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Lakhimpur Kheri News: निमोनिया से एक बच्चे की मौत, दूसरा लखनऊ के लिए रेफर

Thu, 13 Apr 2023 12:25 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 13 Apr 2023 12:25 AM IST
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One child died of pneumonia, another referred to Lucknow
चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती बच्चे
ओयल। तेजी से बदलते मौसम की वजह से तापमान का उतार-चढ़ाव बच्चों के लिए मुसीबत बन गया है। मौसम की मार से सबसे ज्यादा बच्चे प्रभावित हो रहे हैं। बुधवार सुबह जिला अस्पताल में भर्ती निमोनिया पीड़ित तीन माह के बच्चे की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि एक बच्चे की हालत नाजुक होने के कारण उसे मेडिकल कॉलेज लखनऊ रेफर कर दिया गया। डॉक्टर बच्चों को गीलेपन से बचाने और टीकाकरण जरूर कराने की सलाह दे रहे हैं। हालांकि, वैक्सीन नाकाफी साबित हो रही है।
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इस समय चिल्ड्रेन वार्ड में 12 बच्चों का इलाज चल रहा है। चिल्ड्रन वार्ड में निमोनिया पीड़ित तीन माह के अरशद पुत्र सिराज, दो साल की सोनिया पुत्री प्रेमू, 12 माह की आरुषि पुत्री नील कुमार, छह माह के देवेंद्र पुत्र समीर, ढ़ाई वर्षीय रिषभ पुत्र रोहित, नौ माह की कंचन पुत्री आशाराम को भर्ती कर इलाज चल रहा है। साथ ही डायरिया एवं बुखार पीड़ित आठ साल की सियरा देवी पुत्री दिनेश, 11 वर्षीय अंकुल सिंह पुत्र धीरेंद्र कुमार, सात वर्षीय उमा देवी पुत्री अमित कुमार, नौ साल की आरूही पुत्री संतोष कुमार, तीन वर्षीय अभय पुत्र दिलीप कुमार, नौ माह की कंचन पुत्री आशाराम और छह वर्षीय सोनम पुत्री तीरथ को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है।
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वार्ड स्टाफ ने बताया कि तीन माह के अरशद को परिजन मंगलवार रात लेकर आए थे। हालत गंभीर होने पर वार्ड में भर्ती कर इलाज शुरू किया मगर बुधवार सुबह उसकी मौत हो गई। वहीं चार वर्षीय अनुभव पुत्र पवन कुमार की हालत में सुधार न होने पर बाल रोग विशेषज्ञ ने उसे मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया है। जबकि अन्य सभी का चिल्ड्रन एवं आईसीयू वार्ड में इलाज चल रहा है। इमरजेंसी ओपीडी स्टाफ का कहना है कि बच्चा बेहद सीरियस हालत में आया था। जिसे तुरंत भर्ती कराकर इलाज शुरू कर दिया है। मगर, सुबह उसकी मौत हो गई।
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इम्युनिटी कमजोर होने के कारण बच्चे आ रहे चपेट में
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरपी वर्मा बताते हैं कि पांच साल तक बच्चों की विशेष देखरेख करने की जरूरत है। क्योंकि इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता अत्यंत कमजोर होती है। इसलिए इनके बीमार होने की संभावना ज्यादा रहती है। वैसे निमोनिया सांस से जुड़ी बीमारी है। इसलिए बच्चों को सर्दी से बचाना चाहिए। भले ही गर्मी का मौसम का हो, लेकिन ज्यादा देर तक गीले में रहने से बच्चे इसकी चपेट में आ जाते हैं। इसलिए बच्चों के पोषण पर ध्यान रखकर छह माह तक माताएं सिर्फ स्तनपान कराएं। अधिक उम्र के बच्चों को मौसमी फल व हरी सब्जियों आदि का भरपूर सेवन कराएं।

लक्षण- कंपकंपी के साथ बुखार आना, बेचैनी व उल्टी-दस्त होना और सांस लेने में दिक्कत होने के साथ आवाज आना, गाढ़े भूरे रंग के बलगम के साथ खांसी, भूख न लगना, कमजोरी, होंठ में नीलापन।

वैक्सीन की कमी बन रही बच्चों के लिए मुसीबत
एसीएमओ डॉ. अनिल कुमार गुप्ता बताते हैं कि निमोनिया बैक्टीरिया, वायरस या फंगस से फेफड़ों में होता है। इससे इनमें सूजन आ जाती है, जिससे सांस लेने में दिक्कत होती है। खासकर ठंड में निमोनिया होने का खतरा ज्यादा रहता है। इसलिए इन दिनों में लापरवाही बच्चों के लिए जानलेवा बन सकता है। इसलिए सावधानी बरतने के साथ टीकाकरण जरूर कराएं।
निमोनिया से बचाने के लिए बच्चों को पीसीबी या न्यूमोकोकल कन्जुगेट वैक्सीन का टीका दो, चार, छह, 12 एवं 15 माह पर जरूर लगवाएं। टीकाकरण बच्चे को निमोनिया से ही नहीं, बल्कि सेप्टिसीमिया, मैनिनजाइटिस एवं दिमागी बुखार से भी सुरक्षित रखने में मददगार है।

मगर, जिले में निमोनिया की वैक्सीन न मिलने से बच्चों की जान के साथ खिलवाड़ हो रहा है। विभागीय लोग बताते हैं कि स्टेट से पिछली बार मात्र 50 वायल मिली थी। इतने में सभी बच्चों का टीकाकरण हो पाना संभव नहीं है। हालांकि वैक्सीन के लिए निरंतर पत्राचार जारी है।

चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती बच्चे

चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती बच्चे

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