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Lakhimpur Kheri News: 30 हजार की आबादी... इंटर कॉलेज तक नहीं
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सोनालिका वर्मा-संवाद
मितौली। तहसील क्षेत्र में एक भी सरकारी इंटर कॉलेज और डिग्री कॉलेज नहीं है। इससे तहसील क्षेत्र के आठ-दस हजार छात्र-छात्राओं को प्रवेश लेने के लिए दूरदराज जाना पड़ता है। छात्राओं को सबसे ज्यादा दिक्कत होती है। कई बार छात्राओं ने कन्या इंटर कॉलेज और एक डिग्री कॉलेज बनवाने की मांग उठाई, लेकिन हुआ कुछ नहीं।
तहसील मुख्यालय की ग्राम पंचायत मितौली में लगभग 30 हजार की आबादी है। यहां शिक्षा के नाम पर न राजकीय इंटर कॉलेज है और न ही राजकीय कन्या इंटर कॉलेज है। डिग्री कॉलेज भी नहीं है। यहां पर निवास करने वाले अभिभावकों के करीब के आठ से दस हजार बच्चे निजी और एडेड स्कूल में शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं। कस्बे में दो प्राइवेट इंटर कॉलेज और एक एडेड विद्यालय है।
कस्बे से सात किलोमीटर दूर फत्तेपुर में दो डिग्री कॉलेज है। आज तक कस्बे में इंटर कॉलेज के निर्माण कराने कमी पहल नहीं की गई। दूरी के बाद भी अभिभावकों को शिक्षा के लिए निजी स्कूलों में मोटी फीस देनी पड़ रही है।
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खुर्दा गांव की सोनालिका वर्मा का कहना है कि गांव से मितौली पढ़ाई करने जाना पड़ता है। वहां भी कोई सरकारी इंटर कॉलेज नहीं है। सिर्फ प्राइवेट कालेज हैं, जिसके चलते फीस का बोझ झेलना पड़ रहा है।
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कस्बे की सना इदरीशी का कहना है कि कस्बे में कोई डिग्री कॉलेज नहीं है। उच्च शिक्षा के लिए कस्बे से बाहर जाना पड़ता है, इससे आर्थिक बोझ के साथ ही अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कस्बे में एक कन्या इंटर कॉलेज भी होना चाहिए।
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अनस सिद्दीकी का कहना है कि कस्बे में सिर्फ प्राइवेट इंटर कॉलेज है। कोई भी सरकारी इंटर कॉलेज नहीं है। सरकारी इंटर कॉलेज की लोगों की आवश्यकता है।
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कस्बे के रोहित भार्गव का कहना है कि तहसील मुख्यालय होने के बाद भी यहां पर कोई डिग्री कॉलेज नहीं है। यहां के बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे जिलों में भी जाना पड़ रहा है। यहां पर यदि कॉलेज होते तो शायद इतनी लंबी दूरी तय न करनी पड़ती।
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तहसील मुख्यालय की ग्राम पंचायत मितौली में लगभग 30 हजार की आबादी है। यहां शिक्षा के नाम पर न राजकीय इंटर कॉलेज है और न ही राजकीय कन्या इंटर कॉलेज है। डिग्री कॉलेज भी नहीं है। यहां पर निवास करने वाले अभिभावकों के करीब के आठ से दस हजार बच्चे निजी और एडेड स्कूल में शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं। कस्बे में दो प्राइवेट इंटर कॉलेज और एक एडेड विद्यालय है।
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कस्बे से सात किलोमीटर दूर फत्तेपुर में दो डिग्री कॉलेज है। आज तक कस्बे में इंटर कॉलेज के निर्माण कराने कमी पहल नहीं की गई। दूरी के बाद भी अभिभावकों को शिक्षा के लिए निजी स्कूलों में मोटी फीस देनी पड़ रही है।
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खुर्दा गांव की सोनालिका वर्मा का कहना है कि गांव से मितौली पढ़ाई करने जाना पड़ता है। वहां भी कोई सरकारी इंटर कॉलेज नहीं है। सिर्फ प्राइवेट कालेज हैं, जिसके चलते फीस का बोझ झेलना पड़ रहा है।
कस्बे की सना इदरीशी का कहना है कि कस्बे में कोई डिग्री कॉलेज नहीं है। उच्च शिक्षा के लिए कस्बे से बाहर जाना पड़ता है, इससे आर्थिक बोझ के साथ ही अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कस्बे में एक कन्या इंटर कॉलेज भी होना चाहिए।
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अनस सिद्दीकी का कहना है कि कस्बे में सिर्फ प्राइवेट इंटर कॉलेज है। कोई भी सरकारी इंटर कॉलेज नहीं है। सरकारी इंटर कॉलेज की लोगों की आवश्यकता है।
कस्बे के रोहित भार्गव का कहना है कि तहसील मुख्यालय होने के बाद भी यहां पर कोई डिग्री कॉलेज नहीं है। यहां के बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे जिलों में भी जाना पड़ रहा है। यहां पर यदि कॉलेज होते तो शायद इतनी लंबी दूरी तय न करनी पड़ती।

सोनालिका वर्मा-संवाद

सोनालिका वर्मा-संवाद