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सरकारी वाहन से दुधवा में पर्यटन शुरू
पलियाकलां।
Updated Sat, 30 Jan 2016 07:53 PM IST
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फिटनेस न होने और तीन जिप्सी जब्त किए जाने के बाद जिप्सी चालकों का आंदोलन तीसरे दिन भी जारी रहा। दोपहर में उपनिदेशक ने आंदोलन में लगे जिप्सी चालकों और गाइडों से बात की लेकिन वह नहीं माने तो सैलानियों को जंगल का दीदार कराने के लिए शाम को सरकारी वाहन लगा दिए गए। पार्क क्षेत्र में पेट्रोलिंग के लिए लगीं जिप्सी और बोलेरो से सैलानियों को जंगल दिखाया गया। हालांकि सुबह की शिफ्ट में सैलानियों को मायूस होकर लौटना पड़ा था।
जिप्सी चालकों, गाइडों के कार्य बहिष्कार के चलते दुधवा का पर्यटन अघोषित रूप से बंद था। इसके चलते सैलानी मायूस होकर लौट हो रहे थे। शनिवार दोपहर उप निदेशक एवं कंजर्वेटर आफ फारेस्ट पीपी सिंह मिलने पहुंचे। आंदोलनकारियों ने उनकी बात नहीं मानी और हड़ताल पर अड़े रहे। आंदोलनकारी आरटीओ के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे ताकि भविष्य में उनका उत्पीड़न न हो। जिप्सी चालकों और गाइडों के बात नहीं मानने पर उप निदेशक ने जंगल के सभी रेंजों को सूचना भेजकर पेट्रोलिंग में लगी जिप्सी और बोलेरो को दुधवा मुख्यालय बुलवाया और शाम की शिफ्ट से सैलानियों को जंगल का दीदार कराने में लगा दिया। अभी 15 सरकारी वाहन पर्यटन के लिए लगे हैं। डीडी ने बताया कि दुधवा की साख नहीं गिरने दी जाएगी। पर्यटन के लिए प्राइवेट रिसार्ट के वाहनों को भी लगाया जाएगा। एक शिफ्ट में करीब एक सौ पर्यटक जंगल भ्रमण कर सकेंगे। पर्यटन ठप नहीं होने दिया जाएगा।
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दैनिक कर्मचारी महासंघ आया गाइड-चालकों के संग
पलिया मुख्यालय पर किया प्रदर्शन, नारेबाजी, बैठक में रणनीति बनाई
पलियाकलां। दुधवा में जिप्सी चालकों और गाइडों की हड़ताल शनिवार को भी जारी रही। उन्होंने मुख्यालय पर सभा कर आगे के आंदोलन की रणनीति बनाई। इसके बाद प्रदर्शन और नारेबाजी से गुस्से का इजहार किया। आंदोलन में दुधवा के दैनिक कर्मचारी संघ ने भी समर्थन देते हुए कार्य बहिष्कार किया। दुधवा के जिप्सी चालक 28 जनवरी से हड़ताल पर हैं। दुधवा जंगल भ्रमण के लिए अपना वाहन ले जाना मना है। यहां केवल दुधवा से ही वाहन जाते हैं। ऐसे में पर्यटन ठप हो गया। सैलानियों को बैरंग लौटना पड़ा।
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शनिवार को भी जिप्सी चालक कार्य बहिष्कार पर रहे। इसके बाद चालक संघ के सदस्य पलिया में दुधवा मुख्यालय पहुंचे और वहां सभा की। सभा में पदाधिकारियों ने कहा कि अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनको नाहक ही परेशान किया जा रहा है और चालकों की मुजरिम की तरह पिटाई की गई। सभा में तमाम जिप्सी चालक, गाइड और दैनिक कर्मचारी संघ के पदाधिकारी शामिल रहे।
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बयान हुए तो चालक ने कहा पीटा भी
मामले में पीसीसीएफ वाइल्ड के चालकों ने शनिवार को बयान दर्ज कराएं। अब चालकों ने अपने बयान में मारपीट किए जाने की बात कही है। जिप्सी चालक शफीक ने बताया कि घटना वाले दिन वह अपनी गाड़ी के साथ दुधवा बैरियर पर था। तभी कई लोग पुलिस के साथ आए और गाड़ी की चाबी मांगने लगे। फिर चाबी छीन ली। एक पुलिस वाले ने मारा भी फिर गाड़ी में बिठाकर बंशीनगर चौकी ले गए और सादे कागज पर अंगूठा लगवा लिया। किशनपुर बैरियर के कर्मचारी सुनील यादव का आरोप है कि डीएम कई गाड़ियों के साथ बैरियर पर पहुंचीं। उसमें से एक गाड़ी से उतरे कुछ लोगों ने चाबी मांगी। जब नियमों का हवाला दिया तो उसको मारा। फिर चाबी छीन कर गेट खोल लिया। दोनों ने अपने बयान पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ के यहां दर्ज कराए हैं।
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फेडरेशन आफ फारेस्ट भी करेगा आंदोलन
फेडरेशन आफ फारेस्ट एसोसिएशन भी आंदोलन में उतर सकता है। इकाई उपाध्यक्ष रामकुमार ने कहा कि हम अभी शांत हैं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई तो हमें भी आंदोलन में आना पड़ेगा। सवाल दुधवा की सुरक्षा का है और वर्दी इसीलिए पहनी है कि दुधवा जंगल पर कोई आंच न आए। उच्चाधिकारियों को पत्र भेज कर कहा गया है कि एक सप्ताह में कार्रवाई नहीं हुई तो वह भी अपने असलहे जमा कर हड़ताल पर चले जाएंगे।
