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घाघरा मचा रही तबाही, अभियंता कर रहे खानापूरी
विकास शुक्ल लखीमपुर खीरी।
Updated Sat, 23 Jul 2016 11:14 PM IST
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कटान में समाता स्कूल
- फोटो : अमर उजाला
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अमर उजाला को ग्राम प्रधान ने बताई हकीकत, कहा, मिट्टी और रोड़ा से नहीं रुकेगा कटान
घरों का मलबा भरकर बना दिए बम्बू क्रेट
घाघरा नदी के कटान से एक ओर लोगों की खेती और घरों का वजूद मिट रहा है तो पीड़ितों की पूरी जिंदगी दांव पर लगी है, वहीं बाढ़ खंड के अभियंता खानापूरी करके अपनी जेबें भरने में लगे हैं। इसका जीता जागता नमूना धौरहरा तहसील की ग्राम पंचायत रुद्रपुर के गांव हुलासपुरवा में कटान की रोकथाम के लिए कराए जा रहे बाढ़ खंड को काम को देखने से मिला। यहां मजदूर बोरियों में मिट्टी और रोड़े भर रहे थे। बेचारे गांव वालों ने कटान के डर से तोड़े गए अपने घरों के मलबे तक को उन्हें मुफ्त में सिर्फ यह सोचकर दे दिया कि जल्दी कटान रुक जाएगा तो वह बर्बादी से बच जाएंगे। गांव वालों की इस मजबूरी का फायदा ठेकेदार उठा रहे हैं तो बाढ़ खंड के अभियंता भी चुप्पी साधे हैं।
धौरहरा के हुलासपुरवा में जून के अंतिम सप्ताह में ही कटान शुरू हो गया था। ग्राम प्रधान रामभजन मौर्य का कहना है कि पहले तो अधिकारियों ने सुनी नहीं, जब खेत कट गए और बस्ती भी नदी में समाने लगी, तब अधिकारी चेते। दस दिन पहले बाढ़ खंड के अभियंता आए और कटर बनाने को कहा। काम की गति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अभी तक सिर्फ दो बम्बू के्रट बनाए गए हैं। बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता विनोद कुमार कहते हैं, हुलासपुरवा में तत्काल नदी की धारा मोडने की जरूरत है, इसलिए वहां पर बम्बू क्रेट, जो बांस के तीन मीटर लंबे, डेढ़ मीटर चौड़े और एक मीटर ऊंचे बनाने के निर्देश दिए हैं। इनमें पत्थर भरा जाता है। मलबा भरे जाने के सवाल पर कहते हैं कि हो सकता है, जल्दबाजी में ऐसा किया गया हो, लेकिन यह गलत है। वह खुद जाकर देखेंगे और मानक के अनुरूप बनवाएंगे। इसके बाद जब उनसे यह पूछा गया कि दस दिन में सिर्फ दो बम्बू क्रेट ही बन पाए हैं तो इसका जवाब वह टाल गए। कुल मिलाकर नदी के कटान के बचाव का कार्य बेहद धीमी गति से हो रहा है, जिससे कटान नहीं रुक सकता।
बेबाक बोले ग्राम प्रधान: कटान रोकने की नहीं, लाखों हजम करने की है नीयत
ग्राम पंचायत रुद्रपुर के प्रधान रामभजन मौर्य कहते हैं कि कटाने रोकने की मंशा होती तो बाढ़ खंड के अभियंता पत्थरों की खेप यहां पहुंचाते और नियमानुसार बम्बू क्रेट में पत्थर भरकर कटान रोक सकते थे, लेकिन दस दिनों में सिर्फ दो क्रेट बनाई हैं, जिसमे कटान पीड़ितों के घरों का मलबा यानी मिट्टी और रोड़ा भरकर डाल दिया है। उन्होंने दो बार मजदूरों को रोका तो वह काम बंद कर बैठ गए। जेई आरबी प्रजापति को अवगत कराया तो वह बोले, जल्द ही पत्थर आ जाएंगे। प्रधान कहते हैं कि फिलहाल बाढ़ खंड की नीयत कटान रोकने की नहीं, बल्कि लाखों हजम करने की लग रही है।
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घाघरा में समाने के
कगार पर पहुंचा लालापुर स्कूल
बीईओ ने किया मौका मुआयना, भेजी रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
