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...तो इन पीड़ितों को नहीं  मिल सकती सरकारी मदद!

अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी। Updated Fri, 22 Jul 2016 11:25 PM IST
हताहत
हताहत - फोटो : अमर उजाला
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खेत और घर नदी में समाए...पर अफसर मान रहे उनका सबकुछ सुरक्षित
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तहसील धौरहरा के गांव हुलासपुरवा की कनकलता और बन्नो के खेत और घर देखते ही देखते घाघरा नदी में समा गए। मजबूरी में अपने हाथों मकान तोड़कर किसी तरह ईंटें और सामान बचाया। अब खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं...और परिवार दो जून की रोटी को भी तरस रहे हैं। तहसील प्रशासन ने उन्हे राशन आदि कोई राहत सामग्री नहीं दी है, क्योंकि अफसर मान रहे हैं, जिनके घर नदी में कटे हैं, उनका नुकसान तो हुआ, लेकिन अनाज और सारा सामान उन लोगों ने बचा लिया, इसलिए उन्हें राहत सामग्री नहीं दी जा सकती।
हुलासपुरवा की कनकलता कहती हैं कि उनके पास जमीन थी। पति और तीन बेटे हंसी फसल उगाकर परिवार चला रहे थे। दो साल पहले खेत कटने शुरू हुए। पहले नदी में खेत समा गए, जिससे उनका परिवार के सामने मजदूरी ही सहारा बची थी, अब घर भी उजड़ गया, जिससे अब उनका परिवार खुले आसमान में रहकर भुखमरी को मजबूर है, वहीं प्रधान रामभजन मौर्य के घर के बाड़े में सहारा लिए 80 साल की बन्नो का कहना है कि उनका सबकुछ पानी में बह गया। पति भी बीमार हैं, जिससे दो जून की रोटी का भी इंतजाम नहीं है। प्रधान की मदद से पेट भर जाता है। ये परेशानी शारदा और घाघरा नदी के कटान का दंश झेल रहे हर बाढ़ पीड़ित की है। कुछ तो भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं, लेकिन अफसरों और जनप्रतिनिधियों को शायद इनकी कोई परवाह नहीं है। तहसील प्रशासन ने कुछ लोगों को तिरपाल और पिपिया तो मुहैय्या करा दी, लेकिन राशन का एक दाना भी नहीं दिया। इस बाबत प्रशासन के अधिकारियों ने जो बयान दिए, वे इन पीड़ितों के लिए निराशा भरे हैं। तहसीलदार धौरहरा नीरज पटेल का कहना है कि उनके यहां अभी कोई बाढ़ पीड़ित नहीं है, जबकि प्रभारी बाढ़/एडीएम एसपी सिंह कहते हैं कि जिन लोगों के घर नदी में समा गए हैं, उन लोगों ने घर के साथ सारा सामान और अनाज भी बचाकर ऊंचे पर ले आए हैं। उनका अनाज और सामान सुरक्षित है, इसलिए उन्हें राशन आदि नहीं दिया गया है। वह कहते हैं कि उनकी सूची बना ली गई है। यदि नदी में झोपड़ी समाई है तो साढ़े चार हजार रुपये और पक्का मकान समाया है तो नौ हजार सौ रुपये की सहायता राशि दी जाएगी।
 
हुलासपुरवा में समा गए इनके घर
घाघरा नदी के कटान में महेश, बालकराम, वेदप्रकाश, संतोष कुमार, लता देवी, सुलखें, हरिशंकर, कमला देवी, चंद्रहाश, शत्रोहन, रामकुमार, इंसान अली, नूरजहां, अब्बास, शबनम बेगम, अमीन, कैलाश, संतोष, धनीराम, कमरुद्दीन, बन्नओ, कल्लू, नन्दकिशोर, बलराम, बृजकिशोर, राधेश्याम।
 
बाढ़ पीड़ितों को दी जानी चाहिए आपदा सामग्री किट
बाढ़ पीड़ितों को आपदा सामग्री किट, जिसमें 10 किलो आटा, पांच किलो चावल कामन, दो किलो दाल अरहर, एक पैकेट माचिस, पांच मोटी मोमबत्ती, एक किलो नमक आयोडाइज्ड, एक नहाने का साबुन लाइफब्वाय, एक कपड़ा धोने का साबुन और यह सामग्री रखने के लिए प्लास्टिक बैग।
 
बाढ़ राहत केंद्र की हकीकत बता रही प्रशासन की संजीदगी
लखीमपुर खीरी। जिले में शारदा और घाघरा नदी का कहर जारी है। प्रशासन के अधिकारी बाढ़ और कटान से निपटने के लिए सभी इंतजाम पूरे कर लेने का दावा कर रहे हैं, लेकिन मौके पर तस्वीर कुछ और ही है। अमर उजाला टीम शुक्रवार को तहसील धौरहरा के गांव हनपुर कटौली स्थित बाढ़ राहत केंद्र पर पहुंची तो यह बंद मिला। राहत केंद्र के कक्षों पर ताले लटकते मिले, जबकि बरामदे में गंदगी थी। इससे साफ लग रहा था कि बाढ़ राहत केंद्र के प्रभारी यहां झांकने तक नहीं आए हैं। केंद्र प्रभारी सुधीर वर्मा का सेलफोन लगाया तो वह बंद मिला। इस बाबत बाढ़ प्रभारी/एडीएम एसपी सिंह ने कहा कि सभी बाढ़ चौकियों स्थापित कर दी गई हैं। यदि कोई लापरवाही मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी।
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