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Lakhimpur Kheri News: गर्मियों में आ रहे सोरायसिस के मरीज
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जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीज देखते चर्मरोग विशेषज्ञ डॉ. दीपेंद्र गौतम। संवाद
ओयल। मौसम में बदलाव के साथ ही त्वचा के रोगियों में बढ़ोत्तरी हो रही है। वहीं इन दिनों सोरायसिस के मरीज भी जिला अस्पताल में इलाज के लिए आ रहे हैं। आमतौर से ठंड के दिनों में सोरायसिस के मरीजों की संख्या में इजाफा होता है, लेकिन इस बार गर्मियों में भी सोरायसिस के मरीज सामने आ रहे है। बृहस्पतिवार को 15 मरीज पहुंचे, जिन्हें चिकित्सक ने उचित परामर्श व दवाएं दीं। चिकित्सकों की सलाह दी कि ऐसे मरीज कॉस्टिक सोडा वाला साबुन प्रयोग न करें।
जिला अस्पताल के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपेंद्र गौतम ने बताया कि ओपीडी में करीब 150-200 मरीज आ रहे हैं। इसमें धूप, गर्मी से त्वचा पर दाने, फोड़े-फुंसी, दाद, खुजली के मरीज शामिल हैं। साथ ही सोरायसिस के मरीज आमतौर पर जो सर्दियों के खुश्क मौसम आते थे, वह मरीज गर्मी के मौसम में भी आ रहे हैं। करीब 10 से 15 मरीज प्रतिदिन ओपीडी में आ रहे हैं। बृहस्पतिवार को भी 15 मरीज पहुंचे।
सोरायसिस के शुरुआती लक्षणों में त्वचा पर लाल रंग के चकत्ते या दाद जैसा दिखता है। इसके बाद त्वचा पर लाल मोटे धब्बे, जिन पर सफेद रंग की पपड़ियां होती हैं और उसमें खुजली या खून निकलने लगता है। त्वचा सूखी, काली पड़ जाती है, सफेद रंग की पपड़ी निकले लगती है। यह बीमारी आमतौर पर माता-पिता से संतान को मिलती है, पर कभी-कभी यह अपने आप भी हो जाती है।
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कुछ मरीजों में सोरायसिस के साथ ही हाथ-पैर की अंगुलियों, जोड़ों में दर्द की शिकायत हो जाती है, जिसे सोरायटिक कहते हैं। आमतौर पर लोग इसे नजर अंदाज कर देते हैं। डॉ. दीपेंद्र ने बताया कि ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत किसी विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह लेकर इलाज करें। लापरवाही न बरते नहीं तो यह बीमारी गंभीर रूप धारण कर लेती है। कई मामलों में अंग प्रत्यारोपण तक करना पड़ सकता है।
इन बातों का रखें ध्यान
-शरीर पर नारियल के तेल का इस्तेमाल करें।
-शरीर का साफ रखें। नहाने से पहले व बाद में तेल से मालिश करें।
- कॉस्टिक सोडा वाले साबुन का इस्तेमाल न करें।
- शरीर में पानी की कमी न होने दें।
- साफ स्वच्छ व सूखे कपड़े पहनें।
- हो सके तो प्रतिदिन अखरोट खाएं।
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जिला अस्पताल के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपेंद्र गौतम ने बताया कि ओपीडी में करीब 150-200 मरीज आ रहे हैं। इसमें धूप, गर्मी से त्वचा पर दाने, फोड़े-फुंसी, दाद, खुजली के मरीज शामिल हैं। साथ ही सोरायसिस के मरीज आमतौर पर जो सर्दियों के खुश्क मौसम आते थे, वह मरीज गर्मी के मौसम में भी आ रहे हैं। करीब 10 से 15 मरीज प्रतिदिन ओपीडी में आ रहे हैं। बृहस्पतिवार को भी 15 मरीज पहुंचे।
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सोरायसिस के शुरुआती लक्षणों में त्वचा पर लाल रंग के चकत्ते या दाद जैसा दिखता है। इसके बाद त्वचा पर लाल मोटे धब्बे, जिन पर सफेद रंग की पपड़ियां होती हैं और उसमें खुजली या खून निकलने लगता है। त्वचा सूखी, काली पड़ जाती है, सफेद रंग की पपड़ी निकले लगती है। यह बीमारी आमतौर पर माता-पिता से संतान को मिलती है, पर कभी-कभी यह अपने आप भी हो जाती है।
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कुछ मरीजों में सोरायसिस के साथ ही हाथ-पैर की अंगुलियों, जोड़ों में दर्द की शिकायत हो जाती है, जिसे सोरायटिक कहते हैं। आमतौर पर लोग इसे नजर अंदाज कर देते हैं। डॉ. दीपेंद्र ने बताया कि ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत किसी विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह लेकर इलाज करें। लापरवाही न बरते नहीं तो यह बीमारी गंभीर रूप धारण कर लेती है। कई मामलों में अंग प्रत्यारोपण तक करना पड़ सकता है।
इन बातों का रखें ध्यान
-शरीर पर नारियल के तेल का इस्तेमाल करें।
-शरीर का साफ रखें। नहाने से पहले व बाद में तेल से मालिश करें।
- कॉस्टिक सोडा वाले साबुन का इस्तेमाल न करें।
- शरीर में पानी की कमी न होने दें।
- साफ स्वच्छ व सूखे कपड़े पहनें।
- हो सके तो प्रतिदिन अखरोट खाएं।