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जानबूझ कर निकाल रहे कमियां
जिप्सी चालकों ने कहा कि उनके सभी प्रपत्र पूरे हैं। जब जानबूझ कर ही कमियां निकालनी है तो हजार कमियां निकाल देगा। कहा, जरा-जरा सी कमियां निकाल कर जिप्सी सीज कर देना शोषण है। चालकों के साथ मारपीट करना उनकी मानसिकता को दर्शाता है।
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जिप्सी चालकों, गाइडों के कार्य बहिष्कार के चलते दुधवा का पर्यटन अघोषित रूप से बंद था। इसके चलते सैलानी मायूस होकर लौट हो रहे थे। शनिवार दोपहर उप निदेशक एवं कंजर्वेटर आफ फारेस्ट पीपी सिंह मिलने पहुंचे। आंदोलनकारियों ने उनकी बात नहीं मानी और हड़ताल पर अड़े रहे। आंदोलनकारी आरटीओ के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे ताकि भविष्य में उनका उत्पीड़न न हो। जिप्सी चालकों और गाइडों के बात नहीं मानने पर उप निदेशक ने जंगल के सभी रेंजों को सूचना भेजकर पेट्रोलिंग में लगी जिप्सी और बोलेरो को दुधवा मुख्यालय बुलवाया और शाम की शिफ्ट से सैलानियों को जंगल का दीदार कराने में लगा दिया। अभी 15 सरकारी वाहन पर्यटन के लिए लगे हैं। डीडी ने बताया कि दुधवा की साख नहीं गिरने दी जाएगी। पर्यटन के लिए प्राइवेट रिसार्ट के वाहनों को भी लगाया जाएगा। एक शिफ्ट में करीब एक सौ पर्यटक जंगल भ्रमण कर सकेंगे। पर्यटन ठप नहीं होने दिया जाएगा।
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दैनिक कर्मचारी महासंघ आया गाइड-चालकों के संग
पलिया मुख्यालय पर किया प्रदर्शन, नारेबाजी, बैठक में रणनीति बनाई
पलियाकलां। दुधवा में जिप्सी चालकों और गाइडों की हड़ताल शनिवार को भी जारी रही। उन्होंने मुख्यालय पर सभा कर आगे के आंदोलन की रणनीति बनाई। इसके बाद प्रदर्शन और नारेबाजी से गुस्से का इजहार किया। आंदोलन में दुधवा के दैनिक कर्मचारी संघ ने भी समर्थन देते हुए कार्य बहिष्कार किया। दुधवा के जिप्सी चालक 28 जनवरी से हड़ताल पर हैं। दुधवा जंगल भ्रमण के लिए अपना वाहन ले जाना मना है। यहां केवल दुधवा से ही वाहन जाते हैं। ऐसे में पर्यटन ठप हो गया। सैलानियों को बैरंग लौटना पड़ा।
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शनिवार को भी जिप्सी चालक कार्य बहिष्कार पर रहे। इसके बाद चालक संघ के सदस्य पलिया में दुधवा मुख्यालय पहुंचे और वहां सभा की। सभा में पदाधिकारियों ने कहा कि अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनको नाहक ही परेशान किया जा रहा है और चालकों की मुजरिम की तरह पिटाई की गई। सभा में तमाम जिप्सी चालक, गाइड और दैनिक कर्मचारी संघ के पदाधिकारी शामिल रहे।
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बयान हुए तो चालक ने कहा पीटा भी
मामले में पीसीसीएफ वाइल्ड के चालकों ने शनिवार को बयान दर्ज कराएं। अब चालकों ने अपने बयान में मारपीट किए जाने की बात कही है। जिप्सी चालक शफीक ने बताया कि घटना वाले दिन वह अपनी गाड़ी के साथ दुधवा बैरियर पर था। तभी कई लोग पुलिस के साथ आए और गाड़ी की चाबी मांगने लगे। फिर चाबी छीन ली। एक पुलिस वाले ने मारा भी फिर गाड़ी में बिठाकर बंशीनगर चौकी ले गए और सादे कागज पर अंगूठा लगवा लिया। किशनपुर बैरियर के कर्मचारी सुनील यादव का आरोप है कि डीएम कई गाड़ियों के साथ बैरियर पर पहुंचीं। उसमें से एक गाड़ी से उतरे कुछ लोगों ने चाबी मांगी। जब नियमों का हवाला दिया तो उसको मारा। फिर चाबी छीन कर गेट खोल लिया। दोनों ने अपने बयान पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ के यहां दर्ज कराए हैं।
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फेडरेशन आफ फारेस्ट भी करेगा आंदोलन
फेडरेशन आफ फारेस्ट एसोसिएशन भी आंदोलन में उतर सकता है। इकाई उपाध्यक्ष रामकुमार ने कहा कि हम अभी शांत हैं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई तो हमें भी आंदोलन में आना पड़ेगा। सवाल दुधवा की सुरक्षा का है और वर्दी इसीलिए पहनी है कि दुधवा जंगल पर कोई आंच न आए। उच्चाधिकारियों को पत्र भेज कर कहा गया है कि एक सप्ताह में कार्रवाई नहीं हुई तो वह भी अपने असलहे जमा कर हड़ताल पर चले जाएंगे।
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जानबूझ कर निकाल रहे कमियां
जिप्सी चालकों ने कहा कि उनके सभी प्रपत्र पूरे हैं। जब जानबूझ कर ही कमियां निकालनी है तो हजार कमियां निकाल देगा। कहा, जरा-जरा सी कमियां निकाल कर जिप्सी सीज कर देना शोषण है। चालकों के साथ मारपीट करना उनकी मानसिकता को दर्शाता है।