धौरहरा खीरी। रमियाबेहड़ ब्लाक के लालापुर मजरा सुजानपुर में कटान करती आ रही घाघरा नदी गांव के प्राथमिक स्कूल का अस्सी प्रतिशत हिस्सा नदी में समा चुका है। बीईओ रमियाबेहड़ सत्यप्रकाश नें रिपोर्ट बीएसए को भेजी है। लालापुर में निरंतर कटान करती चली आ रही घाघरा ने किसानों की जमीनें और झोपड़ियों को काटने के बाद गांव के स्कूल का कटान कर रही थी। घाघरा ने धीरे धीरे स्कूल का अस्सी प्रतिशत हिस्सा निगल लिया है। शेष बचा स्कूल किसी भी समय पूरा नदी में समा सकता है। बीईओ रमियाबेहड़ सत्यप्रकाश में मौका मुआयना कर रिपोर्ट बीएसए को भेजी है। यहां पंजीकृत बच्चों को पड़ोसी गांव के स्कूल माथुरपुर में पढने को कहा गया है। स्कूल में तैनात शिक्षकों को माथुरपुर स्कूल से संबंध कर दिया है। बीईओ ने बताया कि स्कूल पूरा किसी भी समय नदी में गिर सकता है। रिपोर्ट बीएसए को भेज दी है।
डीएम गंभीर, एसडीएम ने किया दौरा
धौरहरा। घाघरा शारदा नदियों के कटान से हो रही लोगों की परेशानियों पर डीएम आकाशदीप गंभीर हैं। उन्होंने खबरों को संज्ञान में लिया है। शुक्रवार को एसडीएम लवकुमार सिंह ने लालापुर, हुलासपुरवा और भुरजिनपुरवा गांवों का निरीक्षण कर सिंचाई विभाग के लोगों को बचाव कार्य में लगाया। एसडीएम लवकुमार सिंह नें बताया कि लालापुर और हुलासपुरवा में सिंचाई विभाग ने बांस की के्रट बनाकर कटान रोकने का प्रयास तेज कर दिया है।
शारदा में फिर आया उफान, हड़कंप
खतरे के निशान से 86 सेमी ऊपर चल रहा बहाव, कई गांव आए बाढ़ की चपेट में
पलियाकलां। लगातार जारी बारिश से शारदा नदी में एक बार फिर से उफान आ गया है। मौजूदा समय में नदी खतरे के निशान से 86 सेमी बह रही है और इससे कई गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। शारदा नदी का जलस्तर एक बार फिर से बढ़कर खतरे के निशान 153.620 सेमी से 86 सेमी ऊपर 154.480 सेमी पर पहुंच गया है। शारदा नदी का जलस्तर बढ़ने से पलिया क्षेत्र के आजादनगर, बर्बादनगर, मेलाघाट, श्रीनगर, खैराना, बोझवा, मटैहिया, दौलतापुर, कचनारा आदि गांव प्रभावित हुए हैं। जबकि संपूर्णानगर क्षेत्र के लगदहन, पतेड़ा, बाजपुर, त्रिकोलिया आदि गांवों में भी जलभराव हो गया है। इसके साथ ही मझगईं क्षेत्र के नयापुरवा, खालेपुरवा, चैरी आदि गांवों में भी शारदा नदी ने प्रवेश कर लिया है। नयापुरवा गांव में शारदा नदी का भूमि कटान तेज हो गया है। इससे ग्रामीणों में हड़कंप मच गया है। शारदा नदी की बाढ़ से दौलतापुर में भी शारदा ने जमीन काटनी शुरू कर दी है जिससे गन्ना सहित तमाम फसलें बाढ़ में डूब गई है। जिससे किसान खासे परेशान नजर आ रहे हैं।
बीते 24 घंटे में क्षेत्र में हुई
रिकार्ड 121.8 एमएम बरसात
इलाके में दो दिनों से हो रही बारिश से जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है। पिछले 24 घंटों में यहां 121.8 मिलीमीटर वर्षा रिकार्ड की गई, जो अब तक की सबसे ज्यादा बारिश है। नगर समेत ग्रामीण अंचल के निचले मोहल्लों में भीषण जलभराव हो गया और कई गलियों में पानी भर जाने से लोगों को आवागमन में दिक्कतों का समाना करना पड़ा।
केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक 24 घंटे में 121.8 एमएम वर्षा रिकार्ड की गई है। यह अभी तक की सबसे ज्यादा बारिश बताई गई है। क्षेत्र में दो दिनों से लगातार हो रही बरसात से शहर की स्टेशन रोड, मेला रोड, नगर पालिका रोड के साथ ही अन्य तमाम निचली सड़कों पर भारी जलभराव हो गया। इसके साथ ही शहर के निचले मोहल्लों व गलियों में पानी भरने से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। तहसील में भी भीषण जलभराव हो जाने से वादकारियों के साथ ही वकीलों को दिक्कतें हुईं। वकीलों के तख्त पानी में डूबे रहे तथा न्यायालय तक जाने वाले रास्ते पर भी पानी भरा होने से काफी परेशानियां उठाकर लोग निकलने के लिए विवश हुए। उधर बोझवा, बरेली फार्म में भी बारिश का पानी सड़कों और घरों में भर गया है।
कच्ची दीवार के मलबे में दबकर जख्मी महिला की मौत
अमीरनगर। ग्राम देवरिया के मजरा नौवाखेड़ा गांव के जमुनैया झाले में शनिवार की शाम बारिश के चलते एक मकान की कच्ची दीवार गिरने से जख्मी महिला 32 वर्षीया मनीषा देवी की शाहजहांपुर अस्पताल में मौत हो गई। मालूम हो कि 17 जुलाई की शाम गांव के अशोक कुमार के मकान की कच्ची दीवार लगातार बारिश के चलते गिर गई थी, उसके मलबे में दबकर अशोक कुमार (35) की मौके पर ही मौत हो गई थी जबकि पत्नी मनीषा (32) तथा पुत्र पवन (5) गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे। पत्नी मनीषा का इलाज शाहजहांपुर के अस्पताल में चल रहा था जहां शुक्रवार की रात उसने भी दम तोड़ दिया। पति- पत्नी की मौत से उसके चार छोटे छोटे बच्चे अनाथ हो गए हैं। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय भेज दिया है।
लगातार बारिश से दीवार गिरी
रजागंज। तहसील गोला क्षेत्र के गांव कपरहा में शुक्रवार की रात हुई रुक- रुक कर तेज बारिश से हरिओम अवस्थी के घर की दीवार ढह गई। दीवार पर पड़े छप्पर के नीचे सो रहा विकलांग हरिओम बाल- बाल बच गया। चीख पुकार सुनकर पड़ोस के लोग आ गये जिन्होंने छप्पर के नीचे फंसे विकलांग को बाहर निकाल लिया। घटना की सुचना पर सुबह पहुंचे ग्राम प्रधान नीरज शुक्ला ने दीवार गिरने की सूचना तहसील प्रशासन को दी है।
घरों का मलबा भरकर बना दिए बम्बू क्रेट
घाघरा नदी के कटान से एक ओर लोगों की खेती और घरों का वजूद मिट रहा है तो पीड़ितों की पूरी जिंदगी दांव पर लगी है, वहीं बाढ़ खंड के अभियंता खानापूरी करके अपनी जेबें भरने में लगे हैं। इसका जीता जागता नमूना धौरहरा तहसील की ग्राम पंचायत रुद्रपुर के गांव हुलासपुरवा में कटान की रोकथाम के लिए कराए जा रहे बाढ़ खंड को काम को देखने से मिला। यहां मजदूर बोरियों में मिट्टी और रोड़े भर रहे थे। बेचारे गांव वालों ने कटान के डर से तोड़े गए अपने घरों के मलबे तक को उन्हें मुफ्त में सिर्फ यह सोचकर दे दिया कि जल्दी कटान रुक जाएगा तो वह बर्बादी से बच जाएंगे। गांव वालों की इस मजबूरी का फायदा ठेकेदार उठा रहे हैं तो बाढ़ खंड के अभियंता भी चुप्पी साधे हैं।
धौरहरा के हुलासपुरवा में जून के अंतिम सप्ताह में ही कटान शुरू हो गया था। ग्राम प्रधान रामभजन मौर्य का कहना है कि पहले तो अधिकारियों ने सुनी नहीं, जब खेत कट गए और बस्ती भी नदी में समाने लगी, तब अधिकारी चेते। दस दिन पहले बाढ़ खंड के अभियंता आए और कटर बनाने को कहा। काम की गति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अभी तक सिर्फ दो बम्बू के्रट बनाए गए हैं। बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता विनोद कुमार कहते हैं, हुलासपुरवा में तत्काल नदी की धारा मोडने की जरूरत है, इसलिए वहां पर बम्बू क्रेट, जो बांस के