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‘मां के पांव के नीचे जन्नत रहती है’
गोला गोकर्णनाथ
Updated Sat, 04 Apr 2015 06:17 PM IST
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ऐतिहासिक चैती मेले के सांस्कृतिक मंच पर हुए कुलहिंद मुशायरे में देश के नामचीन शायरों ने अपनी नज्म, नात, शेरो-शायरी से महफिल को रोशन किया। शायर मधुकर शैदाई के संयोजन में हुए कुल हिंद मुशायरे की शुरुआत मुख्य अतिथि पूर्व सांसद जफर अली नकवी, कार्यक्रम अध्यक्ष नरेश सिंह तोमर एडवोकेट, विशिष्ट अतिथि डिप्टी सीएमओ डॉ. रवींद्र्रनाथ वर्मा, शिवचंदर शाह एडवोकेट ने शमा रोशन कर की।
नगर पालिकाध्यक्ष मीनाक्षी अग्रवाल ने अतिथियों को स्मृतिचिह्न दिए। मुशायरे की शुरुआत जमील खैराबादी ने नात पढ़कर की। उन्होंने कहा-
नूर से जब दिल मुनौव्वर हो गया।
गुंबदे खज़रा का मंजर हो गया।।
नासिर जौनपुरी ने कहा-
बात उनकी अब न टाली जाएगी,
दिल की महफिल फिर सजा ली जाएगी।
हैदर अलवी ने कहा-
मेरे ख्वाबों का वो इक इक घरौंदा काट लेता है,
मेरे पैरों में क्यूं मेरा जूता काट लेता है।
हसन काजमी ने कहा-
नीले गगन पर सुनते तो हैं कुदरत रहती है, लेकिन मां के पांव के नीचे जन्नत रहती है।
कानपुर की शाइस्ता सना ने कहा-
बस यही काम करना पड़ता है,
सुबहो को शाम करना पड़ता है।
प्यार करना नहीं कोई आसां,
खुद को बदनाम करना पड़ता है।।
हास्य कवि सुनील कुमार तंग ने कहा-
एक मंजिल के मुसाफिर है यकीनी हम तुम, बस वहीं जाके ठहर जाएंगे जाते-जाते।
ये अलग बात है हम भूख से मर जाएंगे, तुम भी मर जाओगे इस मुल्क को खाते-खाते।।
मंजर भोपाली ने कहा-
हम वो राही हैं लिए फिरते हैं सर पर सूरज, हम कभी पेड़ों से साया नहीं मांगा करते।
बेटियों के भी लिए हाथ उठाओ मंजर, सिर्फ अल्लाह से बेटा नहीं मांगा करते।।
डॉ. नसरत मेंहदी ने कहा -
इश्क में मजनुओं फरहाद नहीं होने के, ये नए लोग हैं बर्बाद नहीं होने के।
सज्जाद झंझट ने कहा-
उसको प्रमोशन मिलेगा जिसके बच्चे तीन हैं, जाते-जाते मंत्री जी यह भरोसा दे गए।
मैने बेगम से पूछा अपने तीनों हैं कहां? बोलीं बेगम जिनके बच्चे थे वो अपने ले गए।
संचालन करते हुए रईस अंसारी ने कहा-
वो जिनके घर में दिया तक नहीं जलाने को, ये चांद सिर्फ उन्हीं के लिए निकलता है।
मयकश अमरोही ने कहा-
मेरी निगाह बदन पर ठहर गई वरना। वो अपनी रूह मेरे नाम करने वाला था।
जौहर कानपुरी ने कहा-
बस्ती के एक बुजुर्ग की मय्ययत को देखकर, मैं अपने बूढ़े बाप से जाकर लिपट गया।
इसके साथ ही मुशायरा संयोजक मधुकर शैदाई, माजिद अली ने भी अपनी शेरो-शायरी से महफिल को रोशन किया। इस मौके पर ब्लाक प्रमुख इफ्तिखार खां, आशीष अवस्थी, इशहाक अली, रफी अहमद, रामनरेश वर्मा, दाताराम गुप्ता एडवोकेट, सूरज प्रसाद वर्मा, प्रहलाद पटेल, शफी आगा, अशोक सक्सेना, हंसराम स्वर्णकार, जुनैद ईराकी, नीरज दीक्षित, चांद आलम, पंकज गुप्ता, जमाल अहमद राईन, राजेश गिरि एडवोकेट, राजेश वाजपेयी, जेई राकेश कुमार, निरेंद्र सिंह धाकड़े, रामजी वर्मा, श्रीशचंद त्रिपाठी, अजय वर्मा, सुमित शुक्ला, श्रेष्ठ रस्तोगी आदि मौजूद रहे।
भ्रमण कर लिया मेले का जायजा
नगर पालिका परिषद अध्यक्ष मीनाक्षी अग्रवाल ने व्यापार मंडल के नगराध्यक्ष कैलाशचंद गुप्त, गोपालकृष्ण शुक्ला, श्रवण माहेश्वरी, अरुण अवस्थी, अनुराग गुप्ता, जितेंद्र गट्टानी, बालकृष्ण बल्लू, दुर्गेश सोनी के साथ मेला भ्रमण कर दुकानदाराें से समस्याएं पूछकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
