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खेल शिक्षकों के बिना कैसे खेलेगा इंडिया
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लखीमपुर खीरी। खेलों को बढ़ावा देने के लिए शासन की ओर से ‘खेलेगा इंडिया तभी बढ़ेगा इंडिया’ का जोर शोर से प्रचार प्रसार किया जा रहा है लेकिन खेल शिक्षकों के मामले में स्कूलों की स्थित बेहद दयनीय है। राजकीय इंटर कॉलेज बालक वर्ग के तीन विद्यालयों में एक में ही खेल शिक्षक है। जबकि बालिका विद्यालयों में इनके पद स्वीकृत नहीं है। ऐसा ही हाल राजकीय हाईस्कूलों का है। जबकि बेसिक शिक्षा विभाग के परिषदीय स्कूलों को पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी खेल सामग्री खरीदने के लिए पांच से 10 हजार रुपये प्रति विद्यालय दिए गए हैं, लेकिन अब तक सामग्री खरीदी नहीं गई है।
जिले में राजकीय इंटर कॉलेजों की संख्या 49 है, जिसमें से तीन बालक और छह बालिका कॉलेज हैं। जबकि अन्य राजकीय हाईस्कूल हैं। खेल शिक्षकों के मामले में सिर्फ बालक वर्ग के जीआईसी में ही इनके पद स्वीकृत हैं। इसमें से जीआईसी लखीमपुर में ही तैनाती है। जबकि बालिका इंटर कॉलेज और राजकीय हाईस्कूलों में खेल शिक्षक के पद तक स्वीकृत नहीं है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी की खेलो इंडिया की मंशा पूरी होती नहीं दिख रही।
खेलों का पता नहीं छात्रों से शुल्क ले रहे पूरा
राजकीय विद्यालय हों फिर सहायता प्राप्त और वित्तविहीन, हर जगह छात्रों से क्रीड़ा शुल्क जमा किया जा रहा है। राजकीय विद्यालयों में जहां छात्रों से 60 रुपये तो वहीं वित्तविहीन विद्यालयों में 100 रुपये तक लिया जा रहा है। इसके बावजूद विद्यालयों में खेलों की सुविधा बेहद खराब है।
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जिले में विद्यालयों की संख्या
राजकीय - 49
सहायता प्राप्त- 45
वित्तविहीन- 176
प्राथमिक को पांच हजार और उच्च प्राथमिक को 10 हजार दिए
बेसिक शिक्षा विभाग के परिषदीय विद्यालयों में खेल सामग्री खरीदने के लिए पिछले वर्ष 2018-19 में प्राथमिक को पांच-पांच हजार और उच्च प्राथमिक विद्यालयों को 10-10 हजार रुपये दिए थे। तब खेल सामग्री खरीदने में घपले का मामला सामने आने पर डीएम ने जांच बैठाई थी। इस वर्ष 2019-20 में भी प्राथमिक विद्यालयों को पांच-पांच हजार और उच्च प्राथमिक विद्यालयों को 10-10 हजार रुपये दिए गए हैं, लेकिन अब तक सामग्री की खरीद नहीं की गई है। जनपद में करीब 2711 प्राथमिक विद्यालय हैं, लेकिन इनमें खेल शिक्षक की तैनाती नहीं है। 1134 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में से करीब 300 विद्यालयों में ही शारीरिक शिक्षा के अनुदेशक तैनात हैं। खेल मैदान के नाम पर कुछ विद्यालयों में ही सुविधा है, लेकिन इनमें भी नियमित तौर पर खेल नहीं कराए जाते हैं। खेल सामग्री खरीदने के नाम पर खानापूरी करके बजट को इधर-उधर किया जाता है।
खेल शिक्षक की तैनाती है। खेल भी कराए जाते हैं। शिक्षकों की कमी के कारण उनसे पठन पाठन का कार्य भी लिया जाता है।
-डॉ. राजेंद्र कुमार आर्य, प्रधानाचार्य, जीआईसी
छात्रों को नियमित खेल, जिसमें क्रिकेट, वॉलीबॉल का अभ्यास कराया जाता है। इसके लिए कॉलेज में खेल सामग्री उपलब्ध है।
- अनिल कुमार भारती, शारीरिक शिक्षा शिक्षक जीआईसी
सभी प्रधानाचार्यों को अनिवार्य रूप से खेल कराने के निर्देश जारी किए जा चुके हैं। खेल को बढ़ावा मिले, इसलिए हर साल तहसील और जिला स्तर की प्रतियोगिता कराई जाती है।
- डॉ. आरके जायसवाल, डीआईओएस
