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बिजली विभाग की छूट योजना पर लगी रोक
लखीमपुर खीरी।
Updated Wed, 09 Dec 2015 04:51 PM IST
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नियमित रूप से बिजली बिल न जमाकर छूट योजना का इंतजार करने वाले शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ताओं के लिए एक बुरी खबर है। नियामक आयोग ने छूट योजना को ईमानदार और नियमित रूप से बिल जमा करने वाले उपभोक्ताओं के साथ अन्याय बताया है। आयोग के मुताबिक इससे नियमित रूप से जमा करने के लिए भेजे जाने वाले बिलों को रोककर रखा जाता है। जिससे राजस्व का नुकसान भी होता है।
लखीमपुर डिवीजन के ग्रामीण क्षेत्र में करीब 15 करोड़ रुपये का राजस्व बकाया है। जो पिछले एक साल से जमा नहीं हुआ है। अधिशासी अभियंता रजनीकांत मिश्रा ने बताया कि ज्यादा से ज्यादा राजस्व वसूलने के लिए नियामक आयोग द्वारा वित्तीय वर्ष के आखिरी महीनों में बिजली बिलों के ब्याज दर में एकमुश्त समाधान योजना या 50 प्रतिशत छूट योजना लागू की जाती थी। नियामक आयोग ने कहा है कि इससे नियमित रूप से बिजली अदा करने वाले उपभोक्ताओं के साथ न्याय नहीं हो रहा है। इसलिए आयोग ने यह निर्णय लिया है कि एक ही तरह के उपभोक्ताओं के साथ दो तरीके का व्यवहार उचित नहीं है। इससे राजस्व को भी नुकसान हो रहा है। आयोग ने छूट योजना पर रोक लगाने का निर्णय लिया है।
ईई ने बताया कि योजना समाप्त होने के बाद शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ताओं से नियमित रूप से बिजली बिल जमा कराने पर जोर दिया जाएगा।
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लखीमपुर डिवीजन के ग्रामीण क्षेत्र में करीब 15 करोड़ रुपये का राजस्व बकाया है। जो पिछले एक साल से जमा नहीं हुआ है। अधिशासी अभियंता रजनीकांत मिश्रा ने बताया कि ज्यादा से ज्यादा राजस्व वसूलने के लिए नियामक आयोग द्वारा वित्तीय वर्ष के आखिरी महीनों में बिजली बिलों के ब्याज दर में एकमुश्त समाधान योजना या 50 प्रतिशत छूट योजना लागू की जाती थी। नियामक आयोग ने कहा है कि इससे नियमित रूप से बिजली अदा करने वाले उपभोक्ताओं के साथ न्याय नहीं हो रहा है। इसलिए आयोग ने यह निर्णय लिया है कि एक ही तरह के उपभोक्ताओं के साथ दो तरीके का व्यवहार उचित नहीं है। इससे राजस्व को भी नुकसान हो रहा है। आयोग ने छूट योजना पर रोक लगाने का निर्णय लिया है।
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ईई ने बताया कि योजना समाप्त होने के बाद शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ताओं से नियमित रूप से बिजली बिल जमा कराने पर जोर दिया जाएगा।