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सीएम के निर्देशों पर भारी है अधिकारी-ठेकेदार गठजोड़
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,लखीमपुर खीरी
Updated Fri, 19 Jan 2018 06:50 PM IST
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file photo
- फोटो : amarujala
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मुख्यमंत्री ने प्रदेश की सभी सड़कें 15 जून तक गड्ढा मुक्त करने के निर्देश दिए थे, लेकिन ठेकेदारों और अधिकारियों की मिली भगत से यह फरमान धौरहरा क्षेत्र में हवा हवाई हो गया। गड्ढा मुक्त अभियान में लाखों रुपये खर्च दिखाकर यह अभियान भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। सिसैय्या से लखीमपुर तक सड़क पर गड्ढों की भरमार होने से आए दिन लोग इनमें गिरकर जख्मी हो रहे हैं।
सड़कों को गड्ढा मुक्त करने की समय सीमा 15 जून को समाप्त हो जाने के बाद भी विधानसभा क्षेत्र धौरहरा से निकला पीलीभीत-बस्ती मार्ग गड्ढा मुक्त नहीं हो सका है। आलम यह है कि धौरहरा विधानसभा क्षेत्र में शारदा पुल से घाघरा पुल तक करीब 40 किलोमीटर सड़क गड्ढा युक्त है। इस पर आवागमन करना किसी खतरे से कम नहीं है। आए दिन दोपहिया वाहन सवार इन गड्ढों में अनियंत्रित हो जाते हैं। बड़े वाहन भी दो घंटे की दूरी तीन घंटे में तय कर पाते हैं, जबकि यह मार्ग पड़ोसी जिला बहराइच और पड़ोसी देश नेपाल को जोड़ने का मुख्य मार्ग है।
ऐसी स्थिति तब है जब प्रतिदिन जिला मुख्यालय से तहसील मुख्यालय को जिम्मेदार अधिकारी इसी मार्ग से आते जाते हैं। फिर भी इस समस्या पर न तो किसी अधिकारी की नजर पड़ती है न जनप्रतिनिधि, जबकि लोग जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं।
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सड़कों को गड्ढा मुक्त करने की समय सीमा 15 जून को समाप्त हो जाने के बाद भी विधानसभा क्षेत्र धौरहरा से निकला पीलीभीत-बस्ती मार्ग गड्ढा मुक्त नहीं हो सका है। आलम यह है कि धौरहरा विधानसभा क्षेत्र में शारदा पुल से घाघरा पुल तक करीब 40 किलोमीटर सड़क गड्ढा युक्त है। इस पर आवागमन करना किसी खतरे से कम नहीं है। आए दिन दोपहिया वाहन सवार इन गड्ढों में अनियंत्रित हो जाते हैं। बड़े वाहन भी दो घंटे की दूरी तीन घंटे में तय कर पाते हैं, जबकि यह मार्ग पड़ोसी जिला बहराइच और पड़ोसी देश नेपाल को जोड़ने का मुख्य मार्ग है।
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ऐसी स्थिति तब है जब प्रतिदिन जिला मुख्यालय से तहसील मुख्यालय को जिम्मेदार अधिकारी इसी मार्ग से आते जाते हैं। फिर भी इस समस्या पर न तो किसी अधिकारी की नजर पड़ती है न जनप्रतिनिधि, जबकि लोग जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं।
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