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बाढ़ राहत के लिए समय पूर्व तैयारियों की समीक्षा
लखीमपुर खीरी
Updated Thu, 12 Mar 2015 06:05 PM IST
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बारिश के सीजन में आने वाली बाढ़ की तबाही से निपटने की तैयारियों को लेकर डीएम किंजल सिंह ने संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की, जिसमें उन्होंने कटान वाले स्थानों को चिह्नित कर मरम्मत कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा है कि पीड़ित व्यक्ति को तुरंत राहत की जरूरत होती है। इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कलक्ट्रेट सभागार में डीएम की अध्यक्षता में बैठक हुई, जिसमें एडीएम हरिकेश चौरसिया ने बताया कि नेपाल से पानी छोड़े जाने पर जनपद में बाढ़ की स्थिति पैदा हो जाती है। इस पर डीएम ने तहसीलवार बाढ़ की स्थिति की समीक्षा की, जिसमें बाढ़ से अधिक प्रभावित होने वाली तहसीलों के बारे में जानकारी हासिल की। बाढ़ से बचाव कार्यों के लिए अधिशाषी अभियंताओं को मिले बजट की गहनता से समीक्षा की। डीएम ने सभी एसडीएम और समस्त अभियंताओं को बाढ़ से संबंधित कार्य का संयुक्त निरीक्षण करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने एक सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा। बाढ़ चौकियों एवं राहत शिविरों को दुरुस्त करने, वहां पर सोलर लाइट और मार्गों को ठीक करने के निर्देश भी दिए। नावों को ठीक कराने, स्टीमर आदि की व्यवस्था कराने के निर्देश दिए। नई नावों, पॉलीथिन और बाढ़ राहत से संबंधित अन्य सामान की व्यवस्था के बारे में जानकारी ली। इसके अलावा उन्होंने गोताखोरों की ट्रेनिंग और संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए। वहीं डीपीआरओ योगेंद्र कटियार को निर्देशित किया गया कि महिलाओं के शौचालय की अलग से व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। पशुओं के टीकाकरण एवं उनके चारे की व्यवस्था करने के निर्देश पशु पालन विभाग को दिए गए। प्राथमिक उपचार की दवाएं, पेट दर्द, चर्म रोग, बुखार आदि की व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के लिए सीएमओं को निर्देश दिए गए। उन्होंने फायर सीजन के मद्देनजर आग बुझाने वाली मशीनों को ऐसी जगह रखने के निर्देश दिए कि आग लगने पर कम समय में निश्चित स्थान पर पहुंच सकें। नगर पालिकाओं को पानी और हाईड्रेंट की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। इस मौके पर सभी एसडीएम, सिंचाई, बाढ़ खंड, स्वास्थ्य विभाग, राजस्व विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
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कलक्ट्रेट सभागार में डीएम की अध्यक्षता में बैठक हुई, जिसमें एडीएम हरिकेश चौरसिया ने बताया कि नेपाल से पानी छोड़े जाने पर जनपद में बाढ़ की स्थिति पैदा हो जाती है। इस पर डीएम ने तहसीलवार बाढ़ की स्थिति की समीक्षा की, जिसमें बाढ़ से अधिक प्रभावित होने वाली तहसीलों के बारे में जानकारी हासिल की। बाढ़ से बचाव कार्यों के लिए अधिशाषी अभियंताओं को मिले बजट की गहनता से समीक्षा की। डीएम ने सभी एसडीएम और समस्त अभियंताओं को बाढ़ से संबंधित कार्य का संयुक्त निरीक्षण करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने एक सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा। बाढ़ चौकियों एवं राहत शिविरों को दुरुस्त करने, वहां पर सोलर लाइट और मार्गों को ठीक करने के निर्देश भी दिए। नावों को ठीक कराने, स्टीमर आदि की व्यवस्था कराने के निर्देश दिए। नई नावों, पॉलीथिन और बाढ़ राहत से संबंधित अन्य सामान की व्यवस्था के बारे में जानकारी ली। इसके अलावा उन्होंने गोताखोरों की ट्रेनिंग और संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए। वहीं डीपीआरओ योगेंद्र कटियार को निर्देशित किया गया कि महिलाओं के शौचालय की अलग से व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। पशुओं के टीकाकरण एवं उनके चारे की व्यवस्था करने के निर्देश पशु पालन विभाग को दिए गए। प्राथमिक उपचार की दवाएं, पेट दर्द, चर्म रोग, बुखार आदि की व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के लिए सीएमओं को निर्देश दिए गए। उन्होंने फायर सीजन के मद्देनजर आग बुझाने वाली मशीनों को ऐसी जगह रखने के निर्देश दिए कि आग लगने पर कम समय में निश्चित स्थान पर पहुंच सकें। नगर पालिकाओं को पानी और हाईड्रेंट की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। इस मौके पर सभी एसडीएम, सिंचाई, बाढ़ खंड, स्वास्थ्य विभाग, राजस्व विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
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