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दुधवा में सांभरों पर संकट, बढ़ रहा बाघों व हिरनों का कुनबा
अशोक निगम लखीमपुर खीरी।
Updated Mon, 06 Mar 2017 11:07 PM IST
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हिरन
- फोटो : अमर उजाला
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- बाघों की संख्या में 38 फीसदी की बढ़ोतरी, सांभरों को नहीं मिल रहा अनुकूल वातावरण
- दुधवा दुनिया का अकेला ऐसा नेशनल पार्क जहां हिरनों की पांच प्रजातियां बहुतायत मिलती हैं
दुधवा के जंगल में हिरनों का कुनबा साल दर साल बढ़ रहा है। तीन साल पर होने वाली गणना में इनकी सभी प्रजातियों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। यही नहीं बाघों की संख्या में भी करीब 38 फीसदी की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। हालांकि सांभरों पर संकट हैं, जिनकी संख्या कम हुई है।
उल्लेखनीय है कि दुधवा नेशनल पार्क दुनिया का एक मात्र ऐसा नेशनल पार्क है जहां हिरनों की पांच प्रजातियां एक साथ बड़ी संख्या में मिलती हैं। इनमें चीतल, पाढ़ा, बारहसिंघा, सांभर और काकड़ की प्रजातियां प्रमुख हैं। बारहसिंघा की सर्वाधिक आबादी यहीं पाई जाती है। काला हिरन और चौसिंघा भी यहीं मिलते हैं, हालांकि इनकी संख्या कम है। हिरनों की संख्या बढ़ने के पीछे यहां के अनुकूल वातावरण को माना जा रहा है। सांभर प्रजाति यहां पर संकट में है। तीस वर्षों में उनकी संख्या काफी कम हो गई है। पार्क के उपनिदेशक कौजलगि का कहना है कि सांभर ऊंचे और सूखे इलाकों में रहना ज्यादा पसंद करते हैं। इसलिए उन्हें यहां अनुकूल वातावरण नहीं मिल पा रहा है। यहां आने वाली बाढ़ उनके लिए मुश्किल पैदा कर रही है। राज्य वन्यजीव सलाहकार परिषद के पूर्व सदस्य और वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. वीपी सिंह का भी कहना है कि दुधवा नेशनल पार्क में नेपाल की नदियों से हर साल आने वाली बाढ़ के कारण घास के मैदान नष्ट हो रहे हैं।
दुधवा नेशनल पार्क के उपनिदेशक महावीर कौजलगि ने बताया कि पार्क में हिरनों की संख्या के अलावा दूसरे वन्यजीवों की संख्या में भी लगातार इजाफा हो रहा है। साल 1985 में जंगली सुअरों की संख्या 5000 थी जो 2013 में बढ़कर 8000 हो गई है। वर्ष 1985 में दुधवा टाइगर रिजर्व में बाघों की आबादी 80 थी जो अब बढ़कर 117 से ऊपर पहुंच गई है। वन्यजीव विशेषज्ञों की मानें तो हिरनों की संख्या बढ़ने के साथ बाघों की तादाद में हो रहा इजाफा इस बात का संकेत है कि बाघों की खाद्य श्रंखला दुधवा में महफूज है।
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राजाजी पार्क में बाघ दोगुना, नए क्षेत्रों में किया कब्जा
देहरादून। राजाजी नेशनल पार्क टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या तकरीबन दोगुना हो गई है। यह बात राजाजी पार्क प्रशासन को भी पता नहीं थी लेकिन पश्चिमी हिस्से में लगे जब कैमरा ट्रैप की तस्वीरों को देखा गया तो सभी चौंक गए। बाघों के परिवारों ने उन क्षेत्रों पर भी अपना कब्जा कर लिया है जहां अभी तक बाघों का कॉरीडोर नहीं माना जाता था। इसके बाद राजाजी पार्क प्रशासन ने आननफानन में वहां की सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। बाघों के बढ़ने से यहां आने वाले सैलानियों की संख्या में भी इजाफा होगा।
