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कोरोना की वजह से इस बार औपचारिक रहा रामलीला का मंचन
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लखीमपुर खीरी। कोरोना संक्रमण की वजह से इस बार रामलीला के आयोजन में काफी बदलाव रहा तो इस बार रावण के पुतले की ऊंचाई 60 के बजाय 10 फुट ही रह गई। इसके अलावा कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले नहीं बनाए गए। इस बार रामलीला के आयोजन की महज औपचारिकता पूरी होने से लोग मायूस रहे। रामलीला मंचन का भी फेसबुक के जरिए प्रसारण किया गया।
कोरोना के कारण रामलीला का आयोजन सीमित रहा। मेला मैदान पर होने वाली रामलीला इस बार मथुरा भवन में हुई। ऐसे में लोग रामलीला का सजीव मंचन देखने से वंचित रहे। विजयदशमी पर राम-रावण के युद्ध का भी परंपरागत मंचन नहीं हो सका। कोरोना की गाइड लाइन के तहत मेला समिति ने रस्म अदायगी कर मेला मैदान पर रावण का सिर्फ प्रतीकात्मक पुतला जलाया। इससे लोग रामलीला का पूरा लुत्फ उठाने से वंचित रह गए। समिति के विपुल सेठ ने बताया कि पहले करीब 60 फुट ऊंचा रावण का पुतला बनता था लेकिन इस साल कोरोना संक्रमण को देखते हुए केवल 10 फुट ऊंचाई का पुतला बनाया गया है। वहीं कुुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले नहीं बनाए गए हैं।
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रामलीला को लेकर सालभर इंतजार रहता है। मगर, इस बार कोरोना ने सब चौपट कर दिया। ऐसे दिन आएंगे, इसके बारे में कभी सोचा तक नहीं था।
- रामपाल सिंह
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कोरोना ने धार्मिक आयोजनों पर भी बंदिश लगा दी। मंदिरों में पूजा पाठ हो या फिर रामलीला, सभी की रस्म निभाई जा रही है। बच्चों की मेला देखने की ख्वाहिश भी इस बार अधूरी रह गई।
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-इंद्रासन गुप्ता
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इस साल की रामलीला याद रहेगी। वैसे तो मेेला मैदान पर जाकर देखते थे, लेकिन इस बार फेसबुक पर देखा। मगर, संजीव मंचन देखने की बात ही कुछ अलग रहती है।
- डॉ.संतोष कुमार श्रीवास्तव
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रामलीला देखने के लिए जिलेभर से लोग आते थे। मगर, कोरोना ने सबकी उम्मीद पर पानी फेर दिया। इस बार न तो रामलीला और न ही रावण वध देखने को मिला।
- विजय भवन श्रीवास्तव
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कोरोना के कारण रामलीला का आयोजन सीमित रहा। मेला मैदान पर होने वाली रामलीला इस बार मथुरा भवन में हुई। ऐसे में लोग रामलीला का सजीव मंचन देखने से वंचित रहे। विजयदशमी पर राम-रावण के युद्ध का भी परंपरागत मंचन नहीं हो सका। कोरोना की गाइड लाइन के तहत मेला समिति ने रस्म अदायगी कर मेला मैदान पर रावण का सिर्फ प्रतीकात्मक पुतला जलाया। इससे लोग रामलीला का पूरा लुत्फ उठाने से वंचित रह गए। समिति के विपुल सेठ ने बताया कि पहले करीब 60 फुट ऊंचा रावण का पुतला बनता था लेकिन इस साल कोरोना संक्रमण को देखते हुए केवल 10 फुट ऊंचाई का पुतला बनाया गया है। वहीं कुुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले नहीं बनाए गए हैं।
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रामलीला को लेकर सालभर इंतजार रहता है। मगर, इस बार कोरोना ने सब चौपट कर दिया। ऐसे दिन आएंगे, इसके बारे में कभी सोचा तक नहीं था।
- रामपाल सिंह
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कोरोना ने धार्मिक आयोजनों पर भी बंदिश लगा दी। मंदिरों में पूजा पाठ हो या फिर रामलीला, सभी की रस्म निभाई जा रही है। बच्चों की मेला देखने की ख्वाहिश भी इस बार अधूरी रह गई।
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-इंद्रासन गुप्ता
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इस साल की रामलीला याद रहेगी। वैसे तो मेेला मैदान पर जाकर देखते थे, लेकिन इस बार फेसबुक पर देखा। मगर, संजीव मंचन देखने की बात ही कुछ अलग रहती है।
- डॉ.संतोष कुमार श्रीवास्तव
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रामलीला देखने के लिए जिलेभर से लोग आते थे। मगर, कोरोना ने सबकी उम्मीद पर पानी फेर दिया। इस बार न तो रामलीला और न ही रावण वध देखने को मिला।
- विजय भवन श्रीवास्तव