए छोटे से किचन में खाना बनाया जाता है, जहां पर आग से बचाव के पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं है। अग्निशमन यंत्र खरीदकर रखे गए हैं, जो महज शोपीस बने हुए हैं। क्योंकि इसे प्रयोग करने के बारे में स्टाफ व रसोइया तक को जानकारी नहीं है। आग से बचाव के इंतजाम में बालू भरी बाल्टियां रखने का भी प्रावधान हैं, लेकिन यह मानक किसी विद्यालय में पूरे नहीं है।
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इसके अलावा विद्यालयों में आग से बचाव के लिए बाल्टियों में बालू भरकर रखे जाने का प्रावधान है, जिससे आग लगने की दुर्घटना होने की दशा में बालू डालकर आग पर काबू पाया जा सकता है। संविलियन विद्यालय सहदेवा में बालू भरी बाल्टियां मौजूद नहीं थीं।
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फर्रुखाबाद की एजेंसी कर रही रिफिल - परिषदीय विद्यालयों में कई साल पहले अग्निशमन यंत्र खरीदे गए थे। रिफिलिंग न कराए जाने से कई खराब हो चुके हैं। हालांकि फर्रुखाबाद की एक एजेंसी द्वारा विद्यालयों के अग्निशमन यंत्रों को रिफिल किए जाने की बात सामने आई है, लेकिन इसमें भी संदेह जताया जा रहा है।
बकौल रसोइया कल्याण समिति के अध्यक्ष कैलाश कुमार के अनुसार अग्निशमन यंत्रों को सही ढंग से रिफिल नहीं किया जा रहा है, बल्कि खानापूर्ति कराई जा रही है। इससे यह यंत्र समय आने पर काम नहीं करते हैं। बस डेट बदलकर कागजी कार्यवाही की जाती है।
संविलियन विद्यालय सहदेवा में अग्निशमन यंत्र मौजूद था, जिसे जनवरी में रिफिल कराया गया था। इसे प्रयोग करने की जानकारी स्टाफ को अवश्यहोनी चाहिए थी, जो शायद स्टाफ के किसी सदस्य को नहीं थी। मामला संवेदनशील है, इसलिए सभी विद्यालयों के अग्निशमन यंत्रों व व्यवस्थाओं की जांच कराई जाएगी। ऐसी दुर्घटना की पुनरावृत्ति न हो, जिसके लिए आवश्यक व्यवस्थाएं पूर्ण कराई जाएंगी।
डॉ लक्ष्मीकांत पांडेय, बीएसए