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Lakhimpur Kheri News: घर-आंगन में बह रही शारदा नदी, विस्थापित हो गए सैकड़ों परिवार

Thu, 20 Jul 2023 11:40 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 20 Jul 2023 11:40 PM IST
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Sharda river flowing in the courtyard, hundreds of families displaced
गाँव मे कटान करती नदी और मार्ग पर भरा बाढ़ का पानी
महेवागंज। फूलबेहड़ ब्लॉक में शारदा नदी ने ऐसी तबाही मचाई है कि हंसता, खेलता अहिराना गांव इतिहास बनने के कगार पर पहुंच गया है। बृहस्पतिवार को पांच और घर नदी में समा गए। गांव की 250 परिवारों की बस्ती में इक्का-दुक्का मकान ही शेष बचे हैं। कटान से पूरा गांव वीरान हो चुका है। बचे चंद घरों को तोड़ उनका मलबा उठाकर पीड़ित गांव से पलायन कर रहे हैं।
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सावन के महीने में यह गांव कभी आबाद रहता था। बच्चों के खिलखिलाने की आवाज, सावन के गीत और चहल पहल नजर आती थी, अब वहां सन्नाटा पसरा है। ग्रामीणों के घर-आंगन में जहां झूले बंधते थे, वहां अब नदी बह रही है। बृहस्पतिवार को गांव निवासी लक्ष्मी देवी, विद्यासागर, नंदा देवी, कविता देवी, रामदुलारी का घर कट गया।
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वहीं, प्रमोद, हरिनाम, राहुल, शंकर, लालवीर, शिवानंद, विजयपाल सहित एक दर्जन घर निशाने पर है। कटान करती नदी अब शंकरपुरवा, बाबापुरवा की ओर बढ़ रही है। शासन-प्रशासन ने पीड़ितों को उनके हाल पर छोड़ दिया है। न खाने का इंतजाम है और न रहने का ठौर। अधिकांश कटान पीड़ित दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
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उधर, बनबसा बैराज से छोड़े गए अतिरिक्त पानी से अब बाढ़ की स्थिति पैदा हो रही है। तटबंध में बाढ़ का पानी भरने लगा है। पानी बढ़ता देख तटबंध के अंदर बसे गांव के लोगों की चिंता बढ़ गई है। बाढ़ का पानी गूम अहिराना मार्ग पर पहुंचने लगा है। इससे ग्रामीणों को बाहर निकलने में मुश्किल हो रही है। बृहस्पतिवार को पुलिस, प्रशासन और एनडीआरएफ की संयुक्त टीम ने राहत-बचाव को लेकर फूलबेहड़़ में मॉकड्रिल तो की, लेकिन प्रशासन की तरफ से कोई मदद न मिलने से ग्रामीणों में मायूसी छाई है। कटान पीड़ितों का कहना है कि कुछ जमीन छोड़कर और कोई सहायता नही मिली। पीड़ित राशन, साफ पानी और लकड़ी को तरस रहे हैं।
भोजन न दवा, दावे हवाहवाई
गांव में चार कमरों का मकान तोड़ रहे बुजुर्ग शंकर ने फफकते हुए बताया कि 2018 में आवास मिला था। घर की सारी जमा पूंजी मिलाकर बच्चों के लिए घर बनाया था। सोचा था बुढ़ापा आराम से कट जायेगा, लेकिन इतनी जल्दी अपने ही हाथों से अपना घर तोड़ना पड़ जाएगा, यह कभी नहीं सोचा था।

घर का नहीं कलेजे का टुकड़ा गिर रहा नदी में
गांव निवासी रमेश की आंखें छलक आईं। बोला- नदी में आधा घर कट चुका है। घर का टुकड़ा नदी में गिरते देख आह निकल गई। काश इस गांव में कटान रोकने के लिए कोई कोशिश की गई होती, तो हम बेघर न होते।

