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Lakhimpur Kheri News: चितवन पार्क में गैंडों की लीद में मिले प्लास्टिक कचरे के अंश
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धनगढ़ी-नेपाल के चितवन पार्क में विचरण करते एक सीग वाले गैंडे। फाइल फोटो।
धनगढ़ी (नेपाल)। नेपाल में भी वन्यजीवों पर प्लास्टिक का खतरा मंडराने लगा है। वैज्ञानिकों को नेपाल के चितवन राष्ट्रीय पार्क में गैंडों की लीद में प्लास्टिक के अंश मिले हैं।
वैज्ञानिकों की मानें तो यह उनके स्वास्थ्य के लिए खतरा बन रहे हैं। एक सींग वाले गैंडे नेपाल के तराई क्षेत्र व भारत में पाए जाते हैं। बताया जाता है कि दुनियाभर में इस प्रजाति के 2100-2200 व्यस्क गैंडे ही शेष बचे हैं। चितवन पार्क में इस वक्त 752 गैंडा हैं। जिनके दीदार करने सैलानी पहुंचते हैं। वे अपने साथ खाने-पीने का सामान की प्लास्टिक को आसपास पार्क क्षेत्र में फेंक देते हैं। गैंडा घास खाने के साथ ही प्लास्टिक के कचरे को भी खा जाते हैं।
ये कचरा मिला लीद से
वैज्ञानिकों के अध्ययन में चितवन पार्क में सन् 2020 से 2022 तक के बीच गैंडों की लीद के 258 ढेरों का परीक्षण किया गया। जिसमें 10 फीसदी से अधिक प्लास्टिक कचरे के अंश मिले हैं। वैज्ञानिकों को लीद में बोतल के ऊपरी हिस्से, तंबाकू, गुटखा के पाउच, प्लास्टिक कैरी बैग, बिस्कुट, चाकलेट के पैकेट, रबर बैंड, शैंपू आदि के आठ प्रकार के प्लास्टिक अंश मिले हैं। अभी दो की पहचान भी नहीं हो सकी है। प्लास्टिक के पार्कों में प्रतिबंध की ओर ध्यान न दिया गया तो आने वाले समय में वन्यजीवों के लिए यह विकराल समस्या बन जाएगी।
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वैज्ञानिकों की मानें तो यह उनके स्वास्थ्य के लिए खतरा बन रहे हैं। एक सींग वाले गैंडे नेपाल के तराई क्षेत्र व भारत में पाए जाते हैं। बताया जाता है कि दुनियाभर में इस प्रजाति के 2100-2200 व्यस्क गैंडे ही शेष बचे हैं। चितवन पार्क में इस वक्त 752 गैंडा हैं। जिनके दीदार करने सैलानी पहुंचते हैं। वे अपने साथ खाने-पीने का सामान की प्लास्टिक को आसपास पार्क क्षेत्र में फेंक देते हैं। गैंडा घास खाने के साथ ही प्लास्टिक के कचरे को भी खा जाते हैं।
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ये कचरा मिला लीद से
वैज्ञानिकों के अध्ययन में चितवन पार्क में सन् 2020 से 2022 तक के बीच गैंडों की लीद के 258 ढेरों का परीक्षण किया गया। जिसमें 10 फीसदी से अधिक प्लास्टिक कचरे के अंश मिले हैं। वैज्ञानिकों को लीद में बोतल के ऊपरी हिस्से, तंबाकू, गुटखा के पाउच, प्लास्टिक कैरी बैग, बिस्कुट, चाकलेट के पैकेट, रबर बैंड, शैंपू आदि के आठ प्रकार के प्लास्टिक अंश मिले हैं। अभी दो की पहचान भी नहीं हो सकी है। प्लास्टिक के पार्कों में प्रतिबंध की ओर ध्यान न दिया गया तो आने वाले समय में वन्यजीवों के लिए यह विकराल समस्या बन जाएगी।
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