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दक्षिण खीरी वन प्रभाग जंगल को ईको टूरिज्म से जोड़ने की तैयारी
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लखीमपुर-खीरी। दुधवा टाइगर रिजर्व भ्रमण के लिए आने वाले सैलानी अब दक्षिण खीरी वन प्रभाग में भी बाघों का दीदार कर सकेंगे। दक्षिण खीरी वन प्रभाग की मोहम्मदी रेंज के महेशपुर और देवीपुर बीट जंगल को ईको टूरिज्म से जोड़ने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए सर्वे किया जा रहा है। दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन में एक टूरिस्ट कॉरिडोर बनाने का काम पहले से जारी है। मोहम्मदी रेंज इसी नए कॉरिडोर से जुड़ेगा।
दक्षिण खीरी वन प्रभाग जंगल में कठिना नदी का किनारा बाघों का पसंदीदा प्राकृतवास है। यहां करीब 16 बाघों का कुनबा होने का अनुमान है। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन से जुड़े दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मोहम्मदी रेंज में कठिना नदी के किनारे महेशपुर, देवीपुर बीट जंगल में बाघों की मौजूदगी लगातार कई वर्षों से दर्ज की जा रही है। यहां बाघ ही नहीं, बारहसिंघा समेत हिरन की कई प्रजातियां भी हैं। पिछले कुछ वर्षों में यहां मानव बाघ संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ी हैं। कई लोग बाघ के हमले का शिकार हुए हैं तो बाघों पर भी खतरा मंडरा रहा है।
कठिना नदी का कछार है बाघों का पसंदीदा प्राकृतवास
मोहम्मदी रेंज के महेशपुर इलाके में बाघों के प्राकृतवास के लिए जंगल, नदी, ग्रासलैंड के अलावा नीलगाय, हिरन, जंगली सुअर आदि बाघों के भोजन के रूप में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। जंगल का ईको सिस्टम बाघों के लिए बेहद अनुकूल है। साल सागौन समेत विभिन्न प्रजातियों से भरे इस जंगल का प्राकृतिक सौंदर्य भी दुधवा टाइगर रिजर्व से कम नहीं है। जंगल से सटे गन्ने के खेत पूरी तरह से बाघों को जंगली घास का एहसास भी देने के लिए पर्याप्त है। जंगल में कई वाच टॉवर भी पहले से बने हुए हैं।
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वन विभाग दक्षिण खीरी वन प्रभाग में इको टूरिज्म की संभावनाएं तलाश रहा है। यहां नया टूरिस्ट कॉरिडोर बनाने और बाघों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग की टीम सर्वे कर रही है। इस इलाके में बाघों की मौजूदगी की वजह से इको टूरिज्म की पर्याप्त संभावनाएं हैं। इस वजह से इसका प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। मोहम्मदी रेंज के ईको टूरिज्म से जुड़ने से बाघों की सुरक्षा के साथ साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी उपलब्ध होंगे।
- संजय विश्वाल, डीएफओ दक्षिण खीरी वन प्रभाग
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दक्षिण खीरी वन प्रभाग जंगल में कठिना नदी का किनारा बाघों का पसंदीदा प्राकृतवास है। यहां करीब 16 बाघों का कुनबा होने का अनुमान है। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन से जुड़े दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मोहम्मदी रेंज में कठिना नदी के किनारे महेशपुर, देवीपुर बीट जंगल में बाघों की मौजूदगी लगातार कई वर्षों से दर्ज की जा रही है। यहां बाघ ही नहीं, बारहसिंघा समेत हिरन की कई प्रजातियां भी हैं। पिछले कुछ वर्षों में यहां मानव बाघ संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ी हैं। कई लोग बाघ के हमले का शिकार हुए हैं तो बाघों पर भी खतरा मंडरा रहा है।
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कठिना नदी का कछार है बाघों का पसंदीदा प्राकृतवास
मोहम्मदी रेंज के महेशपुर इलाके में बाघों के प्राकृतवास के लिए जंगल, नदी, ग्रासलैंड के अलावा नीलगाय, हिरन, जंगली सुअर आदि बाघों के भोजन के रूप में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। जंगल का ईको सिस्टम बाघों के लिए बेहद अनुकूल है। साल सागौन समेत विभिन्न प्रजातियों से भरे इस जंगल का प्राकृतिक सौंदर्य भी दुधवा टाइगर रिजर्व से कम नहीं है। जंगल से सटे गन्ने के खेत पूरी तरह से बाघों को जंगली घास का एहसास भी देने के लिए पर्याप्त है। जंगल में कई वाच टॉवर भी पहले से बने हुए हैं।
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वन विभाग दक्षिण खीरी वन प्रभाग में इको टूरिज्म की संभावनाएं तलाश रहा है। यहां नया टूरिस्ट कॉरिडोर बनाने और बाघों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग की टीम सर्वे कर रही है। इस इलाके में बाघों की मौजूदगी की वजह से इको टूरिज्म की पर्याप्त संभावनाएं हैं। इस वजह से इसका प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। मोहम्मदी रेंज के ईको टूरिज्म से जुड़ने से बाघों की सुरक्षा के साथ साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी उपलब्ध होंगे।
- संजय विश्वाल, डीएफओ दक्षिण खीरी वन प्रभाग