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Lakhimpur Kheri News: नेपाल में राजशाही की वापसी को लेकर प्रदर्शन तेज
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नेपाल में राजतंत्र की वापसी को लेकर रैली निकालते लोग। फाइल फोटो
धनगढ़ी (नेपाल)। नेपाल में इन दिनों राजशाही की दोबारा वापसी को लेकर राजनीति गरमाई हुई है। देश भर में जगह-जगह राजा की वापसी की मांग को लेकर जुलूस, रैली के साथ प्रदर्शन जारी है और राजा वापस आओ, देश बचाओ जैसे नारे लग रहे हैं।
राजा समर्थक राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी द्वारा अगले माह 11 अप्रैल को प्रदर्शन व 20 से आंदोलन शुरू करने की घोषणा की गई है। उधर राजनैतिक दलों के शीर्ष नेताओं ने राजशाही वापसी की मांग को खारिज करते हुए इसे असंभव बताया है।
नेपाल देश 240 वर्षों तक हिंदू राष्ट्र रहने के साथ ही यहां राजशाही ही चलती थी। सन् 2001 में राजा वीरेंद्र वीर विक्रम शाह की परिवार समेत हत्या के बाद सन् 2002 में उनके भाई ज्ञानेंद्र शाह राजा बने थे। उधर, चीन समर्थक कम्युनिस्ट द्वारा जारी आंदोलन ने 2006 में राजा ज्ञानेंद्र शाह की राजशाही को खत्म कर दिया था। इसके बाद से नेपाल की सत्ता पर कम्युनिस्ट का कब्जा हो गया।
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बताया जाता है कि कम्युनिस्ट के दो बड़े नेता पुष्प कमल दहल उर्फ प्रचंड और केपी शर्मा ओली रहे। प्रचंड ने राजतंत्र को खत्म करने के लिए काफी समय तक गुरिल्ला युद्ध भी चलाया। सन् 2008 में पहली बार निर्वाचन प्रक्रिया के जरिये नेपाल में गणतंत्र आया। जिसमें अभी तक 17 सालों में 13 सरकारें बनी हैं।
इन 17 वर्षों बाद फिर से राजशाही को वापस लाने की आवाज उठने लगी है। राजा समर्थकों द्वारा नेपाल में पिछले दिनों जगह-जगह प्रदर्शन, जुलूस, बाइक रैली आदि किए थे, जो लगातार जारी हैं। काठमांडो में नारायण हिटी राज दरबार के आगे भी कई बार प्रदर्शन हो चुका है और राजा आओ-देश बचाओ, राज महल (नारायण हिटी दरबार) वापस करो के नारे लगे हैं।
इस बारे में राजा समर्थक राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के अध्यक्ष राजेंद्र लिन्ग्देन ने बैठक कर 11 अप्रैल को काठमांडो में राजा वापसी को लेकर प्रदर्शन व 20 अप्रैल को राजधानी केंद्रित आंदोलन करने की बात कही है।
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राजा समर्थक राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी द्वारा अगले माह 11 अप्रैल को प्रदर्शन व 20 से आंदोलन शुरू करने की घोषणा की गई है। उधर राजनैतिक दलों के शीर्ष नेताओं ने राजशाही वापसी की मांग को खारिज करते हुए इसे असंभव बताया है।
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नेपाल देश 240 वर्षों तक हिंदू राष्ट्र रहने के साथ ही यहां राजशाही ही चलती थी। सन् 2001 में राजा वीरेंद्र वीर विक्रम शाह की परिवार समेत हत्या के बाद सन् 2002 में उनके भाई ज्ञानेंद्र शाह राजा बने थे। उधर, चीन समर्थक कम्युनिस्ट द्वारा जारी आंदोलन ने 2006 में राजा ज्ञानेंद्र शाह की राजशाही को खत्म कर दिया था। इसके बाद से नेपाल की सत्ता पर कम्युनिस्ट का कब्जा हो गया।
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बताया जाता है कि कम्युनिस्ट के दो बड़े नेता पुष्प कमल दहल उर्फ प्रचंड और केपी शर्मा ओली रहे। प्रचंड ने राजतंत्र को खत्म करने के लिए काफी समय तक गुरिल्ला युद्ध भी चलाया। सन् 2008 में पहली बार निर्वाचन प्रक्रिया के जरिये नेपाल में गणतंत्र आया। जिसमें अभी तक 17 सालों में 13 सरकारें बनी हैं।
इन 17 वर्षों बाद फिर से राजशाही को वापस लाने की आवाज उठने लगी है। राजा समर्थकों द्वारा नेपाल में पिछले दिनों जगह-जगह प्रदर्शन, जुलूस, बाइक रैली आदि किए थे, जो लगातार जारी हैं। काठमांडो में नारायण हिटी राज दरबार के आगे भी कई बार प्रदर्शन हो चुका है और राजा आओ-देश बचाओ, राज महल (नारायण हिटी दरबार) वापस करो के नारे लगे हैं।
इस बारे में राजा समर्थक राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के अध्यक्ष राजेंद्र लिन्ग्देन ने बैठक कर 11 अप्रैल को काठमांडो में राजा वापसी को लेकर प्रदर्शन व 20 अप्रैल को राजधानी केंद्रित आंदोलन करने की बात कही है।