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आबादी में दहशत बनकर घूम रहा बाघ
ब्यूरो बांकेगंज।
Updated Tue, 19 Apr 2016 10:52 PM IST
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आबादी क्षेत्र में बाघ दहशत बनकर घूम रहा
- फोटो : अमर उजाला
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बच्चों ने स्कूल जाना छोड़ा, किसानों ने खेत-खलिहान, घरों में कैद हुए लोग
दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मैलानी और भीरा रेंज जंगल से सटी आबादी क्षेत्र में बाघ दहशत बनकर घूम रहा है। भयभीत बच्चे स्कूल जाने से कतरा रहे हैं तो किसानों ने खेतों और खलिहानों में जाना छोड़ दिया है।
बता दें कि पिछले तीन माह से दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मैलानी और भीरा रेंज से कुछ बाघ जंगल से निकलकर आबादी के इर्द-गिर्द चक्कर लगा रहे हैं। आमतौर पर सर्दियों में जांगल से बाहर निकलने वाले बाघों के गर्मी में यहां डेरा जमाने से वन विभाग के अधिकारी और वन्यजीव विशेषज्ञ भी हैरान हैं। इसी इलाके में बाघ तीन महीने में तीन लोगों को निवाला बना चुके हैं। एक बाघ ने तो सोहनरा भूड़ आबादी के पास खेतों में अपना स्थाई डेरा बना लिया है। इससे किसान गेहूं कटाई करने के लिए भी खेतों में जाने और बच्चों को स्कूल भेजने से डर रहे है। दूसरे बाघ ने बरौंछा को अपना ठिकाना बनाया है। इन तीन माह के दौरान इंसानों पर बाघों के बढ़ते हमलों से लोगों मे दहशत के साथ वन विभाग के प्रति गुस्सा भी है। बाघ के ताबड़तोड़ हमलों से हुई मौतों के गम को लोग अभी भुला भी नहीं पाए थे कि सोमवार को पलिया इलाके के दक्षिणी सोनरीपुर रेंज में बाघिन के हमले में 50 वर्षीय अधेड़ किसान की हुई मौत से ग्रामीणों में दहशत व्याप्त है। उधर इस बाबत रेंजर मैलानी डीएस यादव ने बताया कि वन कर्मियों की टीम गठित कर बाघों की 24 घंटे लगातार निगरानी कराई जा रही है। रेंजर ने ग्रामीणों से सतर्कता बरतने की अपील की है।
आने से घबराते हैं मेहमान
मैलानी रेंज जंगल से सटी आबादी में इन दिनों वैवाहिक और मांगलिक उत्सवों में मेहमान भी आने से घबराते हैं। जंगल से सटे गांवों ढाका, हरदुआ, पूरनपुर, सोहनराभूड़, बूधरपुर, पहाड़नगर, ग्रंट नंबर तीन, महोलिया, खंजनपुर, जटपुरा आदि के ग्रामीणों ने बताया कि बाघों के आतंक से गांव में हो रहे मांगलिक समारोहों में नाते-रिश्तेदारों के अलावा लाइट, टेंट, बैंडबाजा व्यवसाई और हलवाई भी आने से कतराते हैं।
दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मैलानी और भीरा रेंज जंगल से सटी आबादी क्षेत्र में बाघ दहशत बनकर घूम रहा है। भयभीत बच्चे स्कूल जाने से कतरा रहे हैं तो किसानों ने खेतों और खलिहानों में जाना छोड़ दिया है।
बता दें कि पिछले तीन माह से दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मैलानी और भीरा रेंज से कुछ बाघ जंगल से निकलकर आबादी के इर्द-गिर्द चक्कर लगा रहे हैं। आमतौर पर सर्दियों में जांगल से बाहर निकलने वाले बाघों के गर्मी में यहां डेरा जमाने से वन विभाग के अधिकारी और वन्यजीव विशेषज्ञ भी हैरान हैं। इसी इलाके में बाघ तीन महीने में तीन लोगों को निवाला बना चुके हैं। एक बाघ ने तो सोहनरा भूड़ आबादी के पास खेतों में अपना स्थाई डेरा बना लिया है। इससे किसान गेहूं कटाई करने के लिए भी खेतों में जाने और बच्चों को स्कूल भेजने से डर रहे है। दूसरे बाघ ने बरौंछा को अपना ठिकाना बनाया है। इन तीन माह के दौरान इंसानों पर बाघों के बढ़ते हमलों से लोगों मे दहशत के साथ वन विभाग के प्रति गुस्सा भी है। बाघ के ताबड़तोड़ हमलों से हुई मौतों के गम को लोग अभी भुला भी नहीं पाए थे कि सोमवार को पलिया इलाके के दक्षिणी सोनरीपुर रेंज में बाघिन के हमले में 50 वर्षीय अधेड़ किसान की हुई मौत से ग्रामीणों में दहशत व्याप्त है। उधर इस बाबत रेंजर मैलानी डीएस यादव ने बताया कि वन कर्मियों की टीम गठित कर बाघों की 24 घंटे लगातार निगरानी कराई जा रही है। रेंजर ने ग्रामीणों से सतर्कता बरतने की अपील की है।
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आने से घबराते हैं मेहमान
मैलानी रेंज जंगल से सटी आबादी में इन दिनों वैवाहिक और मांगलिक उत्सवों में मेहमान भी आने से घबराते हैं। जंगल से सटे गांवों ढाका, हरदुआ, पूरनपुर, सोहनराभूड़, बूधरपुर, पहाड़नगर, ग्रंट नंबर तीन, महोलिया, खंजनपुर, जटपुरा आदि के ग्रामीणों ने बताया कि बाघों के आतंक से गांव में हो रहे मांगलिक समारोहों में नाते-रिश्तेदारों के अलावा लाइट, टेंट, बैंडबाजा व्यवसाई और हलवाई भी आने से कतराते हैं।
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