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Lakhimpur Kheri News: किसी को याद आ रहा पिछला जन्म तो किसी को महसूस हो रही दूसरे की आत्मा
Sat, 31 Jan 2026 11:14 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 31 Jan 2026 11:14 PM IST
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जिला अस्पताल के मानसिक रोग विशेषक कक्ष के बाहर लगी मरीजों की भीड़। संवाद
अंकित श्रीवास्तव
लखीमपुर खीरी। जिले में सायकोटिक डिसऑर्डर के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। किसी मरीज को पिछले जन्म के अभिशाप तो किसी मरीज को खुद के अंदर दूसरे की आत्मा महसूस होती है। मानसिक रोग विशेषज्ञ कक्ष में ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं, जिन्हें यह भ्रम होता है कि किसी और की आत्मा उनके भीतर समा गई है। चिकित्सकों के अनुसार यह समस्या शारीरिक नहीं, बल्कि गंभीर मानसिक विकार से जुड़ी होती है।
जिला अस्पताल के मानसिक रोग विशेषज्ञ कक्ष में करीब 100 मरीजों की ओपीडी में 20 प्रतिशत मरीज सायकोटिक डिसऑर्डर (मनोविकार) के आ रहे हैं। जिला अस्पताल के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. अखिलेश शुक्ला ने बताया कि पहले जहां साल में सीमित मरीज आते थे, वहीं अब हर रोज करीब 20 मामले सामने आ रहे हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे मरीजों के मन में वास्तविकता और भ्रम के बीच अंतर करने की क्षमता कम हो जाती है। वे अपने विचारों को सच मानकर उसी अनुसार व्यवहार करने लगते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार सायकोटिक डिसऑर्डर की मुख्य वजहों में विश्वास की कमी, भावनाओं को व्यक्त न कर पाना, पारिवारिक तनाव, अत्यधिक चिंता, अनुशासनहीन जीवनशैली और अकेलापन शामिल है।
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मनोचिकित्सक का कहना है कि सायकोटिक डिसऑर्डर एक गंभीर बीमारी है। समय पर इलाज न मिलने पर स्थिति और गंभीर हो सकती है। इसलिए मनोचिकित्सक से संपर्क कर पूरा इलाज करवाएं। खुद की बजाय चिकित्सक के परामर्श पर ही दवा छोड़ें। संवाद
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लखीमपुर खीरी। जिले में सायकोटिक डिसऑर्डर के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। किसी मरीज को पिछले जन्म के अभिशाप तो किसी मरीज को खुद के अंदर दूसरे की आत्मा महसूस होती है। मानसिक रोग विशेषज्ञ कक्ष में ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं, जिन्हें यह भ्रम होता है कि किसी और की आत्मा उनके भीतर समा गई है। चिकित्सकों के अनुसार यह समस्या शारीरिक नहीं, बल्कि गंभीर मानसिक विकार से जुड़ी होती है।
जिला अस्पताल के मानसिक रोग विशेषज्ञ कक्ष में करीब 100 मरीजों की ओपीडी में 20 प्रतिशत मरीज सायकोटिक डिसऑर्डर (मनोविकार) के आ रहे हैं। जिला अस्पताल के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. अखिलेश शुक्ला ने बताया कि पहले जहां साल में सीमित मरीज आते थे, वहीं अब हर रोज करीब 20 मामले सामने आ रहे हैं।
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डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे मरीजों के मन में वास्तविकता और भ्रम के बीच अंतर करने की क्षमता कम हो जाती है। वे अपने विचारों को सच मानकर उसी अनुसार व्यवहार करने लगते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार सायकोटिक डिसऑर्डर की मुख्य वजहों में विश्वास की कमी, भावनाओं को व्यक्त न कर पाना, पारिवारिक तनाव, अत्यधिक चिंता, अनुशासनहीन जीवनशैली और अकेलापन शामिल है।
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मनोचिकित्सक का कहना है कि सायकोटिक डिसऑर्डर एक गंभीर बीमारी है। समय पर इलाज न मिलने पर स्थिति और गंभीर हो सकती है। इसलिए मनोचिकित्सक से संपर्क कर पूरा इलाज करवाएं। खुद की बजाय चिकित्सक के परामर्श पर ही दवा छोड़ें। संवाद