फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   Para cricketer Vikram's arrest case: Neighbor said - financial condition had improved in five years

पैरा क्रिकेटर विक्रम की गिरफ्तारी का मामला: पड़ोसी बोले- पांच साल में बेहतर हो गई थी माली हालत

Sat, 26 Aug 2023 12:34 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 26 Aug 2023 12:34 AM IST
विज्ञापन
Para cricketer Vikram's arrest case: Neighbor said - financial condition had improved in five years
विक्रम नाग की गिरफ्तारी से परिवार वाले हैरान
विज्ञापन

आठ-दस साल से लखनऊ में रह रहा था विक्रम, घर वाले बोले- उन्हें नहीं हैं कोई जानकारी
संवाद न्यूज़ एजेंसी
धौरहरा। छात्रवृत्ति घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय के शिकंजे में आए लखीमपुर के धौरहरा निवासी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर विक्रम नाग की गिरफ्तारी पर परिवार और क्षेत्र के लोग सकते में हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि पिछले पांच साल में अचानक विक्रम के घर की स्थिति अच्छी हो गई।पहले इनकी माली हालत ठीक नहीं थी।
मूलरूप से धौरहरा नगर पंचायत के मोहल्ला बाजार वार्ड/सर्वोदय नगर निवासी विक्रम नाग हाथ की उंगलियों से विकलांग है। बचपन से क्रिकेट की तरफ रुझान के कारण यूपी क्रिकेट टीम की कमान संभाल चुके विक्रम ने कई मैचों में देश का प्रतिनिधित्व किया है। पिता अवधराम नाग कोतवाली में चौकीदार थे, जिनकी तीन साल पहले कोरोना से मौत हो चुकी है।
विज्ञापन

कुल तीन भाई व एक बहन में सबसे बड़े विक्रम नाग दस साल से लखनऊ में रह रहा था। शुक्रवार को उसकी गिरफ्तारी का खबर आम होने पर कस्बे में चर्चाओं का बाजार गर्म है।
विज्ञापन
विज्ञापन


पक्का मकान बन गया, हर साल बदल जाती है गाड़ी
विक्रम नाग की गिरफ्तारी के बाद परिवार वालों ने बताया कि उन्हें कुछ नहीं पता कि कैसे क्या हुआ। शुक्रवार को अखबार में खबर छपी तो जानकारी हुई। नाम न छापने की शर्त पर विक्रम नाग के रिश्तेदार ने बताया कि विक्रम आठ दस साल से लखनऊ में रह रहा है। यहां भी आता जाता था, लेकिन आज यह दिन देखना पड़ेगा, इसका बिलकुल इल्म नहीं था। कहा कि कुछ पता ही नहीं लग पा रहा है कि क्या हुआ। दबी जुबान में पड़ोसियों ने बताया कि विक्रम नाग की माली हालत पहले अच्छी नहीं थी, लेकिन पिछले पांच सालों में हालात बदल गए। टूटे-फूटे कच्चे घर की जगह अब पक्का मकान बन गया है। हर साल गाड़ी बदल जाती है। दबी जुबान में लोग बताते हैं कि लखनऊ में विक्रम नाग किसी गिरोह के संपर्क में आ गया था, जिससे साल दर साल उसकी कमाई बढ़ती गई और माली हालत बदलती गई।



समाज कल्याण विभाग बोला, विक्रम का यहां से लेना-देना नहीं

दिव्यांग छात्रवृत्ति घोटाले में समाज कल्याण अधिकारी सुधांशु शेखर ने बताया कि इस कार्रवाई का खीरी से लेना-देना नहीं है। वह लखनऊ में पढ़ता था, जहां पर हाजिया संस्थान में हुए गड़बड़ी की जांच में उसका नाम आया है। पता चला है कि हाजिया में ही उसने पढ़ाई की थी, जहां से वह किसी मामले में ईडी ने गिरफ्तारी की है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed