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देवदूत बने जय सिंह...मुफ्त में बांट रहे हैं ऑक्सीजन सिलिंडर
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जयसिंह चौहान
- फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। अपनों को खोने का दर्द क्या होता है, यह कोई जय सिंह से पूछे, जो ऑक्सीजन की वजह से भतीजे को खोने के बाद अब बेहद नाजुक दौर में जरूरतमंदों को जिंदगी की सांसें बांट रहे हैं। जय सिंह महज दो दिन में ऑक्सीजन के 150 सिलिंडर मुफ्त में बांट चुके हैं।
ऐसे वक्त में जब कोरोना संक्रमितों के नए मामले हर दिन नए रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं, और स्वास्थ्य सिस्टम खुद वेंटीलेटर पर आ गया है। चारों तरफ ऑक्सीजन को लेकर मारामारी है। लोग अपनों को बचाने के लिए एक अदद ऑक्सीजन का सिलिंडर पाने के लिए हर छोटे-बड़े से अनुनय विनय कर रहे हैं। शारदानगर क्षेत्र के गदाईपुर निवासी जय सिंह लोगों की सांसों की डोर जोड़ रहे हैं।
लखीमपुर में मेडिकल स्टोर चलाने वाले जय सिंह बताते हैं कि 23 अप्रैल को उनके भतीजे मनोज सिंह (38) पुत्र मितलेश सिंह की तबीयत खराब हुई थी। जब उसका ऑक्सीजन लेवल कम होने लगा तो उसे लेकर जिला अस्पताल गए, यहां ऑक्सीजन नहीं थी। यहां जितने अस्पताल हैं, सभी जगह गए पर ऑक्सीजन का टोटा ही मिला। 24 अप्रैल की शाम को पांच बजे शिखर अस्पताल पहुंचे। वहां भी बता दिया गया कि ऑक्सीजन नहीं है। जय सिंह बताते हैं कि शिखर अस्पताल की तो यह हालत थी कि वहां सिर्फ दो कंपाउंडर थे और मरीजों को देखने वाला कोई नहीं था। इधर, भतीजे की हालत गंभीर होने लगी। जय सिंह ने बताया, जब हर अस्पताल में न सुनने को मिला और अपने स्तर से ऑक्सीजन की व्यवस्था करने के लिए कहा गया तो उन्होंने उत्तराखंड के रुद्रपुर में रहने वाले मित्र जगदीप सिंह भाटी से संपर्क किया। उसका रुद्रपुर में ऑक्सीजन प्लांट है। उसने तुरंत मदद की और 50 सिलिंडर की गाड़ी भेजने की हामी भर दी, पर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। सिलिंडर यहां पहुंचते इससे पहले 25 अप्रैल को सुबह आठ बजे उनके भतीजे मनोज सिंह की ऑक्सीजन न मिलने से मौत हो गई।
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सुबह आठ बजे भतीजे की मौत हुई, 10 बजे पहुंचे ऑक्सीजन सिलिंडर
जय सिंह बताते हैं, कि सुबह आठ बजे भतीजे की मौत हुई, इधर दस बजे आक्सीजन सिलिंडर लेकर गाड़ी यहां पहुंची। जब ऑक्सीजन सिलिंडर पहुंचे तब तक सब कुछ खत्म हो चुका था। परिवार वाले बुरी तरह टूट चुके थे। कहा-अगर समय से ऑक्सीजन मिल जाती तो भतीजे की जान बच जाती। ऐसे में उन्होंने उसी क्षण रुद्रपुर से आए सिलिंडरों को जरूरतमंदों में बांटने का निर्णय लिया। बताते हैं कि एमएलसी शशांक यादव ने भी इसमें सहयोग किया।
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खाली सिलिंडर लाओ, भरवा कर ले जाओ
जय सिंह बताते हैं कि मरीजों का बुरा हाल देखकर वह यहीं नहीं रुके। मित्र जगदीप सिंह भाटी से और सहयोग करने के लिए कहा। रविवार सुबह 50 सिलिंडर मिले थे, शाम को 20 सिलिंडर और आ गए। जय सिंह बताते हैं कि सोमवार को फिर 80 सिलिंडर आए हैं, वह अब तक लखनऊ, बहराइच के अलावा पूरे जनपद में करीब 150 लोगों को मुफ्त में सिलिंडर बांट चुके हैं।
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जिस सरकारी सिस्टम की वजह से गई भतीजे की जान, उसको भी दी मदद
जय सिंह बताते हैं कि जिस सरकारी सिस्टम की लापरवाही से उनके भतीजे की जान गई, उस सिस्टम को भी वह मदद पहुंचाने में लगे हैं। वह बताते हैं कि सीएमओ कार्यालय से भी 25 खाली सिलिंडर दिए गए हैं, जिन्हें भरवाकर वह सीएमओ दफ्तर को सौंप देंगे। वह बताते हैं कि कोई भी उन्हें 6306191917 नंबर पर फोन कर खाली सिलिंडर दे सकता है, जिसको मुफ्त में भरवाकर वह मुहैया करवा देंगे। संवाद
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जैसी परेशानी हमने देखी, वैसी कोई और न देखे, बस यही दुआ है। अगर हर मोहल्ले से ऐसे लोग निकलकर सामने आ जाएं, तो अपने शहर की समस्या दूर हो जाए। हमें जितने खाली सिलिंडर मिल जाएंगे, हम उतने भरवाकर वापस कर देंगे।
-जय सिंह, मेडिकल स्टोर स्वामी
