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किसी उम्मीदवार ने नियुक्त नहीं की महिला मतगणना एजेंट

Wed, 09 Mar 2022 01:34 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 09 Mar 2022 01:34 AM IST
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No candidate appointed female counting agent
पोलिंग बूथ (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : PTI
जिले की आठ विधानसभा सीटों पर हैं 11 महिला उम्मीदवार
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लखीमपुर खीरी। राजनीतिक दल आधी आबादी की भागीदारी का चाहें जितना दम भरें, लेकिन सच यह है कि उन्हें अहम जिम्मेदारी देने से बचते हैं। यहां बात हो रही है दस मार्च को होने वाली मतगणना की, जिसके लिए सभी दलों ने अपने मतगणना एजेंट नियुक्त कर दिए हैं, जिसमें कोई महिला एजेंट नहीं है।
जिले की आठ विधानसभा सीटों पर 11 महिला उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। इनमें दस उम्मीदवार राजनीतिक दलों के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। केवल दो महिला उम्मीदवार निर्दलीय चुनाव लड़ रही हैं। इनमें न तो राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों और न ही निर्दलीय उम्मीदवारों ने किसी महिला को अपना मतगणना एजेंट बनाया है। मतगणना के दौरान उम्मीदवार स्वयं तो मतगणना स्थल पर मौजूद रहेंगी, लेकिन उनकी कोई भी एजेंट महिला नहीं होगी।
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विधानसभा क्षेत्र पलिया में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) से आरती राय, गोला में शिखा कनौजिया बसपा से, अभिषेक कुमारी नई क्रांति पार्टी से उम्मीदवार हैं। श्रीनगर में तीन बड़ी पार्टियों ने महिला उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारे थे। इनमें भाजपा की मंजू त्यागी, बसपा से मीरा बानो और कांग्रेस से चांदनी उम्मीदवार हैं। धौरहरा में कांग्रेस से जितेंद्री देवी चुनाव लड़ रही हैं तो रेखा देवी निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में भाग्य आजमा रही हैं। लखीमपुर में रितु वर्मा लोकतांत्रिक जनवादी पार्टी की प्रत्याशी हैं। कस्ता में बसपा से हेमवती राज चुनाव मैदान में हैं, जबकि मोहम्मदी में रितु सिंह को कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार बनाया है।
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एसडीएम/रिटर्निंग आफीसर पलिया, निघासन, धौरहरा, गोला, लखीमपुर, मितौली और मोहम्मदी ने बताया कि उनके विधानसभा क्षेत्र में किसी भी उम्मीदवार ने महिला मतगणना एजेंट नहीं नियुक्त किया है। मतगणना के दौरान महिला प्रत्याशी मतगणना स्थल पर मौजूद रहेंगी।

विवाद की स्थिति में महिलाओं को होती है असुविधा
मतगणना के समय इन 11 उम्मीदवारों के अलावा एक भी महिला एजेंट नजर नहीं आएगी। उम्मीदवारों का कहना है कि मतगणना में काफी समय लगता है। पूरी मतगणना के दौरान एजेंट को टेबल के सामने खड़े रहकर नजर गड़ाए रखनी पड़ती हैं। मतगणना के दौरान कई बार ऐसे मौके भी आते हैं जब विवाद की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। ऐसी स्थिति में महिलाओं को असुविधा का सामना करना पड़ता है। इसलिए महिलाओं को एजेंट नहीं बनाया है।
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