तीन मीटर लंबे, डेढ़ मीटर चौड़े और एक मीटर ऊंचे बनाने के निर्देश दिए हैं। इनमें पत्थर भरा जाता है। मलबा भरे जाने के सवाल पर कहते हैं कि हो सकता है, जल्दबाजी में ऐसा किया गया हो, लेकिन यह गलत है। वह खुद जाकर देखेंगे और मानक के अनुरूप बनवाएंगे। इसके बाद जब उनसे यह पूछा गया कि दस दिन में सिर्फ दो बम्बू क्रेट ही बन पाए हैं तो इसका जवाब वह टाल गए। कुल मिलाकर नदी के कटान के बचाव का कार्य बेहद धीमी गति से हो रहा है, जिससे कटान नहीं रुक सकता।
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ग्राम पंचायत रुद्रपुर के प्रधान रामभजन मौर्य कहते हैं कि कटाने रोकने की मंशा होती तो बाढ़ खंड के अभियंता पत्थरों की खेप यहां पहुंचाते और नियमानुसार बम्बू क्रेट में पत्थर भरकर कटान रोक सकते थे, लेकिन दस दिनों में सिर्फ दो क्रेट बनाई हैं, जिसमे कटान पीड़ितों के घरों का मलबा यानी मिट्टी और रोड़ा भरकर डाल दिया है। उन्होंने दो बार मजदूरों को रोका तो वह काम बंद कर बैठ गए। जेई आरबी प्रजापति को अवगत कराया तो वह बोले, जल्द ही पत्थर आ जाएंगे। प्रधान कहते हैं कि फिलहाल बाढ़ खंड की नीयत कटान रोकने की नहीं, बल्कि लाखों हजम करने की लग रही है।
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घाघरा में समाने के
कगार पर पहुंचा लालापुर स्कूल
बीईओ ने किया मौका मुआयना, भेजी रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
धौरहरा खीरी। रमियाबेहड़ ब्लाक के लालापुर मजरा सुजानपुर में कटान करती आ रही घाघरा नदी गांव के प्राथमिक स्कूल का अस्सी प्रतिशत हिस्सा नदी में समा चुका है। बीईओ रमियाबेहड़ सत्यप्रकाश नें रिपोर्ट बीएसए को भेजी है। लालापुर में निरंतर कटान करती चली आ रही घाघरा ने किसानों की जमीनें और झोपड़ियों को काटने के बाद गांव के स्कूल का कटान कर रही थी। घाघरा ने धीरे धीरे स्कूल का अस्सी प्रतिशत हिस्सा निगल लिया है। शेष बचा स्कूल किसी भी समय पूरा नदी में समा सकता है। बीईओ रमियाबेहड़ सत्यप्रकाश में मौका मुआयना कर रिपोर्ट बीएसए को भेजी है। यहां पंजीकृत बच्चों को पड़ोसी गांव के स्कूल माथुरपुर में पढने को कहा गया है। स्कूल में तैनात शिक्षकों को माथुरपुर स्कूल से संबंध कर दिया है। बीईओ ने बताया कि स्कूल पूरा किसी भी समय नदी में गिर सकता है। रिपोर्ट बीएसए को भेज दी है।
डीएम गंभीर, एसडीएम ने किया दौरा
धौरहरा। घाघरा शारदा नदियों के कटान से हो रही लोगों की परेशानियों पर डीएम आकाशदीप गंभीर हैं। उन्होंने खबरों को संज्ञान में लिया है। शुक्रवार को एसडीएम लवकुमार सिंह ने लालापुर, हुलासपुरवा और भुरजिनपुरवा गांवों का निरीक्षण कर सिंचाई विभाग के लोगों को बचाव कार्य में लगाया। एसडीएम लवकुमार सिंह नें बताया कि लालापुर और हुलासपुरवा में सिंचाई विभाग ने बांस की के्रट बनाकर कटान रोकने का प्रयास तेज कर दिया है।
शारदा में फिर आया उफान, हड़कंप
खतरे के निशान से 86 सेमी ऊपर चल रहा बहाव, कई गांव आए बाढ़ की चपेट में