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जय सिंह और उनकी टीम ने सार्थक पहल शुरू की है, हम सब लोग जुटे हैं। जो सहयोग बन पड़ रहा है कर रहे हैं। हम चाहते हैं और भी नौजवान आगे आएं।
-शशांक यादव, एमएलसी
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ऐसे वक्त में जब कोरोना संक्रमितों के नए मामले हर दिन नए रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं, और स्वास्थ्य सिस्टम खुद वेंटीलेटर पर आ गया है। चारों तरफ ऑक्सीजन को लेकर मारामारी है। लोग अपनों को बचाने के लिए एक अदद ऑक्सीजन का सिलिंडर पाने के लिए हर छोटे-बड़े से अनुनय विनय कर रहे हैं। शारदानगर क्षेत्र के गदाईपुर निवासी जय सिंह लोगों की सांसों की डोर जोड़ रहे हैं।
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लखीमपुर में मेडिकल स्टोर चलाने वाले जय सिंह बताते हैं कि 23 अप्रैल को उनके भतीजे मनोज सिंह (38) पुत्र मितलेश सिंह की तबीयत खराब हुई थी। जब उसका ऑक्सीजन लेवल कम होने लगा तो उसे लेकर जिला अस्पताल गए, यहां ऑक्सीजन नहीं थी। यहां जितने अस्पताल हैं, सभी जगह गए पर ऑक्सीजन का टोटा ही मिला। 24 अप्रैल की शाम को पांच बजे शिखर अस्पताल पहुंचे। वहां भी बता दिया गया कि ऑक्सीजन नहीं है। जय सिंह बताते हैं कि शिखर अस्पताल की तो यह हालत थी कि वहां सिर्फ दो कंपाउंडर थे और मरीजों को देखने वाला कोई नहीं था। इधर, भतीजे की हालत गंभीर होने लगी। जय सिंह ने बताया, जब हर अस्पताल में न सुनने को मिला और अपने स्तर से ऑक्सीजन की व्यवस्था करने के लिए कहा गया तो उन्होंने उत्तराखंड के रुद्रपुर में रहने वाले मित्र जगदीप सिंह भाटी से संपर्क किया। उसका रुद्रपुर में ऑक्सीजन प्लांट है। उसने तुरंत मदद की और 50 सिलिंडर की गाड़ी भेजने की हामी भर दी, पर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। सिलिंडर यहां पहुंचते इससे पहले 25 अप्रैल को सुबह आठ बजे उनके भतीजे मनोज सिंह की ऑक्सीजन न मिलने से मौत हो गई।
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सुबह आठ बजे भतीजे की मौत हुई, 10 बजे पहुंचे ऑक्सीजन सिलिंडर
जय सिंह बताते हैं, कि सुबह आठ बजे भतीजे की मौत हुई, इधर दस बजे आक्सीजन सिलिंडर लेकर गाड़ी यहां पहुंची। जब ऑक्सीजन सिलिंडर पहुंचे तब तक सब कुछ खत्म हो चुका था। परिवार वाले बुरी तरह टूट चुके थे। कहा-अगर समय से ऑक्सीजन मिल जाती तो भतीजे की जान बच जाती। ऐसे में उन्होंने उसी क्षण रुद्रपुर से आए सिलिंडरों को जरूरतमंदों में बांटने का निर्णय लिया। बताते हैं कि एमएलसी शशांक यादव ने भी इसमें सहयोग किया।
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खाली सिलिंडर लाओ, भरवा कर ले जाओ
जय सिंह बताते हैं कि मरीजों का बुरा हाल देखकर वह यहीं नहीं रुके। मित्र जगदीप सिंह भाटी से और सहयोग करने के लिए कहा। रविवार सुबह 50 सिलिंडर मिले थे, शाम को 20 सिलिंडर और आ गए। जय सिंह बताते हैं कि सोमवार को फिर 80 सिलिंडर आए हैं, वह अब तक लखनऊ, बहराइच के अलावा पूरे जनपद में करीब 150 लोगों को मुफ्त में सिलिंडर बांट चुके हैं।
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जिस सरकारी सिस्टम की वजह से गई भतीजे की जान, उसको भी दी मदद
जय सिंह बताते हैं कि जिस सरकारी सिस्टम की लापरवाही से उनके भतीजे की जान गई, उस सिस्टम को भी वह मदद पहुंचाने में लगे हैं। वह बताते हैं कि सीएमओ कार्यालय से भी 25 खाली सिलिंडर दिए गए हैं, जिन्हें भरवाकर वह सीएमओ दफ्तर को सौंप देंगे। वह बताते हैं कि कोई भी उन्हें 6306191917 नंबर पर फोन कर खाली सिलिंडर दे सकता है, जिसको मुफ्त में भरवाकर वह मुहैया करवा देंगे। संवाद
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जैसी परेशानी हमने देखी, वैसी कोई और न देखे, बस यही दुआ है। अगर हर मोहल्ले से ऐसे लोग निकलकर सामने आ जाएं, तो अपने शहर की समस्या दूर हो जाए। हमें जितने खाली सिलिंडर मिल जाएंगे, हम उतने भरवाकर वापस कर देंगे।
-जय सिंह, मेडिकल स्टोर स्वामी
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जय सिंह और उनकी टीम ने सार्थक पहल शुरू की है, हम सब लोग जुटे हैं। जो सहयोग बन पड़ रहा है कर रहे हैं। हम चाहते हैं और भी नौजवान आगे आएं।
-शशांक यादव, एमएलसी