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अब तक 59 हेक्टेयर जमीन को नदियों ने निगला

Thu, 06 Aug 2020 02:18 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 06 Aug 2020 02:18 AM IST
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So far, rivers have swallowed 59 hectares of land
कटान के डर से अपना मकान तोड़ते ग्रामीण। संवाद - फोटो : LAKHIMPUR
लखीमपुर खीरी। शारदा और घाघरा नदियों का कहर जारी है। इन नदियों का जलस्तर भले ही घटा है, लेकिन घटते जलस्तर ने भू-कटान तेज कर दिया है। पलिया, निघासन और धौरहरा क्षेत्र में 57 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं, जिससे 16815 की आबादी प्रभावित हुई है। डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि कुल 1253 हेक्टेयर क्षेत्रफल बाढ़ से प्रभावित हुआ है, जिसमें 1082 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फसलें प्रभावित हुई हैं। 59.108 हेक्टेयर क्षेत्रफल का नदियों ने कटान कर दिया है। पीड़ितों तक राहत पहुंचाने के लिए नावों की संख्या बढ़ाई गई है। डीएम ने बताया कि 4668 पशुओं का टीकाकरण कराया गया है। बुधवार को शारदा बैराज पर जलस्तर 135.10 सेमी रहा, जो खतरे के निशान से नीचे है। घाघरा नदी पर बने गिरिजा बैराज पर भी जलस्तर 135.35 सेमी रहा, जो खतरे के निशान से कम है।
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रैनी गांव के 12 घर शारदा नदी में समाए
धौरहरा। चार दिनों में गांव रैनी के 12 घर जो नदी की जद में आ गए थे अब वह नदी की तेज धार में समा गए हैैं। इसके अलावा नदी ने गांव की कृषि योग्य करीब सौ बीघा जमीन फसलों सहित निगल ली है। एसडीएम ने बाढ़ खंड को बचाव कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। चार दिनों में नदी की जद में आ चुके श्रवण कुमार, मुलुकराम, राजकिशोर, ललित मोहन वर्मा, पूनम वर्मा, राम सिंह, कनौजी वर्मा, रमाशंकर वर्मा, देशराज वर्मा, मौजीलाल, धरमपाल के घर देखते-देखते नदी में समा गए। रामनगर, बगहा, गोड़ियनपुरवा और घोसियाना में घाघरा नदी भू-कटान कर रही है। यहां भी करीब 200 बीघा जमीन नदी में समा चुकी है। एसडीएम एस सुधाकरन ने बताया कि रैनी गांव में घर कटे नहीं है। लोगों ने भू कटान तेज होता देख अपने घर तोड़ लिए हैं। इन लोगों के घर दूसरी जगह पर बने भी है। कृषि योग्य भूमि करीब छह हेक्टेयर कटी है। पीड़ित परिवारों को राशन किट दी जा रही है।
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शारदा नदी के घटने-बढ़ने का क्रम जारी, अब भी खतरे के निशान से 45 सेमी ऊपर
पलियाकलां। शारदा नदी का घटने-बढ़ने का क्रम लगातार जारी है। नदी कभी बढ़ती है तो कभी घटती है, लेकिन जलस्तर खतरे के निशान से नीचे आने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार को भी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 45 सेमी ऊपर था। इमलिया फार्म तथा बोझवा ठोकर नंबर एक के पास अब भी बाढ़ का पानी चल रहा है। रास्तों पर भी जलभराव है। मझगईं के नयापुरवा गांव में कम होती नदी अब भू-कटान करने लगी है, जिससे ग्रामीणों में हड़कंप है।
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नदी का जलस्तर सुबह बढ़ता है, लेकिन दोपहर बाद घट जाता है। इससे जलस्तर स्थिर बना हुआ है। जल आयोग के जेई दुर्गेश कुमार ने बताया कि बुधवार को शारदा नदी का जलस्तर दोपहर तीन बजे तक खतरे के निशान 154.100 सेमी से 45 सेमी ऊपर 154.550 सेमी पर बह रहा था। बताया कि नदी घट रही है और अगर आगे भी ऐसा रहा तो जल्द ही खतरे के निशान से नीचे पहुंच सकती है। हालांकि नदी का घटता जलस्तर ग्रामीणों की चिंता बढ़ा रहा है। इमलिया फार्म तथा बोझवा ठोकर नंबर एक के रास्तों पर अब भी पानी चल रहा है। ठोकर नंबर एक के पार खड़ी गन्ने की फसल में लबालब शारदा नदी का पानी भरा हुआ है। उधर मझगईं क्षेत्र के नयापुरवा में भी नदी ने भूकटान तेज कर दिया है। नदी ग्रामीणों के घरों की ओर बढ़ने लगी हैं, जिससे उनमें हड़कंप है। संवाद
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