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पचपेड़ी घाट पुल: सिर्फ चुनावी मुद्दा ही बन कर रह गया

Wed, 09 Feb 2022 12:27 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 09 Feb 2022 12:27 AM IST
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Pachpedi Ghat Bridge: Remained just an election issue
पचपेड़ी घाट पर बना पीपों का पुल - फोटो : LAKHIMPUR
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पचपेड़ी घाट पुल:
सिर्फ चुनावी मुद्दा बन कर रह गया
- पचेपड़ी घाट शारदा नदी पर बने पुल तो आसान हो तरक्की की राह
- कम हो जाएगी नेपाल सीमा तक की दूरी, व्यापारिक विकास के खुलेंगे रास्ते
केके मौर्या
निघासन। लोकसभा चुनाव हो या विधानसभा का, शारदा नदी पर पचपेड़ी घाट पुल बनने का मुद्दा हर बार प्रमुखता से उठता है, आज तक यह पुल नहीं बन सका है। पचपेड़ी घाट पुल का मुद्दा सिर्फ चुनवी मुद्दा बनकर बन कर रह गया है। इस विधानसभा चुनाव में तो किसी राजनीतिक दल या उम्मीदवार ने इसे अपने एजेंडे में भी शामिल नहीं किया है। मतदाताओं का कहना है कि जो पचपेड़ी पुल बनवाने का ठोस वादा करेगा, वह उसे ही ही चुनेंगे।
पचपेड़ी घाट पुल समूचे निघासन विधानसभा क्षेत्र की तरक्की, औद्योगिक और व्यापारिक विकास से जुड़ा हुआ है। पुल न बन पाने से इस क्षेत्र का विकास बाधित है। पचपेड़ी घाट होते हुए लखीमपुर से निघासन की दूरी महज 34 किलोमीटर है। पुल न होने से निघासन, सिंगाही, बेलरायां, तिकुनिया और नेपाल सीमा तक पहुंचने के लिए 21 किलोमीटर का सफर ज्यादा तय करना पड़ता है। जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है। पुल न होने से श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र के सैदापुर फूलबेहड़, गूम, मीलपुरवा आदि गांव के लोगों को आवागमन की समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। पुल बनने से यहां के लोगों को बस सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी। इस तरह इस पुल से न केवल निघासन विधानसभा क्षेत्र, बल्कि श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र को फायदा मिलेगा।
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भारत-नेपाल सीमा पर बसे निघासन तहसील क्षेत्र को सुरक्षा की दृष्टि से अतिसंवेदन शील माना जाता है। इस पुल के निर्माण से जिला मुख्यालय सीधे नेपाल से जुड़ जाएगा। करीब 20 साल पहले पुल निर्माण के लिए मिट्टी की जांच कराई गई थी, वर्ड बैंक की टीम ने सर्वे करके इस्टीमेट भी बनाया था। इसके बाद टेंडर भी जारी हुआ। फिर पुल की यह फाइल ठंडे बस्ते में चली गई। करीब छह साल पहले एक बार फिर इसकी मिट्टी की जांच होने के अलावा पुल का नक्शा बनाया और वर्ड बैंक की टीम ने सर्वे भी किया। नौ किलोमीटर लंबा पुल बनने का प्रस्ताव बना, लेकिन जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण पुल निर्माण फिर अधर में लटक गया। (संवाद)
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पुल बनने से क्षेत्र को मिलेगी बाढ़ से निजात
पुल बनने के साथ ही नदी के दोनों किनारों पर तटबंध भी बनेगा। इससे बाढ़ और कटान पर नियंत्रण होगा। इससे किसान एक बार फिर खुशहाल होंगे। जिला मुख्यालय से निघासन की दूरी महज 35 किलोमीटर रह जाएगी। करोड़ों की वन संपदा का विनाश रुकेगा। निघासन के साथ श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र के विकास की गति मिलेगी। भारत नेपाल सीमा की सुरक्षा आसान होगी।

क्या कहते हैं मतदाता
गौरिया गांव निवासी अतुल शुक्ला का कहना है कि इंतजार की भी कोई हद होती है। अब वोट उसी को देंगे जो पचेपड़ी घाट पर पुल बनवाने का पक्का वादा करेगा। सिंगाही के लतीफ अहमद का कहना है कि पचपेड़ी घाट का पुल समूचे निघासन विधानसभा क्षेत्र के विकास से जुड़ा मुद्दा है। इसे बनना ही चाहिए। निघासन के पंकज मौर्या का कहना है कि पुल न बनने से क्षेत्र का औद्योगिक और व्यापारिक विकास नहीं हो पा रहा है। तिकुनिया के विनय गुप्ता कहते हैं कि इस बार उम्मीदवारों से न केवल पुल निर्माण का वादा लेंगे, बल्कि हर साल उनसे पूछेंगे कि वह पुल निर्माण के लिए क्या प्रयास कर रहे हैं। यदि फिर भी भूल जाते हैं तो आगे याद दिलाएंगे।
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