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Lakhimpur Kheri News: अब जिले में बनेगा खेतों का प्राकृतिक कवच
Wed, 15 Jul 2026 01:09 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 15 Jul 2026 01:09 AM IST
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लखीमपुर खीरी। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत जिले में बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर (बीआईआरसी) स्थापित किया जाएगा। इस सेंटर में प्राकृतिक खेती के लिए जैव उत्पाद और ऑर्गेनिक स्प्रे तैयार होंगे, जो रासायनिक उत्पादों की तुलना में सस्ते और किफायती होंगे। कृषि विभाग ने सेंटर संचालन के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं।
सेंटर से प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत, दशपर्णी, नीमास्त्र समेत अन्य जैव उत्पाद उपलब्ध होंगे। यहां गोबर, गोमूत्र, धतूरा, अरंडी, नीम, गुड़ और बेसन जैसी सामग्री से विभिन्न प्रकार के ऑर्गेनिक स्प्रे तैयार किए जाएंगे, जिन्हें किसानों को किफायती दरों पर उपलब्ध कराया जाएगा। इससे किसानों को कम लागत में प्राकृतिक खेती के लिए आवश्यक जैव उत्पाद मिलेंगे और जिले में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलेगा।
उप कृषि निदेशक गिरीश चंद्र ने बताया कि जिले में मोहम्मदी और बेहजम क्षेत्र के किसान सबसे अधिक प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। इसलिए प्राथमिकता के आधार पर इन्हीं क्षेत्रों में सेंटर स्थापित किया जाएगा। दोनों क्षेत्रों में प्राकृतिक खेती के 10-10 क्लस्टर हैं।
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-- -अनुभव रखने वाले किसानों को प्राथमिकता-- --
उप कृषि निदेशक ने बताया कि सेंटर संचालन के लिए कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ), जैव उद्यमी, स्वयं सहायता समूह और प्राकृतिक खेती का अनुभव रखने वाले किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी। आवेदक के पास जैव उत्पाद तैयार करने और उनके भंडारण के लिए पर्याप्त स्थान होना चाहिए। साथ ही गोबर, गोमूत्र और फसल अवशेष (बायोमास) की उपलब्धता के लिए निकट में गौशाला या पशुधन होना भी आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि इच्छुक आवेदक 20 जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। सेंटर शुरू होने से प्राकृतिक खेती का दायरा बढ़ेगा और किसानों की आय में वृद्धि होगी।
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सेंटर से प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत, दशपर्णी, नीमास्त्र समेत अन्य जैव उत्पाद उपलब्ध होंगे। यहां गोबर, गोमूत्र, धतूरा, अरंडी, नीम, गुड़ और बेसन जैसी सामग्री से विभिन्न प्रकार के ऑर्गेनिक स्प्रे तैयार किए जाएंगे, जिन्हें किसानों को किफायती दरों पर उपलब्ध कराया जाएगा। इससे किसानों को कम लागत में प्राकृतिक खेती के लिए आवश्यक जैव उत्पाद मिलेंगे और जिले में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलेगा।
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उप कृषि निदेशक गिरीश चंद्र ने बताया कि जिले में मोहम्मदी और बेहजम क्षेत्र के किसान सबसे अधिक प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। इसलिए प्राथमिकता के आधार पर इन्हीं क्षेत्रों में सेंटर स्थापित किया जाएगा। दोनों क्षेत्रों में प्राकृतिक खेती के 10-10 क्लस्टर हैं।
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उप कृषि निदेशक ने बताया कि सेंटर संचालन के लिए कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ), जैव उद्यमी, स्वयं सहायता समूह और प्राकृतिक खेती का अनुभव रखने वाले किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी। आवेदक के पास जैव उत्पाद तैयार करने और उनके भंडारण के लिए पर्याप्त स्थान होना चाहिए। साथ ही गोबर, गोमूत्र और फसल अवशेष (बायोमास) की उपलब्धता के लिए निकट में गौशाला या पशुधन होना भी आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि इच्छुक आवेदक 20 जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। सेंटर शुरू होने से प्राकृतिक खेती का दायरा बढ़ेगा और किसानों की आय में वृद्धि होगी।