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Lakhimpur Kheri News: देवहरिया उद्यान में पहली बार दिखा दुर्लभ ग्रेट स्लेटी कठफोड़वा
Mon, 02 Feb 2026 11:08 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Mon, 02 Feb 2026 11:08 PM IST
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धनगढ़ी में दिखाई दिया दुर्लभ पक्षी ग्रेट स्लेटी कठफोड़वा। स्रोत : सोशल मीडिया
धनगढ़ी (नेपाल)। धनगढ़ी उप-महानगरपालिका के अंतर्गत देवहरिया उद्यान क्षेत्र में पहली बार विश्व की दुर्लभ प्रजाति ग्रेट स्लेटी कठफोड़वा का एक जोड़ा देखा गया है। रिहायशी इलाके के पास जोखर ताल के समीप एक ऊंचे वृक्ष पर इस दुर्लभ जोड़े के दिखाई देने से क्षेत्र के पक्षी प्रेमियों और पर्यावरणविदों में उत्साह है।
पक्षी विशेषज्ञ हीरालाल डंगौरा ने बताया कि ग्रेट स्लेटी कठफोड़वा को अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ ने अपनी संवेदनशील सूची में रखा है। उन्होंने बताया कि यह पक्षी अक्सर साल के ऊंचे वृक्षों पर ही अपना बसेरा बनाते हैं। देवहरिया क्षेत्र में साल के पुराने पेड़ों की मौजूदगी के कारण ही यह जोड़ा यहां पहुंचा है। कैलाली जिले में इस दुर्लभ पक्षी का इतिहास रहा है।
सबसे पहले वर्ष 2014 में घोड़ा-घोड़ी ताल में इसके होने की पुष्टि हुई थी। इसके बाद जिले के पटेला और बेली गांवों में भी इन्हें देखा गया। हालांकि, धनगढ़ी के इस शहरी उद्यान क्षेत्र में इनका दिखना एक बड़ी और सुखद घटना मानी जा रही है।
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विशेषज्ञों के अनुसार, यह पक्षी नेपाल के अलावा भारत के दुधवा नेशनल पार्क, जिम कॉर्बेट (उत्तराखंड), भूटान, बांग्लादेश, म्यांमार और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों जैसे थाईलैंड, मलेशिया और फिलीपींस में पाया जाता है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि इस दुर्लभ पक्षी की मौजूदगी से क्षेत्र में जैव-विविधता के संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
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पक्षी विशेषज्ञ हीरालाल डंगौरा ने बताया कि ग्रेट स्लेटी कठफोड़वा को अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ ने अपनी संवेदनशील सूची में रखा है। उन्होंने बताया कि यह पक्षी अक्सर साल के ऊंचे वृक्षों पर ही अपना बसेरा बनाते हैं। देवहरिया क्षेत्र में साल के पुराने पेड़ों की मौजूदगी के कारण ही यह जोड़ा यहां पहुंचा है। कैलाली जिले में इस दुर्लभ पक्षी का इतिहास रहा है।
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सबसे पहले वर्ष 2014 में घोड़ा-घोड़ी ताल में इसके होने की पुष्टि हुई थी। इसके बाद जिले के पटेला और बेली गांवों में भी इन्हें देखा गया। हालांकि, धनगढ़ी के इस शहरी उद्यान क्षेत्र में इनका दिखना एक बड़ी और सुखद घटना मानी जा रही है।
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विशेषज्ञों के अनुसार, यह पक्षी नेपाल के अलावा भारत के दुधवा नेशनल पार्क, जिम कॉर्बेट (उत्तराखंड), भूटान, बांग्लादेश, म्यांमार और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों जैसे थाईलैंड, मलेशिया और फिलीपींस में पाया जाता है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि इस दुर्लभ पक्षी की मौजूदगी से क्षेत्र में जैव-विविधता के संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।