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Lakhimpur Kheri News: सड़क किनारे खतरा खुला, प्रशासन की आंखें बंद

Wed, 26 Aug 2026 11:44 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Updated Wed, 26 Aug 2026 11:44 PM IST
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Roadside danger exposed, administration closes its eyes
शहर से निकली नहर पटरी पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं। संवाद
लखीमपुर खीरी। निघासन क्षेत्र में मंगलवार को सड़क किनारे पानी से भरी गहरी खाई में कार गिरने के हादसे के बाद जिले की सड़कों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। हादसे में किसी की जान नहीं गई, लेकिन बुधवार को विभिन्न क्षेत्रों में हुई पड़ताल में सड़क किनारे सुरक्षा इंतजामों की कमी सामने आई।
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अधिकांश जगहों पर सड़कों के किनारे गहरी खाइयां और पानी से भरे गड्ढे मिले। इन खतरनाक स्थानों पर वाहन चालकों को सतर्क करने के लिए न चेतावनी बोर्ड मिले और न पर्याप्त संकेतक। कई जगह रेलिंग, बैरिकेडिंग, रस्सी या रेडियम पट्टी जैसी सामान्य सुरक्षा व्यवस्था भी नहीं मिली।
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लखीमपुर शहर के बीच से निकली नहर पटरी भी जानलेवा बनी हुई है। यह पटरी करीब पांच से छह फीट गहरी है और इसमें हमेशा पानी भरा रहता है। इसके बावजूद यहां कोई सुरक्षा इंतजाम नहीं है। लालपुर स्टेडियम के आगे गोला की ओर सड़क के दोनों ओर गहरी खाई और कई जगह तालाब हैं। यहां भी संकेतक और सुरक्षा इंतजाम नहीं हैं। लखीमपुर-मैगलगंज मार्ग पर लीलाकुआ, कालाआम, औरंगाबाद और मितौली के पास भी कई जगह सड़क किनारे खाइयां हैं।
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निघासन-रकेहटी के बीच सुक्खनपुरवा मोड़ के पास पिछले वर्ष खाई में ऑटो पलटने से एक बुजुर्ग की मौत हो गई थी। लकड़ी से भरा ट्रैक्टर-ट्राला पलटने से एक मजदूर की भी मौत हुई थी। इन घटनाओं के बाद भी यहां सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए। रकेहटी-बोझिया मार्ग के दोनों ओर 10-10 फुट गहरी खाई है। रात में यहां हादसे का खतरा बना रहता है।
पिछले दिनों त्रिकौलिया निवासी सेल्समैन पेट्रोल पंप के पास खाई में गिरकर पानी में डूब गया था। निघासन-रकेहटी के बीच जिंदबाबा के पास करीब 15 फुट गहरा और 50×80 फुट क्षेत्रफल का तालाब है। यहां भी सुरक्षा, संकेतक और रेलिंग नहीं है। करीब छह-सात साल पहले इस तालाब में एक अल्टो कार गिरी थी। उस समय तालाब में पानी नहीं था।
पलिया से बिजुआ तक सड़क किनारे चार से पांच फुट गहरे गड्ढे हैं, लेकिन संकेतक नहीं हैं। शारदा पुल पार पलिया-भीरा रोड के अंधे मोड़ पर संकेत बोर्ड न होने से आए दिन हादसे होते हैं। धौरहरा क्षेत्र में भी सड़क किनारे कई जगह तालाब और खाइयां हैं, लेकिन संकेतक नहीं हैं।
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डीएम के निर्देश पर एडीएम ने तय की जवाबदेही
कांवड़ यात्रा से पहले डीएम अंजनी कुमार सिंह ने कलक्ट्रेट सभागार में सड़क सुरक्षा की बैठक में लोक निर्माण विभाग के अफसरों को अंधे मोड़ पर संकेतक और सुरक्षा इंतजाम करने के निर्देश दिए थे। क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत कराने को भी कहा था। इसके बावजूद अब तक कई स्थानों पर सुरक्षा इंतजाम नहीं हुए हैं।
एडीएम नरेंद्र बहादुर सिंह ने कहा कि अंधे मोड़ सहित अन्य हादसों वाले स्थानों पर संकेतक और सुरक्षा इंतजाम करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। बावजूद इसके अगर इंतजाम नहीं लगे हैं तो संबंधित विभाग की जवाबदेही तय की जाएगी।

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मढ़िया घाट पुल की सड़क भी धंसने लगी

मैगलगंज। मढ़िया घाट पुल की सड़क निर्माण के कुछ ही महीनों बाद धंसने लगी है। सड़क में जगह-जगह गहरे गड्ढे और दरारें होने से हादसे का खतरा बना हुआ है। हरदोई और लखीमपुर खीरी जिलों को जोड़ने वाले इस मार्ग से रोजाना बड़ी संख्या में लोगों का आवागमन होता है। संवाद

शहर से निकली नहर पटरी पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं। संवाद

शहर से निकली नहर पटरी पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं। संवाद

शहर से निकली नहर पटरी पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं। संवाद

शहर से निकली नहर पटरी पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं। संवाद

शहर से निकली नहर पटरी पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं। संवाद

शहर से निकली नहर पटरी पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं। संवाद

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