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अब तोप से गोले, एके-56 से गोलियां नही बरसेगा रंग
अमर उजाला ब्यूरो, लखीमपुर खीरी।
Updated Mon, 21 Mar 2016 11:46 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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- शहर की गलियों में घूमती नजर आएंगी भूतों की टोलियां
- पगड़ियों, टोपियों और बनावटी बालों से सजा बाजार
इस होली पर तोप, मिसाइलों से गोले और एके-47 और एके-56 से गोलियां नहीं रंग बरसेगा। आतिशबाजी के सामान से फुलझड़ियां नहीं रंगों के फव्वारे छूटेंगे। इस होली पर कुछ अलग ही नजारा दिखेगा। अलग-अलग स्टाइल की पिचकारियों के आकार और नाम भी बड़े विचित्र हैं। तोप, मिसाइल, एके-56 और एके-47 आकार की पिचकारियों को उनके आकार और डिजाइन के अनुरूप ही नाम दिया गया है।
शस्त्रों के नाम और डिजायन वाली पिचकारियों के अलावा बाजार में इलेक्ट्रानिक मीडिया के माइक, जानवरों और पक्षियों जैसे हाथी, ऊंट, कुत्ता, बाघ, बतख, पैरट, आकार की पिचकारियों के साथ-साथ डोरेमन, मोटू-पतलू आदि नाम की आकर्षक पिचकारियों की बाजार में भरमार है। बच्चे इन अजीबोगरीब पिचकारियों को काफी पसंद कर रहे। इलेक्ट्रानिक पिचकारियां महंगी जरूर हैं, लेकिन यह पिचकारियां लोगों की पहली पसंद हैं।
बाजार में पांच रुपये से पांच हजार रुपये मूल्य तक की पिचकारियां उपलब्ध हैं। बाजार में इलेक्ट्रानिक पिचकारियां पांच सौ से पांच हजार रुपये तक में बिक रहीं हैं। मध्यम मूल्य की पिचकारियों की बिक्री सस्ती और महंगी पिचकारियों की अपेक्षा हैं। बाजार में पिचकारियों की खरीदने को बच्चे काफी उत्साहित हैं। सोमवार को पिचकारियों की दुकान पर भारी भीड़ रही।
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बाजार में सड़क किनारे सजी रंग गुलाल की दुकानों पर भी खरीददारों की काफी भीड़-भाड़ रही। इस बार सस्ते और मिलावटी रंगों की अपेक्षा लोग ब्रांडेड रंग और गुलाल को तरजीह दे रहे हैं। पूरा बाजार रंग गुलाल और पिचकारियों से पटा पड़ा है।
शहर की गलियों में नजर आएंगी भूतों की टोलियां
रंग और गुलाल से आंखों और त्वचा को बचाने के लिए बाजार में तरह-तरह के मुखौटे बिक रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा मांग भूतों वाले मुखौटों की है। इस होली पर भूतों के मुखौटों की इतनी बिक्री हो रही है कि होली के दिन शहर की हर गली में भूतों की टोलियां नजर आएंगी। भूत चुडै़लों के अलावा हाथी, बाघ, कुत्ता, सियार और पक्षियों के मुखौटों की भी काफी मांग है।
सिर और बालों से बचाव को पगड़ियां और टोपियां
रंग गुलाल से सिर और बालों के बचाव के लिए बाजार में तरह-तरह की पगड़ियां और टोपियां उपलब्ध हैं। इनमें राजस्थानी और गुजराती पगड़ियों की काफी मांग है। इनके अलावा गोल, नोकदार तथा हैटनुमा टोपियों के साथ तरह-तरह के कृत्रिम बाल भी बाजार में बिक रहे हैं। इन बालों से सिर और बालों का बचाव किया जा सकता है।
बाजार में दिन भर रही भीड़, कई बार लगी जाम
कड़ी धूप और दिन भर चले अंधड़ के बावजूद बाजार में काफी भीड़ रही। मेन रोड और संकटादेवी रोड पर तो दिन भर तिल रखने तक को जगह नहीं रही। भारी भीड़ के कारण सड़कों पर कई बार जाम भी लगा। इससे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।
