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Lakhimpur Kheri News: मरीजों की जिंदगी खतरे में डाल रहीं मानक विहीन एंबुलेंस

Fri, 05 Jan 2024 12:24 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 05 Jan 2024 12:24 AM IST
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Non-standard ambulances are putting patients' lives in danger
लखीमपुर खीरी। जिले में संचालित हो रहीं निजी एंबुलेंस मरीजों की जिंदगी खतरे में डाल रहीं हैं। सड़कों पर फर्राटा भरने वाली अधिकांश निजी एंबुलेंस में स्वास्थ्य उपकरण के नाम पर सिर्फ एक ऑक्सीजन सिलिंडर और स्ट्रेचर ही है। अफसरों के जांच न करने की वजह से सिलिंडर में ऑक्सीजन है या नहीं, इसका पता नहीं चल पाता। विभाग ने आज तक जांच करने की जरूरत नहीं समझी है। यही वजह है कि दिन पर दिन निजी एंबुलेंस का आंकड़ा तो बढ़ता जा रहा है, लेकिन सुविधाएं नदारद हैं।
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चौंकाने वाली बात यह है कि एआरटीओ दफ्तर में सरकारी और निजी एक्टिव एबुलेंस मात्र 89 पंजीकृत हैं, जबकि 80 से अधिक सरकारी एबुलेंस दौड़ रही हैं। आंकड़ों के हिसाब से देखा जाए तो नौ निजी एबुलेंस विभाग में पंजीकृत हैं। जबकि शहर में ही डेढ़ दर्जन से अधिक निजी एबुलेंस मरीजों को लेकर फर्राटा भरती हैं। जिले के अन्य कस्बों और तहसीलों क्षेत्र के अस्पताल से तमाम एबुलेंस बेरोकटोक दौड़ रहीं हैं। इन एंबुलेंस से लखनऊ, सीतापुर, बरेली व अन्य जिलों में गंभीर मरीजों को ले जाया जाता है।
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ऐसे में चालक तीमारदारों से मनचाहा किराया भी वसूल करते हैं। चेकिंग के दौरान निजी एंबुलेंस हूटर और नीली बत्ती जलाकर आसानी से निकल जाती हैं। अधिकांश एंबुलेंस की फिटनेस खत्म हो चुकी है। इसके बाद भी पुलिस और परिवहन विभाग के अफसर एंबुलेंस चेक करने की जहमत नहीं उठाते हैं।
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ये हैं मानक
एंबुलेंस में एक ऑक्सीजन सिलिंडर, यूरिन पॉट, किडनी ट्रे, फर्स्ट एड बॉक्स, गम बूट, स्ट्रेचर, रेडियम जैकेट, कटर, मैनुअल सक्शन पंप, इलेक्ट्रिक सक्शन पंप, ग्लब्स, वोमेटिंग बैग, टॉर्च आदि उपकरण होने चाहिए। अब हकीकत देखें तो ऑक्सीजन सिलिंडर, स्ट्रेचर के अलावा कुछ भी नहीं है। इसके अलावा एंबुलेंस का कलर सफेद और उस पर रेड कलर की मार्किंग होनी चाहिए। फ्लैशर, वार्निंग लाइट के साथ ही लाउड स्पीकर के साथ सायरन भी होना चाहिए।


मनचाहे वाहन को बना दिया एबुलेंस
बिना मानकों का ध्यान रखे मनचाहे वाहन को एंबुलेंस का रूप दे दिया जाता है। बोलेरो तो कोई ओमनी व अन्य चार पहिया वाहन पर एंबुलेंस लिखाकर मरीजों को लेकर सड़कों पर दौड़ने लगते हैं।



एक्टिव सरकारी और निजी मिलाकर 89 एंबुलेंस संचालित हैं। विभाग की ओर से समय-समय पर जांच कर कार्रवाई की जाती है। दिसंबर में भी सात से आठ निजी एंबुलेंस पर कार्रवाई की जा चुकी है। आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।
-आलोक कुमार, एआरटीओ

जिले में संचालित निजी एंबुलेंस के मानक चेक किए जाएंगे। अगर कोई एंबुलेंस बिना मानक संचालित होती पाई गई तो संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

-डॉ. संतोष गुप्ता, सीएमओ
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