बस किसी तरह हो रहा खाने का इंतजाम
सुनीता देवी ने बताया कि नदी में घर कट गया है। बच्चों के लिए किसी तरीके से खाने का इंतजाम किया जा रहा है। घर के आदमी सामान ले जाकर बंधे पर रख रहे है। पूरी रात चिंता में ही गुजर जाती है।



बसने को जमीन मिली पर खाने के लिए कर रहे मजदूरी
गांव निवासी जगदीश ने बताया कि धीरे-धीरे सामान मिलपुरवा में दूसरे की जगह में रख रहे है। प्रशासन ने बसने के लिए ढाई डिसमिल जगह दी है। खाने पीने का कोई इंतजाम नहीं है। मजदूरी कर किसी तरह खाना चल रहा है।

नदी में कट गया घर, नहीं मिला प्लॉट
गांव निवासी रामदुलारी ने बताया कि उनका घर नदी में कट गया है, फिर भी रहने के लिए प्लॉट नही मिला है। खाने-पीने का कोई सामान नहीं बचा है। आसपास के रिश्तेदार खाना बनवाकर दे देते हैं, तो उसी से जीवन चल रहा है। दिल करता है कि इसी नदी में डूबकर जान दे दें।

कुछ को जमीन बाकी अपने हाल पर
प्रशासन का दावा है कि मौलापुरवा में 53 कटान पीड़ितों को ढाई डिस्मिल जगह दी गई है। पीड़ितों का आरोप है कि कुछ लोगों के घर भी नहीं कटे हैं, फिर भी उन्हें रहने के लिए प्लॉट दिया गया है। जबकि दर्जनों परिवार ऐसे हैं, जिनका घर, जमीन सब नदी निगल चुकी है। वो आज भी सड़क पर दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। मित्र या रिश्तेदार के रहमोकरम पर तिरपाल डालकर रहने को मजबूर हैं। घरों का मलबा लिए इधर-उधर भटक रहे पीड़ितों के चेहरे पर मायूसी साफ झलक रही है। ग्राम प्रधान प्रीतम यादव ने बताया कि नदी ने सब उजाड़ दिया है। स्कूल और सैकड़ो घर नदी में बह गए। आधे लोगों को भी जमीन नहीं मिल पाई है। लोग सड़क और तटबंध पर गुजर बसर करने को विवश हैं।


बाढ़ पीड़ितों को बांटी राहत सामग्री
बिजुआ। ब्लॉक क्षेत्र में कटान की खबरें लगातार प्रकाशित होने पर प्रशासन ने रूरासुल्तानपुर, जम्हौरा, कोरियाना, चकपुरवा नयापुरवा, बेलहासिकटिहा में जाकर प्रभावित लोगों को लाइफ जैकेट, रस्सी, चप्पू और ट्यूब समेत मेडिकल और तिरपाल का वितरण किया। एसडीएम गोला रत्नाकर सिंह ने बताया कि गांवों के अंदर घुसा बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम हो रहा है। खतरा टला है, लेकिन जलस्तर से कम होने से कटान का खतरा फिर बढ़ गया है।

गाँव मे कटान करती नदी और मार्ग पर भरा बाढ़ का पानी

गाँव मे कटान करती नदी और मार्ग पर भरा बाढ़ का पानी

गाँव मे कटान करती नदी और मार्ग पर भरा बाढ़ का पानी

गाँव मे कटान करती नदी और मार्ग पर भरा बाढ़ का पानी

गाँव मे कटान करती नदी और मार्ग पर भरा बाढ़ का पानी

गाँव मे कटान करती नदी और मार्ग पर भरा बाढ़ का पानी

गाँव मे कटान करती नदी और मार्ग पर भरा बाढ़ का पानी

गाँव मे कटान करती नदी और मार्ग पर भरा बाढ़ का पानी

गाँव मे कटान करती नदी और मार्ग पर भरा बाढ़ का पानी

गाँव मे कटान करती नदी और मार्ग पर भरा बाढ़ का पानी

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