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Lakhimpur Kheri News: ईएनटी डॉक्टर ही नहीं प्राइवेट में लुटें या लखनऊ जाएं मरीज

Sun, 04 Dec 2022 12:56 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 04 Dec 2022 12:56 AM IST
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Not only ENT doctors loot in private or patients go to Lucknow
महीनों से बंद पड़ा ईएनटी कक्ष।
जिला अस्पताल का हाल
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दिव्यांग प्रमाण पत्र के लिए सरकारी ईएनटी डॉक्टर की रिपोर्ट है अनिवार्य
पिछले पांच माह से जांच कराने के लिए दिव्यांग जा रहे लखनऊ
लखीमपुर खीरी। जिला अस्पताल में पिछले करीब पांच माह से ईएनटी डॉक्टर की तैनाती नहीं है। इससे नाक, कान एवं गले के रोगियों को इलाज मिलना मुश्किल हो गया है। संबंधित बीमारियों के मरीज निजी अस्पताल में महंगा इलाज करा रहे हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत दिव्यांगों को है, क्योंकि दिव्यांग प्रमाण पत्र के लिए सरकारी ईएनटी डॉक्टर की रिपोर्ट अनिवार्य है। इसके लिए उन्हें मजबूरी में लखनऊ जाना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में नाक, कान एवं गला (ईएनटी) की ओपीडी है। वहां पर छह माह पहले डॉ. हर्षिता अवस्थी की तैनाती थी। शासन स्तर से पांच माह पहले उनका तबादला कर दिया गया है। इससे अस्पताल में संकट खड़ा हो गया। नाक, कान एवं गला रोग से पीड़ित मरीजों को पहले जहां एक रुपये में सस्ता और बेहतर इलाज मिल जाता था, वहीं अब वह महंगा इलाज कराने को विवश हैं।
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वहीं जिन लोगों को कान से कम सुनाई देता है उन दिव्यांगों को स्वास्थ्य विभाग प्रमाण पत्र जारी करता है। इस पर उन्हें तमाम सुविधाएं मिलती हैं। मगर, जिला अस्पताल में ईएनटी डॉक्टर न होने से दिव्यांगों को प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अपनी जांच कराने लखनऊ जाना पड़ रहा है।
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निजी अस्पतालों में एक हजार रुपये आ रहे खर्चे में
नाक, कान एवं गला रोग से पीड़ित मरीजों को प्राइवेट डॉक्टर को एक बार दिखाने में करीब एक हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं। पहले तो इन डॉक्टरों को दिखाने के लिए 300 से 500 रुपये का पर्चा बनवाना पड़ता है। बाद में इतने ही रुपये की दवाइयां भी खरीदनी पड़ती हैं। इस दौरान यदि डॉक्टर ने जांच आदि के लिए लिख दिया तो यह खर्चा दो हजार तक पहुंच जाता है।

शासन स्तर से ईएनटी का तबादला गैर जनपद कर दिया गया था। अब तक किसी की तैनाती नहीं हो सकी है। इसलिए ओपीडी बंद है। इसी वजह से दिव्यांगों को प्रमाण पत्र बनवाने की खातिर जांच कराने लखनऊ भेजा जाता है।
- डॉ. हर्षवर्धन, सीएमएस जिला अस्पताल
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