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शासन के आदेश से अभिभावक, शिक्षक एवं कर्मचारी खुश

Wed, 26 May 2021 12:56 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 26 May 2021 12:56 AM IST
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Parents, teachers and employees happy with the order of the government
स्वत्तिपोषित स्कूल प्रशासन में नाराजगी, शासनादेश का पालन कराने के लिए समिति गठित
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लखीमपुर खीरी। कोविड महामारी को देखते हुए योगी सरकार ने स्कूलों को अधिक शुल्क न लेने और शिक्षक एवं कर्मचारियों को पूरा वेतन देने का आदेश दिया है, जिसको लेकर अभिभावक, शिक्षक एवं कर्मचारी जहां खुश हैं, तो वहीं स्ववित्तपोषित स्कूल प्रशासन में नाराजगी है।
पिछले साल कोरोना काल में निजी स्कूलों की फीस को लेकर खूब हाय तौबा मची। स्ववित्तपोषित स्कूल प्रशासन शुल्क कम न करने की जिद पर अड़ा रहा। लॉकडाउन के तीन माह का शुल्क माफ करने केे लेकर कलक्ट्रेट सभागार में डीएम की मौजूदगी में अभिभावक एवं स्कूल संघ के पदाधिकारियों के बीच बैठक भी हुई। मगर, नतीजा शून्य रहा। इस बार फिर जब कोरोना के कारण स्कूल बंद हुए तो अभिभावक सोशल मीडिया पर फीस माफी की मांग करने लगे। शुल्क माफी के मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए योगी सरकार ने निजी स्कूल प्रशासन के मनमाना शुल्क वसूलने पर अंकुश लगाते हुए ऑनलाइन कक्षाओं के संचालन होने तक परीक्षा, क्रीड़ा, विज्ञान प्रयोगशाला, लाइब्रेरी, कंप्यूटर, परिवहन एवं वार्षिक समारोह फीस पर रोक लगाने के साथ शिक्षक एवं कर्मचारियों को पूरा वेतन देने के निर्देश दिए। इससे अभिभावकों एवं शिक्षक व कर्मचारियों में खुशी है।
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शुल्क लेने एवं वेतन देने की हो निगरानी
अभिभावक से लेकर शिक्षक एवं कर्मचारियों का कहना है कि स्कूल कितना शुल्क ले रहे हैं और कर्मचारियों को क्या वेतन दे रहे हैं। इसकी निगरानी होनी चाहिए, क्योंकि शिकायत करने पर बच्चों का नुकसान और स्टाफ की नौकरी जाने का डर है। अभिभावकों का कहना है कि सभी स्कूलों को सूचना बोर्ड पर शुल्क लिखना चाहिए। उधर, स्कूल प्रशासन का कहना है कि कोरोना काल से पहले भी शत प्रतिशत फीस जमा नहीं होती थी। अब तो हालात ही खराब हैं। इस कारण पिछले साल बमुश्किल 40 प्रतिशत की शुल्क जमा हुआ। इस साल के सत्र में सिर्फ 10 से 15 फीसदी अभिभावकों ने ही फीस जमा की है।
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शुल्क नियामक समिति से करें शिकायत
शासन के निर्देश के बाद जिले में शुल्क नियामक समिति गठित कर दी गई है। इसके अध्यक्ष डीएम हैं। समिति में डीआईओएस, एक सीए सहित एक अभिभावक शामिल हैं। जिम्मेेदार बताते हैं कि सीए को इसलिए रखा गया है, जिससे शिकायत मिलने पर विद्यालय का ऑडिट कराया जा सके।
एलपीएस ने वापस ली बढ़ी फीस