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- पगड़ियों, टोपियों और बनावटी बालों से सजा बाजार
इस होली पर तोप, मिसाइलों से गोले और एके-47 और एके-56 से गोलियां नहीं रंग बरसेगा। आतिशबाजी के सामान से फुलझड़ियां नहीं रंगों के फव्वारे छूटेंगे। इस होली पर कुछ अलग ही नजारा दिखेगा। अलग-अलग स्टाइल की पिचकारियों के आकार और नाम भी बड़े विचित्र हैं। तोप, मिसाइल, एके-56 और एके-47 आकार की पिचकारियों को उनके आकार और डिजाइन के अनुरूप ही नाम दिया गया है।
शस्त्रों के नाम और डिजायन वाली पिचकारियों के अलावा बाजार में इलेक्ट्रानिक मीडिया के माइक, जानवरों और पक्षियों जैसे हाथी, ऊंट, कुत्ता, बाघ, बतख, पैरट, आकार की पिचकारियों के साथ-साथ डोरेमन, मोटू-पतलू आदि नाम की आकर्षक पिचकारियों की बाजार में भरमार है। बच्चे इन अजीबोगरीब पिचकारियों को काफी पसंद कर रहे। इलेक्ट्रानिक पिचकारियां महंगी जरूर हैं, लेकिन यह पिचकारियां लोगों की पहली पसंद हैं।
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बाजार में पांच रुपये से पांच हजार रुपये मूल्य तक की पिचकारियां उपलब्ध हैं। बाजार में इलेक्ट्रानिक पिचकारियां पांच सौ से पांच हजार रुपये तक में बिक रहीं हैं। मध्यम मूल्य की पिचकारियों की बिक्री सस्ती और महंगी पिचकारियों की अपेक्षा हैं। बाजार में पिचकारियों की खरीदने को बच्चे काफी उत्साहित हैं। सोमवार को पिचकारियों की दुकान पर भारी भीड़ रही।
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बाजार में सड़क किनारे सजी रंग गुलाल की दुकानों पर भी खरीददारों की काफी भीड़-भाड़ रही। इस बार सस्ते और मिलावटी रंगों की अपेक्षा लोग ब्रांडेड रंग और गुलाल को तरजीह दे रहे हैं। पूरा बाजार रंग गुलाल और पिचकारियों से पटा पड़ा है।
शहर की गलियों में नजर आएंगी भूतों की टोलियां
रंग और गुलाल से आंखों और त्वचा को बचाने के लिए बाजार में तरह-तरह के मुखौटे बिक रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा मांग भूतों वाले मुखौटों की है। इस होली पर भूतों के मुखौटों की इतनी बिक्री हो रही है कि होली के दिन शहर की हर गली में भूतों की टोलियां नजर आएंगी। भूत चुडै़लों के अलावा हाथी, बाघ, कुत्ता, सियार और पक्षियों के मुखौटों की भी काफी मांग है।
सिर और बालों से बचाव को पगड़ियां और टोपियां
रंग गुलाल से सिर और बालों के बचाव के लिए बाजार में तरह-तरह की पगड़ियां और टोपियां उपलब्ध हैं। इनमें राजस्थानी और गुजराती पगड़ियों की काफी मांग है। इनके अलावा गोल, नोकदार तथा हैटनुमा टोपियों के साथ तरह-तरह के कृत्रिम बाल भी बाजार में बिक रहे हैं। इन बालों से सिर और बालों का बचाव किया जा सकता है।
बाजार में दिन भर रही भीड़, कई बार लगी जाम
कड़ी धूप और दिन भर चले अंधड़ के बावजूद बाजार में काफी भीड़ रही। मेन रोड और संकटादेवी रोड पर तो दिन भर तिल रखने तक को जगह नहीं रही। भारी भीड़ के कारण सड़कों पर कई बार जाम भी लगा। इससे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।