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चैती मेले में आज
ऐतिहासिक चैती मेले के सांस्कृतिक मंच पर जूनियर वर्ग की गायन प्रतियोगिता रात आठ बजे से।
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नगर पालिकाध्यक्ष मीनाक्षी अग्रवाल ने अतिथियों को स्मृतिचिह्न दिए। मुशायरे की शुरुआत जमील खैराबादी ने नात पढ़कर की। उन्होंने कहा-
नूर से जब दिल मुनौव्वर हो गया।
गुंबदे खज़रा का मंजर हो गया।।
नासिर जौनपुरी ने कहा-
बात उनकी अब न टाली जाएगी,
दिल की महफिल फिर सजा ली जाएगी।
हैदर अलवी ने कहा-
मेरे ख्वाबों का वो इक इक घरौंदा काट लेता है,
मेरे पैरों में क्यूं मेरा जूता काट लेता है।
हसन काजमी ने कहा-
नीले गगन पर सुनते तो हैं कुदरत रहती है, लेकिन मां के पांव के नीचे जन्नत रहती है।
कानपुर की शाइस्ता सना ने कहा-
बस यही काम करना पड़ता है,
सुबहो को शाम करना पड़ता है।
प्यार करना नहीं कोई आसां,
खुद को बदनाम करना पड़ता है।।
हास्य कवि सुनील कुमार तंग ने कहा-
एक मंजिल के मुसाफिर है यकीनी हम तुम, बस वहीं जाके ठहर जाएंगे जाते-जाते।
ये अलग बात है हम भूख से मर जाएंगे, तुम भी मर जाओगे इस मुल्क को खाते-खाते।।
मंजर भोपाली ने कहा-
हम वो राही हैं लिए फिरते हैं सर पर सूरज, हम कभी पेड़ों से साया नहीं मांगा करते।
बेटियों के भी लिए हाथ उठाओ मंजर, सिर्फ अल्लाह से बेटा नहीं मांगा करते।।
डॉ. नसरत मेंहदी ने कहा -
इश्क में मजनुओं फरहाद नहीं होने के, ये नए लोग हैं बर्बाद नहीं होने के।
सज्जाद झंझट ने कहा-
उसको प्रमोशन मिलेगा जिसके बच्चे तीन हैं, जाते-जाते मंत्री जी यह भरोसा दे गए।
मैने बेगम से पूछा अपने तीनों हैं कहां? बोलीं बेगम जिनके बच्चे थे वो अपने ले गए।
संचालन करते हुए रईस अंसारी ने कहा-
वो जिनके घर में दिया तक नहीं जलाने को, ये चांद सिर्फ उन्हीं के लिए निकलता है।
मयकश अमरोही ने कहा-
मेरी निगाह बदन पर ठहर गई वरना। वो अपनी रूह मेरे नाम करने वाला था।
जौहर कानपुरी ने कहा-
बस्ती के एक बुजुर्ग की मय्ययत को देखकर, मैं अपने बूढ़े बाप से जाकर लिपट गया।
इसके साथ ही मुशायरा संयोजक मधुकर शैदाई, माजिद अली ने भी अपनी शेरो-शायरी से महफिल को रोशन किया। इस मौके पर ब्लाक प्रमुख इफ्तिखार खां, आशीष अवस्थी, इशहाक अली, रफी अहमद, रामनरेश वर्मा, दाताराम गुप्ता एडवोकेट, सूरज प्रसाद वर्मा, प्रहलाद पटेल, शफी आगा, अशोक सक्सेना, हंसराम स्वर्णकार, जुनैद ईराकी, नीरज दीक्षित, चांद आलम, पंकज गुप्ता, जमाल अहमद राईन, राजेश गिरि एडवोकेट, राजेश वाजपेयी, जेई राकेश कुमार, निरेंद्र सिंह धाकड़े, रामजी वर्मा, श्रीशचंद त्रिपाठी, अजय वर्मा, सुमित शुक्ला, श्रेष्ठ रस्तोगी आदि मौजूद रहे।
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भ्रमण कर लिया मेले का जायजा
नगर पालिका परिषद अध्यक्ष मीनाक्षी अग्रवाल ने व्यापार मंडल के नगराध्यक्ष कैलाशचंद गुप्त, गोपालकृष्ण शुक्ला, श्रवण माहेश्वरी, अरुण अवस्थी, अनुराग गुप्ता, जितेंद्र गट्टानी, बालकृष्ण बल्लू, दुर्गेश सोनी के साथ मेला भ्रमण कर दुकानदाराें से समस्याएं पूछकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
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चैती मेले में आज
ऐतिहासिक चैती मेले के सांस्कृतिक मंच पर जूनियर वर्ग की गायन प्रतियोगिता रात आठ बजे से।