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गोला, लखीमपुर, नकहा और ईसानगर में उल्ल नदी से निकाली जाएगी सिल्ट
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शहर के निकलती उल्ल नदी।
सीडीओ ने दिए बीडीओ को कार्ययोजना बनाने के निर्देश
अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी एसडीएम को सौंपी
लखीमपुर खीरी। उल्ल नदी की बदहाल हालत की खबर प्रकाशित होने के बाद अब प्रशासन हरकत में आया है। नदी की दशा सुधारने के लिए सीडीओ अनिल कुमार सिंह ने चार ब्लॉकों गोला, लखीमपुर, नकहा और ईसानगर के बीडीओ को कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए हैं। इससे नदी की सिल्ट सफाई समेत अन्य कार्य कराए जाएंगे। नदी की जमीन पर अतिक्रमण को चिह्नित कर लेखपाल से नपाई कराकर कब्जा मुक्त कराया जाएगा, जिसके लिए संबंधित तहसीलों के एसडीएम को भी निर्देश दिए गए हैं।
उल्ल नदी पीलीभीत से निकलकर हरीपुर जंगल होते हुए लखीमपुर के किशनपुर सेंक्चुरी में प्रवेश करती है, फिर भीरा, मैलानी, गोला रेंज होते हुए फरधान पहुंचती है। फिर देवकली से होते हुए लखीमपुर-महेवागंज के बीच से निकलती है। इसके बाद सीतापुर जिले के रामपुर मथुरा पहुंचकर घाघरा नदी में समा जाती है। नदी की कुल लंबाई 95 किलोमीटर है। पिछले कुछ सालों से इस नदी में पानी की मात्रा कम होने से इस नदी के आसपास की जमीन पर लोगों ने अवैध कब्जे कर लिए हैं।
इसके अलावा नदी में गाद/ सिल्ट काफी जमा हो गई है और झाड़ी-झंखाड़ से नदी सिकुड़ती जा रही है। अमर उजाला अभियान के अंतर्गत उल्ल नदी की बदहाल दशा को खबरों के माध्यम से उकेरा गया, जिस पर सीडीओ अनिल कुुमार सिंह ने संज्ञान लेते हुए चार ब्लॉकों गोला, लखीमपुर, नकहा व ईसानगर के बीडीओ को कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए हैं। कार्ययोजना में सिल्ट सफाई, झाड़-झंखाड़ की सफाई, किनारों पर पौधारोपण और अतिक्रमण हटाने पर जोर दिया जाएगा।
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सीडीओ अनिल कुमार सिंह ने बताया कि कार्ययोजना बनाकर मनरेगा योजना से कच्चे कार्य कराए जाएंगे। पक्का कार्य अन्य योजनाओं से आवश्यकतानुसार कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि नदी के किनारों पर अतिक्रमण को हटाने के लिए संबंधित तहसीलों के एसडीएम को भी निर्देश दिए गए हैं कि लेखपाल से जमीन की नपाई कराकर कब्जा मुक्त कराया जाए।
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अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी एसडीएम को सौंपी
लखीमपुर खीरी। उल्ल नदी की बदहाल हालत की खबर प्रकाशित होने के बाद अब प्रशासन हरकत में आया है। नदी की दशा सुधारने के लिए सीडीओ अनिल कुमार सिंह ने चार ब्लॉकों गोला, लखीमपुर, नकहा और ईसानगर के बीडीओ को कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए हैं। इससे नदी की सिल्ट सफाई समेत अन्य कार्य कराए जाएंगे। नदी की जमीन पर अतिक्रमण को चिह्नित कर लेखपाल से नपाई कराकर कब्जा मुक्त कराया जाएगा, जिसके लिए संबंधित तहसीलों के एसडीएम को भी निर्देश दिए गए हैं।
उल्ल नदी पीलीभीत से निकलकर हरीपुर जंगल होते हुए लखीमपुर के किशनपुर सेंक्चुरी में प्रवेश करती है, फिर भीरा, मैलानी, गोला रेंज होते हुए फरधान पहुंचती है। फिर देवकली से होते हुए लखीमपुर-महेवागंज के बीच से निकलती है। इसके बाद सीतापुर जिले के रामपुर मथुरा पहुंचकर घाघरा नदी में समा जाती है। नदी की कुल लंबाई 95 किलोमीटर है। पिछले कुछ सालों से इस नदी में पानी की मात्रा कम होने से इस नदी के आसपास की जमीन पर लोगों ने अवैध कब्जे कर लिए हैं।
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इसके अलावा नदी में गाद/ सिल्ट काफी जमा हो गई है और झाड़ी-झंखाड़ से नदी सिकुड़ती जा रही है। अमर उजाला अभियान के अंतर्गत उल्ल नदी की बदहाल दशा को खबरों के माध्यम से उकेरा गया, जिस पर सीडीओ अनिल कुुमार सिंह ने संज्ञान लेते हुए चार ब्लॉकों गोला, लखीमपुर, नकहा व ईसानगर के बीडीओ को कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए हैं। कार्ययोजना में सिल्ट सफाई, झाड़-झंखाड़ की सफाई, किनारों पर पौधारोपण और अतिक्रमण हटाने पर जोर दिया जाएगा।
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सीडीओ अनिल कुमार सिंह ने बताया कि कार्ययोजना बनाकर मनरेगा योजना से कच्चे कार्य कराए जाएंगे। पक्का कार्य अन्य योजनाओं से आवश्यकतानुसार कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि नदी के किनारों पर अतिक्रमण को हटाने के लिए संबंधित तहसीलों के एसडीएम को भी निर्देश दिए गए हैं कि लेखपाल से जमीन की नपाई कराकर कब्जा मुक्त कराया जाए।