शासनादेश जारी होने के बाद एलपीएस स्कूल प्रशासन ने शुल्क बढ़ोत्तरी वापस ले ली है। प्रधानाचार्य विजय सचदेवा बताते हैं कि नए सत्र में पांच प्रतिशत शिक्षक शुल्क बढ़ाई गई थी। इसका कारण स्टाफ की वेतन वृद्धि था। कंप्यूटर, साइंस, लाइब्रेरी, क्रीड़ा, वार्षिक समारोह एवं परीक्षा शुल्क नहीं लिया जाएगा। यदि किसी छात्र के अभिभावक कोविड-19 की वजह से दिवंगत हुए हैं तो उन्हें अतिरिक्त छूट मिलेगी।
कई अभिभावकों ने नहीं जमा की है पिछले सत्र की फीस
जब से कॉलेज बंद हैं तब से सिर्फ शिक्षण शुल्क ही लिया जा रहा है। मगर, कई अभिभावकों ने पिछले सत्र की भी फीस जमा नहीं की है। ऐसे में शिक्षक एवं कर्मचारियों को वेतन देने में दिक्कत होती है।
- महेंद्र कुमार त्रिपाठी, प्रबंधक एवं प्रधानाचार्य, सरस्वती विद्या निकेतन इंटर कॉलेज, गोला
कोरोना गत वर्ष शुरू हुआ। इससे पहले भी कभी पूरा शुल्क नहीं जमा हुआ। तमाम अभिभावक शिक्षण शुल्क तक नहीं जमा कर रहे, उन पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। जब फीस हीं नहीं आएगी तो स्टाफ को वेतन कैसे देंगे।
- रघुवीर सिंह यादव, प्रबंधक विवेक ज्ञान स्थली एवं अध्यक्ष स्ववित्त पोषित प्रधानाचार्य प्रबंधक संघ
शासन के निर्देश का पालन होगा। मगर, इससे स्टाफ का वेतन पूरा नहीं होनेे वाला। स्कूलों को नुकसान होगा। सरकार स्कूलों को भी राहत पैकेज का ऐलान करें। अन्यथा ऋण का प्राविधान करे।
- जसमेल सिंह मांगट, चेयरमैन गोल्डन फ्लावर सीनियर सेकेंडरी स्कूल, पलियाकलां
2018 में जारी एक्ट के अनुसार जिन स्कूलों का वार्षिक शुल्क 20 हजार से अधिक है वह शिक्षण शुल्क के अलावा अन्य कोई फीस नहीं ले सकते हैं। एक्ट लागू होने के बाद से ही स्कूल इसका पालन कर रहा है। शुल्क को लेकर शासन ने जो निर्देश जारी किया है वह सही है।
- पुष्पा गुप्ता, प्रधानाचार्य, यूडी चिल्ड्रन एकेडमी, मोहम्मदी
स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई हो रही है। ऐसे में कुछ शुल्क ऐसे हैं, जिनका ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान लेने का औचित्य नहीं। ये शुल्क लेने पर शासन ने रोक लगा दी है। प्रतिबंधित शुल्क लिए जाने की पुष्टि होने पर मान्यता खत्म करने की कार्रवाई की जाएगी। अभिभावक रसीद के साथ कार्यालय पर शिकायती पत्र दे सकते हैं। शासनादेश का अक्षरश: पालन कराया जाएगा।
- डॉ. ओपी त्रिपाठी, डीआईओएस
अभिभावक बोले, विरोध करो तो बच्चों को करते हैं प्रताड़ित
अब तो स्कूल बैंक में जमा करने के लिए चालान देते हैं। जिस पर पूरा शुल्क अंकित होता है वह भी लेट फीस सहित। कोरोना काल में भी स्कूल लेट फीस चार्ज कर रहे हैं, जो कि गलत है। विरोध करने पर बच्चों को प्रताड़ित करते हैं।

- मनोज त्रिपाठी, अभिभावक, बहादुनगर
जब तक ऑनलाइन कक्षाएं चल रही हैं तब तक सिर्फ शिक्षण शुल्क ही लिया जाना चाहिए, क्योंकि ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान छात्र स्कूली सुविधाओं को उपयोग नहीं करते। इसलिए इसका लिया जाना उचित नहीं है।
- विक्रम केड़िया, अभिभावक
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