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प्राकृतिक संपदा से भरपूर जिले में प्रदूषण का जहर

Sun, 05 Jun 2016 12:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/लखीमपुर खीरी।
अमर उजाला ब्यूरो/लखीमपुर खीरी। Updated Sun, 05 Jun 2016 12:20 AM IST
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Rich in natural resources in the area of pollution poisoning
प्रदूषण - फोटो : अमर उजाला
जिले का 22 फीसदी भूभाग सघन जंगलों से आच्छादित
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जल, वायु, ध्वनि प्रदूषण से जहरीला हो रहा वातावरण

पर्यावरण के लिहाज से खीरी जिले के लोग बेहद खुशकिस्मत हैं। 7680 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैले खीरी जिले का 1735 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र हरे भरे जंगलों से आच्छादित है। जंगलों में स्वच्छंद विचरण करने वाले वन्यजीव, विभिन्न प्रजातियों के रंग बिरंगे पक्षी और नदियों में मिलने वाले जलीय जीव जिले की जैव विविधता को समृद्ध बनाते हैं। हिमालय की तलहटी में बसे इस जिले में अब आबादी के बढ़ते दबाव के  कारण प्रदूषण का खतरा बढ़ता जा रहा है। 
अपनी प्राकृतिक धरोहर के प्रति जागरूकता की कमी और  विलासिता पूर्ण जीवन की ललक के चलते लोग जिले की जलवायु में जहर घोल रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में तो गनीमत है लेकिन शहरी क्षेत्र में हालत दिन पर दिन खराब होते जा रहे हैं। जनरेटरों और गाड़ियों के धुएं से वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। नदियों के पेट में कूड़ा, गंदा पानी और औद्योगिक कचरा पड़ने से पानी विषैला हो रहा है। शहरों में जनरेटरों के शोर के अलावा प्रचार वाहनों के शोर से होने वाले ध्वनि प्रदूषण से लोग बहरे हो रहे हैं। 
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पॉलिथीन से बंजर हो रही धरती
पॉलिथीन के इस्तेमाल से जिले की धरती बंजर हो रही है। जिले में पॉलिथीन पर प्रतिबंध लगने के बाद भी इसका प्रयोग धड़ल्ले से हो रहा है। पॉलिथीन भूमि के अंदर जाकर जमीन को बंजर बना रही है तो नालियों में जाकर पानी के निकास को रोक रही है। खाने पीने की चीजें पॉलिथीन में लाने के बाद फेंकने से अक्सर जानवर इसे खा जाते हैं। इससे आवारा घूमने वाले कई जानवरों की मौत हो चुकी है। 
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जहरीले धुएं से बीमार हो रहे लोग
वाहनों की बढ़ती संख्या, और इनसे निकलने वाले धुएं के अलावा शहर में हजारों की संख्या में चलने वाले जनरेटरों का धुआं वायुमंडल को जहरीला बना रहा है। शहर में कई जगह तो एक साथ कई-कई जनरेटर रखे हैं। बिजली जाने पर जब यह जनरेटर चलते हैं तो धुएं के कारण लोगों को सांस तक लेना मुश्किल हो जाता है। वायु प्रदूषण के चलते यहां लोग श्वांस रोगी होते जा रहे हैं। 
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पर्यावरण सुरक्षा के प्रति जागरूकता की कमी
पर्यावरण सुरक्षा के प्रति लोगों में जागरूकता की कमी है। प्रदूषण के कुप्रभावों का दंश झेलने के बावजूद लोग न तो हरियाली बचाने का प्रयास कर रहे हैं न ही वायुमंडल में प्रदूषण फैलाने से कोई गुरेज कर रहे हैं। डॉ. अनिल त्रिपाठी कहते है पर्यावरण सुरक्षा को जब तक लोग सामाजिक दायित्व के रूप में नहीं लेंगे तब तक स्थिति में सुधार आने की कल्पना नहीं की जा सकती। 

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शहरों में बढ़ते प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण लोगों में बढ़ती विलासितापूर्ण जीवन की ललक है। एसी, फ्रिज से निकलने वाली गैसें ओजोन की पर्त को नुकसान पहुंचा रही हैं। ओजोन रूपी सुरक्षा कवच के क्षतिग्रस्त होने से गर्मी बढ़ रही है। मौसम अनियमित हो रहे हैं। 
-डॉ. वीपी सिंह, पर्यावरणविद्
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