बाघों की संख्या बढ़ने से राज्य सरकार की राजाजी पार्क में टाइगर सफारी की परियोजना को बल मिलेगा। यहां बाघ देखने आने वाले दर्शकों की संख्या में इजाफा हो जाएगा। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के निर्देश पर राजाजी पार्क, जिम कार्बेट नेशनल पार्क टाइगर रिजर्व तथा प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में कैमरा ट्रैप लगाकर बाघों की नए सिरे से गणना की जा रही है। पहले चरण में राजाजी पार्क के हरिद्वार और पौड़ी जिले के पूर्बी हिस्से-गौरी रेंज, चीला रेंज आदि में भारतीय वन्य जीव संस्थान ने तीन सौ कैमरा ट्रैप लगाए थे। कै मरा ट्रैप उतारे जाने के बाद तस्वीरों में नए बाघ नजर आए हैं। कई स्थानों पर बाघिनें अपने दो-तीन बच्चों के साथ आराम करती देखी गईं। ये वे स्थान हैं, जहां बाघ की उपस्थिति नहीं मानी जाती, इससे लोग यहां बेझिझक आवागमन करते हैं। कैमरा ट्रैप में पुष्टि होते ही पार्क प्रशासन ने वहां सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है ताकि कोई अंजाने में बाघ का शिकार न हो, इसके साथ ही वहां गश्त तेज कर दी गई है।
बाघों की संख्या बढ़ने की जानकारी पार्क प्रशासन अभी गुप्त रखे हुए है। पूर्वी हिस्से के अध्ययन के बाद अब पार्क के पश्चिमी क्षेत्र में तीन सौ कैमरा ट्रैप लगाए जा रहे हैं। यह क्षेत्र देहरादून और सहारनपुर (यूपी) में आता है। इसका अध्ययन पूरा होने के बाद पार्क प्रशासन अप्रैल-मई बाघों की संख्या घोषित करेगा। अभी तक यह माना जाता रहा कि राजाजी पार्क में अधिकतम 20 बाघ हैं, लेकिन यहां संख्या कहीं अधिक है। पार्क निदेशक सनातन का कहना है कि अब पश्चिमी क्षेत्र में कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं। कैमरा ट्रैप का अध्ययन किया जा रहा है। सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है।
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- दुधवा दुनिया का अकेला ऐसा नेशनल पार्क जहां हिरनों की पांच प्रजातियां बहुतायत मिलती हैं
दुधवा के जंगल में हिरनों का कुनबा साल दर साल बढ़ रहा है। तीन साल पर होने वाली गणना में इनकी सभी प्रजातियों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। यही नहीं बाघों की संख्या में भी करीब 38 फीसदी की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। हालांकि सांभरों पर संकट हैं, जिनकी संख्या कम हुई है।
उल्लेखनीय है कि दुधवा नेशनल पार्क दुनिया का एक मात्र ऐसा नेशनल पार्क है जहां हिरनों की पांच प्रजातियां एक साथ बड़ी संख्या में मिलती हैं। इनमें चीतल, पाढ़ा, बारहसिंघा, सांभर और काकड़ की प्रजातियां प्रमुख हैं। बारहसिंघा की सर्वाधिक आबादी यहीं पाई जाती है। काला हिरन और चौसिंघा भी यहीं मिलते हैं, हालांकि इनकी संख्या कम है। हिरनों की संख्या बढ़ने के पीछे यहां के अनुकूल वातावरण को माना जा रहा है। सांभर प्रजाति यहां पर संकट में है। तीस वर्षों में उनकी संख्या काफी कम हो गई है। पार्क के उपनिदेशक कौजलगि का कहना है कि सांभर ऊंचे और सूखे इलाकों में रहना ज्यादा पसंद करते हैं। इसलिए उन्हें यहां अनुकूल वातावरण नहीं मिल पा रहा है। यहां आने वाली बाढ़ उनके लिए मुश्किल पैदा कर रही है। राज्य वन्यजीव सलाहकार परिषद के पूर्व सदस्य और वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. वीपी सिंह का भी कहना है कि दुधवा नेशनल पार्क में नेपाल की नदियों से हर साल आने वाली बाढ़ के कारण घास के मैदान नष्ट हो रहे हैं।
