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Lakhimpur Kheri News: लेटलतीफी में फंसी रीवैंप योजना, जनवरी का वादा... काम अभी आधा
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लखीमपुर खीरी। बिजली संबंधी व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के लिए चलाई जा रही रीवैंप योजना का काम डेढ़ साल में महज 55 प्रतिशत ही पूरा हो पाया है।
जबकि, जनवरी 2025 काम पूरा होने की डेडलाइन है। ऐसे में तय समय में काम पूरा होता नहीं दिख रहा। इसे देखते हुए बिजली निगम ने जिम्मेदारों को नोटिस जारी कर काम में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।
लखीमपुर सर्किल में रीवैंप योजना का काम कराने के लिए फरवरी 2023 में स्वीकृति मिली थी। 88.50 करोड़ रुपये भी जारी हो गए थे। जुलाई में कंपनी ने काम शुरू कर दिया था। रीवैंप का काम शुरू हुए करीब डेढ़ साल हो गया है, लेकिन अभी तक 45 प्रतिशत काम अधूरा है। योजना के तहत 21 हजार बिजली के खंभे लगाए जाने हैं, जिसमें अब तक 18 हजार लगाए जा चुके हैं।
नए केबल डाले जा रहे हैं। 900 किलोमीटर सर्किल में तार बिछाने के लक्ष्य में अब तक 570 किलोमीटर में ही काम पूरा हो सका है। जहां लोड अधिक है, ऐसी 12 जगह चिह्नित कर लोड कम करने के लिए नए फीडर बनाने का काम अभी चल रहा है। मितौली में सात, लखीमपुर में चार और निघासन में एक फीडर है। कृषि पोषण लाइन को अलग करने का काम किया जा रहा है।
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अफसरों ने बताया कि जिन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा बिजली चोरी होती थी, वहां पर आर्मर्ड केबल डाले जा रहे हैं। लक्ष्य करीब दो किलोमीटर सर्किल है, जिसमें अब तक मात्र 200 मीटर काम हो पाया है।
लखीमपुर सर्किल में 11 हजार जर्जर लाइन को बदला जा रहा है। करीब 900 किलो मीटर सर्किल में अब तक 578 किलो मीटर काम पूरा हो चुका है। 35 हजार जर्जर लाइन बदलने के लिए 12 किलो मीटर सर्किल का लक्ष्य है, जो अधिकांश काम हो चुका है।
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जबकि, जनवरी 2025 काम पूरा होने की डेडलाइन है। ऐसे में तय समय में काम पूरा होता नहीं दिख रहा। इसे देखते हुए बिजली निगम ने जिम्मेदारों को नोटिस जारी कर काम में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।
लखीमपुर सर्किल में रीवैंप योजना का काम कराने के लिए फरवरी 2023 में स्वीकृति मिली थी। 88.50 करोड़ रुपये भी जारी हो गए थे। जुलाई में कंपनी ने काम शुरू कर दिया था। रीवैंप का काम शुरू हुए करीब डेढ़ साल हो गया है, लेकिन अभी तक 45 प्रतिशत काम अधूरा है। योजना के तहत 21 हजार बिजली के खंभे लगाए जाने हैं, जिसमें अब तक 18 हजार लगाए जा चुके हैं।
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नए केबल डाले जा रहे हैं। 900 किलोमीटर सर्किल में तार बिछाने के लक्ष्य में अब तक 570 किलोमीटर में ही काम पूरा हो सका है। जहां लोड अधिक है, ऐसी 12 जगह चिह्नित कर लोड कम करने के लिए नए फीडर बनाने का काम अभी चल रहा है। मितौली में सात, लखीमपुर में चार और निघासन में एक फीडर है। कृषि पोषण लाइन को अलग करने का काम किया जा रहा है।
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अफसरों ने बताया कि जिन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा बिजली चोरी होती थी, वहां पर आर्मर्ड केबल डाले जा रहे हैं। लक्ष्य करीब दो किलोमीटर सर्किल है, जिसमें अब तक मात्र 200 मीटर काम हो पाया है।
लखीमपुर सर्किल में 11 हजार जर्जर लाइन को बदला जा रहा है। करीब 900 किलो मीटर सर्किल में अब तक 578 किलो मीटर काम पूरा हो चुका है। 35 हजार जर्जर लाइन बदलने के लिए 12 किलो मीटर सर्किल का लक्ष्य है, जो अधिकांश काम हो चुका है।