पलियाकलां। लगातार जारी बारिश से शारदा नदी में एक बार फिर से उफान आ गया है। मौजूदा समय में नदी खतरे के निशान से 86 सेमी बह रही है और इससे कई गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। शारदा नदी का जलस्तर एक बार फिर से बढ़कर खतरे के निशान 153.620 सेमी से 86 सेमी ऊपर 154.480 सेमी पर पहुंच गया है। शारदा नदी का जलस्तर बढ़ने से पलिया क्षेत्र के आजादनगर, बर्बादनगर, मेलाघाट, श्रीनगर, खैराना, बोझवा, मटैहिया, दौलतापुर, कचनारा आदि गांव प्रभावित हुए हैं। जबकि संपूर्णानगर क्षेत्र के लगदहन, पतेड़ा, बाजपुर, त्रिकोलिया आदि गांवों में भी जलभराव हो गया है। इसके साथ ही मझगईं क्षेत्र के नयापुरवा, खालेपुरवा, चैरी आदि गांवों में भी शारदा नदी ने प्रवेश कर लिया है। नयापुरवा गांव में शारदा नदी का भूमि कटान तेज हो गया है। इससे ग्रामीणों में हड़कंप मच गया है। शारदा नदी की बाढ़ से दौलतापुर में भी शारदा ने जमीन काटनी शुरू कर दी है जिससे गन्ना सहित तमाम फसलें बाढ़ में डूब गई है। जिससे किसान खासे परेशान नजर आ रहे हैं।
बीते 24 घंटे में क्षेत्र में हुई
रिकार्ड 121.8 एमएम बरसात
इलाके में दो दिनों से हो रही बारिश से जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है। पिछले 24 घंटों में यहां 121.8 मिलीमीटर वर्षा रिकार्ड की गई, जो अब तक की सबसे ज्यादा बारिश है। नगर समेत ग्रामीण अंचल के निचले मोहल्लों में भीषण जलभराव हो गया और कई गलियों में पानी भर जाने से लोगों को आवागमन में दिक्कतों का समाना करना पड़ा।
केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक 24 घंटे में 121.8 एमएम वर्षा रिकार्ड की गई है। यह अभी तक की सबसे ज्यादा बारिश बताई गई है। क्षेत्र में दो दिनों से लगातार हो रही बरसात से शहर की स्टेशन रोड, मेला रोड, नगर पालिका रोड के साथ ही अन्य तमाम निचली सड़कों पर भारी जलभराव हो गया। इसके साथ ही शहर के निचले मोहल्लों व गलियों में पानी भरने से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। तहसील में भी भीषण जलभराव हो जाने से वादकारियों के साथ ही वकीलों को दिक्कतें हुईं। वकीलों के तख्त पानी में डूबे रहे तथा न्यायालय तक जाने वाले रास्ते पर भी पानी भरा होने से काफी परेशानियां उठाकर लोग निकलने के लिए विवश हुए। उधर बोझवा, बरेली फार्म में भी बारिश का पानी सड़कों और घरों में भर गया है।
कच्ची दीवार के मलबे में दबकर जख्मी महिला की मौत
अमीरनगर। ग्राम देवरिया के मजरा नौवाखेड़ा गांव के जमुनैया झाले में शनिवार की शाम बारिश के चलते एक मकान की कच्ची दीवार गिरने से जख्मी महिला 32 वर्षीया मनीषा देवी की शाहजहांपुर अस्पताल में मौत हो गई। मालूम हो कि 17 जुलाई की शाम गांव के अशोक कुमार के मकान की कच्ची दीवार लगातार बारिश के चलते गिर गई थी, उसके मलबे में दबकर अशोक कुमार (35) की मौके पर ही मौत हो गई थी जबकि पत्नी मनीषा (32) तथा पुत्र पवन (5) गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे। पत्नी मनीषा का इलाज शाहजहांपुर के अस्पताल में चल रहा था जहां शुक्रवार की रात उसने भी दम तोड़ दिया। पति- पत्नी की मौत से उसके चार छोटे छोटे बच्चे अनाथ हो गए हैं। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय भेज दिया है।
लगातार बारिश से दीवार गिरी
रजागंज। तहसील गोला क्षेत्र के गांव कपरहा में शुक्रवार की रात हुई रुक- रुक कर तेज बारिश से हरिओम अवस्थी के घर की दीवार ढह गई। दीवार पर पड़े छप्पर के नीचे सो रहा विकलांग हरिओम बाल- बाल बच गया। चीख पुकार सुनकर पड़ोस के लोग आ गये जिन्होंने छप्पर के नीचे फंसे विकलांग को बाहर निकाल लिया। घटना की सुचना पर सुबह पहुंचे ग्राम प्रधान नीरज शुक्ला ने दीवार गिरने की सूचना तहसील प्रशासन को दी है।