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Lakhimpur Kheri News: मरीजों को नहीं मिलता दूध, रैन-बसेरा भी नहीं बना
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जिला महिला अस्पताल का ठंड में खुला हुआ रैन बसेरा। संवाद
लखीमपुर खीरी। जिला अस्पताल के बाद जिला महिला अस्पताल में अव्यवस्थाएं सामने आई हैं। महिला अस्पताल में भर्ती मरीजों को मेन्यू के अनुसार भोजन व नाश्ता नहीं मिलता। थाली से दूध, फल, मक्खन व सलाद गायब है। महिला अस्पताल में रैन बसेरा की भी व्यवस्था नहीं है।
ऐसे में आने वाले तीमारदारों को रात काटना मुश्किल हो जाता है। इतना ही नहीं कई भर्ती कई मरीजों को कंबल नहीं दिए गए। अनदेखी के चलते मरीजों को काफी दिक्कतों का समाना करना पड़ता है, लेकिन जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे।
जिला महिला अस्पताल पुराने भवन में संचालित है। बारिश के समय लगभग सभी वार्ड में पानी टपकता है। अस्पताल में रोजाना 400 से 500 मरीजों की ओपीडी होती है। वहीं 20 से 30 महिलाओं का प्रसव भी महिला अस्पताल में होता है, जिसमें कुछ ऑपरेशन से प्रसव होते हैं।
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सामान्य प्रसव वाले महिलाओं को एक से दो दिनों तक भर्ती रखा जाता है, वहीं ऑपरेशन से प्रसव वाली महिलाओं को एक हफ्ते या इससे अधिक दिनों तक भर्ती रखना पड़ता है।
संबंधित मरीज के साथ कोई न कोई तीमारदार होते हैं, जिनको मरीज के साथ रात रुकना पड़ता है।
महिला अस्पताल में रैन बसेरे की व्यवस्था न होने पर तीमारदारों को रात कटना मुश्किल हो जाता है। हालांकि अस्पताल प्रशासन की अपनी मजबूरी है। पर्याप्त जगह न होने की वजह से रैन बसेरा की व्यवस्था नहीं है। पहले एक रैन बरेसा था, जो नए भवन निर्माण की वजह से टूट चुका है।
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ऐसे में आने वाले तीमारदारों को रात काटना मुश्किल हो जाता है। इतना ही नहीं कई भर्ती कई मरीजों को कंबल नहीं दिए गए। अनदेखी के चलते मरीजों को काफी दिक्कतों का समाना करना पड़ता है, लेकिन जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे।
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जिला महिला अस्पताल पुराने भवन में संचालित है। बारिश के समय लगभग सभी वार्ड में पानी टपकता है। अस्पताल में रोजाना 400 से 500 मरीजों की ओपीडी होती है। वहीं 20 से 30 महिलाओं का प्रसव भी महिला अस्पताल में होता है, जिसमें कुछ ऑपरेशन से प्रसव होते हैं।
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सामान्य प्रसव वाले महिलाओं को एक से दो दिनों तक भर्ती रखा जाता है, वहीं ऑपरेशन से प्रसव वाली महिलाओं को एक हफ्ते या इससे अधिक दिनों तक भर्ती रखना पड़ता है।
संबंधित मरीज के साथ कोई न कोई तीमारदार होते हैं, जिनको मरीज के साथ रात रुकना पड़ता है।
महिला अस्पताल में रैन बसेरे की व्यवस्था न होने पर तीमारदारों को रात कटना मुश्किल हो जाता है। हालांकि अस्पताल प्रशासन की अपनी मजबूरी है। पर्याप्त जगह न होने की वजह से रैन बसेरा की व्यवस्था नहीं है। पहले एक रैन बरेसा था, जो नए भवन निर्माण की वजह से टूट चुका है।

जिला महिला अस्पताल का ठंड में खुला हुआ रैन बसेरा। संवाद

जिला महिला अस्पताल का ठंड में खुला हुआ रैन बसेरा। संवाद