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शब-ए-बारात : पूरी रात की गई इबादत

Fri, 14 Feb 2025 10:48 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 14 Feb 2025 10:48 PM IST
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Shab-e-Barat: Whole night prayers
सजाया गया गुटय्याबाग स्थित कब्रिस्तान। संवाद
लखीमपुर खीरी। शब-ए-बारात का त्योहार बृहस्पतिवार की रात मनाया गया। इस मौके पर सुबह से ही लोग तैयारियों में जुट गए थे। जिले से लेकर शहर भर के कब्रिस्तानों को रंग बिरंगी बिजली की झालरों से सजाया गया।
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इसके अलावा लाइटों का इंतजाम भी किया गया। शब ए बारात के मौके पर बड़ी संख्या में लोग कब्रिस्तान में अपने पुरखों की कब्र पर जाकर उनकी मगफिरत की दुआ करते हैं।
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इस्लाम धर्म में यह त्योहार काफी अहमियत रखता है, जिसे इस्लामिक कैलेंडर शाबान (इस्लाम के आठवें महीने) की 15 तारीख को मनाया जाता है। बृहस्पतिवार को मगरिब की अजान के बाद लोगों का कब्रिस्तान जाने का सिलसिला शुरू हो गया। इसके अलावा लोगों ने गरीबों को खाना खिलाया और रातभर मस्जिदों व घरों में नमाज पढ़कर दुआएं मांगी।
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रोजा रखने का है महत्व
पेश इमाम मौलाना रईस नदवी ने बताया कि शब-ए-बारात की रात जागकर इबादत करते हैं और सुबह एक दिन रोजा रखने का भी महत्व है। उन्होंने बताया कि यह माह-ए-रमजान की तरह फर्ज रोजा ना होकर सुन्नत रोजा है। यानि लोग अपनी श्रद्धा अनुसार रोजा रख सकते हैं। पैगंबर मोहम्मद साहब ने यह रोजे रखे थे। इस दिन रोजा रखना कुरान में फर्ज या अनिवार्य नहीं माना गया है लेकिन शब-ए-बारात पर रोजा रखने से पिछले शब-ए-बारात तक के जाने-अनजाने में किए सभी गुनाहों को अल्लाह माफ कर देते हैं।



इस रात गुनाहों से करते हैं तौबा

शब ए बारात को मुसलमान रातभर जागकर अल्लाह की इबादत करते हैं, अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं और कुरान पढ़ते हैं। साथ ही अपने परिवार, रिश्तेदार, मुल्क और दुनिया की सलामती की दुआ भी करते हैं। इस्लाम धर्म में मान्यता है कि शब-ए-बारात की रात की गई हरेक जायज दुआ को अल्लाह कबूल करता है। अपने बंदों के गुनाहों को माफ करता है। इस मौके पर पूरी रात दुआओं का दौर चलता रहा, इसलिए इसे इबादत, फजीलत, रहमत और मगफिरत की रात कहा जाती है।

नमाज पढ़ी, दुआ मांगी


खीरी टाउन। सारी रात लोग मस्जिदों में नमाज पढ़ते दिखाई दिए। वहीं अपने पूर्वजों के कब्रों पर मोमबत्ती और अगरबत्ती जलाकर उनके लिए दुआएं मांगते रहे। धार्मिक जानकार गुफरान अहमद ने बताया कि प्रमुख रूप से इस्लाम में शब-ए-बारात के पर्व को काफी महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। इस दिन लोग मस्जिदों के साथ कब्रिस्तानों में भी इबादत के लिए जाते है। देर शाम कस्बे में स्थित शिया इमामबाड़ा में, सैय्यद मखदूम साहब, दरगाह छेदा मिया, आस्ताना हाशिमपीर साहब, जलाली पीर, पंचपीर, बड़े मखदूम साहब आदि की मज़ारों पर लोग दुआ मांगते नजर आए। संवाद

सजाया गया गुटय्याबाग स्थित कब्रिस्तान। संवाद

सजाया गया गुटय्याबाग स्थित कब्रिस्तान। संवाद

सजाया गया गुटय्याबाग स्थित कब्रिस्तान। संवाद

सजाया गया गुटय्याबाग स्थित कब्रिस्तान। संवाद

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