+जिन विद्यालयों में खेल मैदान नहीं है, उनमें इनडोर खेल सामग्री खरीदने के निर्देश दिए गए हैं। जैसे बैडमिंटन, कैरम आदि सामग्री खरीदी जाएगी। सभी विद्यालयों में बच्चों को खेलों में प्रतिभाग कराने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके आधार पर ब्लॉक और जिला स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिताएं करवाई जाती हैं।
-बुद्धप्रिय सिंह, बीएसए
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जिले में राजकीय इंटर कॉलेजों की संख्या 49 है, जिसमें से तीन बालक और छह बालिका कॉलेज हैं। जबकि अन्य राजकीय हाईस्कूल हैं। खेल शिक्षकों के मामले में सिर्फ बालक वर्ग के जीआईसी में ही इनके पद स्वीकृत हैं। इसमें से जीआईसी लखीमपुर में ही तैनाती है। जबकि बालिका इंटर कॉलेज और राजकीय हाईस्कूलों में खेल शिक्षक के पद तक स्वीकृत नहीं है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी की खेलो इंडिया की मंशा पूरी होती नहीं दिख रही।
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खेलों का पता नहीं छात्रों से शुल्क ले रहे पूरा
राजकीय विद्यालय हों फिर सहायता प्राप्त और वित्तविहीन, हर जगह छात्रों से क्रीड़ा शुल्क जमा किया जा रहा है। राजकीय विद्यालयों में जहां छात्रों से 60 रुपये तो वहीं वित्तविहीन विद्यालयों में 100 रुपये तक लिया जा रहा है। इसके बावजूद विद्यालयों में खेलों की सुविधा बेहद खराब है।
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जिले में विद्यालयों की संख्या
राजकीय - 49
सहायता प्राप्त- 45
वित्तविहीन- 176
प्राथमिक को पांच हजार और उच्च प्राथमिक को 10 हजार दिए
बेसिक शिक्षा विभाग के परिषदीय विद्यालयों में खेल सामग्री खरीदने के लिए पिछले वर्ष 2018-19 में प्राथमिक को पांच-पांच हजार और उच्च प्राथमिक विद्यालयों को 10-10 हजार रुपये दिए थे। तब खेल सामग्री खरीदने में घपले का मामला सामने आने पर डीएम ने जांच बैठाई थी। इस वर्ष 2019-20 में भी प्राथमिक विद्यालयों को पांच-पांच हजार और उच्च प्राथमिक विद्यालयों को 10-10 हजार रुपये दिए गए हैं, लेकिन अब तक सामग्री की खरीद नहीं की गई है। जनपद में करीब 2711 प्राथमिक विद्यालय हैं, लेकिन इनमें खेल शिक्षक की तैनाती नहीं है। 1134 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में से करीब 300 विद्यालयों में ही शारीरिक शिक्षा के अनुदेशक तैनात हैं। खेल मैदान के नाम पर कुछ विद्यालयों में ही सुविधा है, लेकिन इनमें भी नियमित तौर पर खेल नहीं कराए जाते हैं। खेल सामग्री खरीदने के नाम पर खानापूरी करके बजट को इधर-उधर किया जाता है।
खेल शिक्षक की तैनाती है। खेल भी कराए जाते हैं। शिक्षकों की कमी के कारण उनसे पठन पाठन का कार्य भी लिया जाता है।
-डॉ. राजेंद्र कुमार आर्य, प्रधानाचार्य, जीआईसी
छात्रों को नियमित खेल, जिसमें क्रिकेट, वॉलीबॉल का अभ्यास कराया जाता है। इसके लिए कॉलेज में खेल सामग्री उपलब्ध है।
- अनिल कुमार भारती, शारीरिक शिक्षा शिक्षक जीआईसी
सभी प्रधानाचार्यों को अनिवार्य रूप से खेल कराने के निर्देश जारी किए जा चुके हैं। खेल को बढ़ावा मिले, इसलिए हर साल तहसील और जिला स्तर की प्रतियोगिता कराई जाती है।
- डॉ. आरके जायसवाल, डीआईओएस
+जिन विद्यालयों में खेल मैदान नहीं है, उनमें इनडोर खेल सामग्री खरीदने के निर्देश दिए गए हैं। जैसे बैडमिंटन, कैरम आदि सामग्री खरीदी जाएगी। सभी विद्यालयों में बच्चों को खेलों में प्रतिभाग कराने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके आधार पर ब्लॉक और जिला स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिताएं करवाई जाती हैं।
-बुद्धप्रिय सिंह, बीएसए