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भोजपुरी नृत्य और गीतों पर रात भर झूमते रहे दर्शक
लखीमपुर खीरी
Updated Mon, 02 Nov 2015 07:30 PM IST
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दशहरा मेला का सांस्कृतिक मंच भोजपुरी संस्कृति की मिठास से सराबोर हो उठा। नगर पालिका परिषद के सौजन्य से हो रहे सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शृंखला में भोजपुरी संगीत सम्मेलन हुआ। इसमें अंगद अकेला, रिया बालिया और अवधेश ने अपने गीतों और नृत्य से समा बांध दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ सपा जिलाध्यक्ष अनुराग पटेल और दशहरा मेला में भोजपुरी सम्मेलन की शुरुआत कराने वाले प्रीतम सिंह बग्गा ने दीप जलाकर किया। संचालन लखनऊ से आए डॉ. अशोक सिंह गौतम ने किया।
अंगद अकेला ने देवी गीत मेला लगल बा मइया के दुअरिया में, लखीमपुर नगरिया में गाकर कार्यक्रम की शुरुआत की। रिया बालिया ने भी मैया खो गया मेरा दिल ऊंचे पहाड़ों में देवी गीत पेश किया। बालेश्वर के बेटे अवधेश ने गीत पेश किया माता पिता की करा सेवा, साथी जरूर मिलिहै मेवा। जूही सिंह ने रेलिया बैरन पिया को लिए जाए रे, पटना से वैदा बुलाइ दा और हाथ में मेंहदी मांग से दुरवा, बरबाद कजरवा होइ गइला। गाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
वंदना का गीत तू रतिया कहां बितउला ना तथा नृत्य जब से प्यार किया है प्यार किया है तुमसे जान के हमरे लाले पड़िगे, गोरे से हम काले पड़िगे। नृत्यांगना ममता ने एक राधा एक मीरा तथा मुझे नौ लखा मंगा दे ओ सैंया दीवाने, गीत सुनाए साथ ही लगाइ दे चोलिया के हुक राजा जी गीत पर नृत्य प्रस्तुत किया। अवधेश के गीत दारू बदनाम नशे में सारी दुनिया। कजरवा रे सइयां बड़ा नीक लागे तथा हम कोयलरिया मा जाइब रे, ललमुनिया के माई। स्वाती के गीत ओ तिवारी बाबा और रिया बालिया का गीत ननदी से हो गई लड़ाई बलम, कजरौटा के पीछे श्रोताओं ने खूब सराहे।
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इस मौके पर अधिशासी अधिकारी अवनींद्र कुमार, मेला अध्यक्ष संदीप सिंह, मेला अधिकारी जितेंद्र सिंह ने अतिथियों को शाल ओढ़ाकर और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में अनिल शुक्ला, संजय गुप्ता कन्हैया, आर्येंद्र पाल सिंह, कमल पांडेय, प्रसून टंडन, राशिद पठान, उत्तम वर्मा, मनमोहन मौर्य, रमेश चंद्र मिश्र, राज किशोर पांडेय प्रहरी आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
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अंगद अकेला ने देवी गीत मेला लगल बा मइया के दुअरिया में, लखीमपुर नगरिया में गाकर कार्यक्रम की शुरुआत की। रिया बालिया ने भी मैया खो गया मेरा दिल ऊंचे पहाड़ों में देवी गीत पेश किया। बालेश्वर के बेटे अवधेश ने गीत पेश किया माता पिता की करा सेवा, साथी जरूर मिलिहै मेवा। जूही सिंह ने रेलिया बैरन पिया को लिए जाए रे, पटना से वैदा बुलाइ दा और हाथ में मेंहदी मांग से दुरवा, बरबाद कजरवा होइ गइला। गाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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वंदना का गीत तू रतिया कहां बितउला ना तथा नृत्य जब से प्यार किया है प्यार किया है तुमसे जान के हमरे लाले पड़िगे, गोरे से हम काले पड़िगे। नृत्यांगना ममता ने एक राधा एक मीरा तथा मुझे नौ लखा मंगा दे ओ सैंया दीवाने, गीत सुनाए साथ ही लगाइ दे चोलिया के हुक राजा जी गीत पर नृत्य प्रस्तुत किया। अवधेश के गीत दारू बदनाम नशे में सारी दुनिया। कजरवा रे सइयां बड़ा नीक लागे तथा हम कोयलरिया मा जाइब रे, ललमुनिया के माई। स्वाती के गीत ओ तिवारी बाबा और रिया बालिया का गीत ननदी से हो गई लड़ाई बलम, कजरौटा के पीछे श्रोताओं ने खूब सराहे।
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इस मौके पर अधिशासी अधिकारी अवनींद्र कुमार, मेला अध्यक्ष संदीप सिंह, मेला अधिकारी जितेंद्र सिंह ने अतिथियों को शाल ओढ़ाकर और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में अनिल शुक्ला, संजय गुप्ता कन्हैया, आर्येंद्र पाल सिंह, कमल पांडेय, प्रसून टंडन, राशिद पठान, उत्तम वर्मा, मनमोहन मौर्य, रमेश चंद्र मिश्र, राज किशोर पांडेय प्रहरी आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।