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दुधवा नेशनल पार्क के उपनिदेशक महावीर कौजलगि ने बताया कि पार्क में हिरनों की संख्या के अलावा दूसरे वन्यजीवों की संख्या में भी लगातार इजाफा हो रहा है। साल 1985 में जंगली सुअरों की संख्या 5000 थी जो 2013 में बढ़कर 8000 हो गई है। वर्ष 1985 में दुधवा टाइगर रिजर्व में बाघों की आबादी 80 थी जो अब बढ़कर 117 से ऊपर पहुंच गई है। वन्यजीव विशेषज्ञों की मानें तो हिरनों की संख्या बढ़ने के साथ बाघों की तादाद में हो रहा इजाफा इस बात का संकेत है कि बाघों की खाद्य श्रंखला दुधवा में महफूज है।
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राजाजी पार्क में बाघ दोगुना, नए क्षेत्रों में किया कब्जा
देहरादून। राजाजी नेशनल पार्क टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या तकरीबन दोगुना हो गई है। यह बात राजाजी पार्क प्रशासन को भी पता नहीं थी लेकिन पश्चिमी हिस्से में लगे जब कैमरा ट्रैप की तस्वीरों को देखा गया तो सभी चौंक गए। बाघों के परिवारों ने उन क्षेत्रों पर भी अपना कब्जा कर लिया है जहां अभी तक बाघों का कॉरीडोर नहीं माना जाता था। इसके बाद राजाजी पार्क प्रशासन ने आननफानन में वहां की सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। बाघों के बढ़ने से यहां आने वाले सैलानियों की संख्या में भी इजाफा होगा।
बाघों की संख्या बढ़ने से राज्य सरकार की राजाजी पार्क में टाइगर सफारी की परियोजना को बल मिलेगा। यहां बाघ देखने आने वाले दर्शकों की संख्या में इजाफा हो जाएगा। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के निर्देश पर राजाजी पार्क, जिम कार्बेट नेशनल पार्क टाइगर रिजर्व तथा प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में कैमरा ट्रैप लगाकर बाघों की नए सिरे से गणना की जा रही है। पहले चरण में राजाजी पार्क के हरिद्वार और पौड़ी जिले के पूर्बी हिस्से-गौरी रेंज, चीला रेंज आदि में भारतीय वन्य जीव संस्थान ने तीन सौ कैमरा ट्रैप लगाए थे। कै मरा ट्रैप उतारे जाने के बाद तस्वीरों में नए बाघ नजर आए हैं। कई स्थानों पर बाघिनें अपने दो-तीन बच्चों के साथ आराम करती देखी गईं। ये वे स्थान हैं, जहां बाघ की उपस्थिति नहीं मानी जाती, इससे लोग यहां बेझिझक आवागमन करते हैं। कैमरा ट्रैप में पुष्टि होते ही पार्क प्रशासन ने वहां सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है ताकि कोई अंजाने में बाघ का शिकार न हो, इसके साथ ही वहां गश्त तेज कर दी गई है।
बाघों की संख्या बढ़ने की जानकारी पार्क प्रशासन अभी गुप्त रखे हुए है। पूर्वी हिस्से के अध्ययन के बाद अब पार्क के पश्चिमी क्षेत्र में तीन सौ कैमरा ट्रैप लगाए जा रहे हैं। यह क्षेत्र देहरादून और सहारनपुर (यूपी) में आता है। इसका अध्ययन पूरा होने के बाद पार्क प्रशासन अप्रैल-मई बाघों की संख्या घोषित करेगा। अभी तक यह माना जाता रहा कि राजाजी पार्क में अधिकतम 20 बाघ हैं, लेकिन यहां संख्या कहीं अधिक है। पार्क निदेशक सनातन का कहना है कि अब पश्चिमी क्षेत्र में कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं। कैमरा ट्रैप का अध्ययन किया जा रहा है। सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है।