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मदर्स डे पर विशेष : सिलाई मशीन की आवाज में मां ने बच्चों का भविष्य बुना
Sun, 10 May 2026 12:30 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sun, 10 May 2026 12:30 AM IST
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आयुष गुप्ता अपनी मां सुनीता के साथ। संवाद
मैगलगंज। पति की मौत के बाद जब जिंदगी अचानक बदल गई तो चार छोटे बच्चों की परवरिश और उनका भविष्य मां सुनीता के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर खड़ा था। किराये के छोटे से घर में सिलाई का काम कर उन्होंने बच्चों की पढ़ाई जारी रखी।
आर्थिक तंगी और संघर्ष के बीच भी उनका एक ही संकल्प था कि बच्चे पढ़ेंगे, आगे बढ़ेंगे और अपने पिता का नाम रोशन करेंगे। आज उसी संघर्ष का परिणाम है कि सबसे छोटे बेटे आयुष गुप्ता ने इंटरमीडिएट परीक्षा में कॉलेज टॉप करने के साथ जिले की मेरिट सूची में चौथा स्थान हासिल किया है। वहीं परिवार के अन्य बेटे भी अब अपने पैरों पर खड़े होकर मां का सहारा बन चुके हैं।
मैगलगंज के श्रीपाल सिंह सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के छात्र आयुष गुप्ता की सफलता क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है, लेकिन इस सफलता के पीछे उनकी मां सुनीता का वर्षों का संघर्ष और त्याग छिपा है।
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आयुष के पिता अभय शरण गुप्ता उर्फ बब्बन हलवाई का वर्ष 2013 में हृदयाघात से निधन हो गया था। इसके बाद परिवार की जिम्मेदारी पूरी तरह मां सुनीता पर आ गई। साधारण गृहिणी रहीं सुनीता ने हालात से हार मानने के बजाय सिलाई का काम शुरू किया। दिनभर सिलाई मशीन चलाकर और रात में बच्चों की पढ़ाई व भविष्य की चिंता करते हुए उन्होंने परिवार को संभाला।
सुनीता बताती हैं कि कई बार यह समझ नहीं आता था कि अगले दिन घर का खर्च कैसे चलेगा, लेकिन उन्होंने बच्चों की पढ़ाई कभी नहीं रुकने दी। उनका कहना है कि बच्चों की सफलता ही उनके संघर्ष का सबसे बड़ा पुरस्कार है।
मां के संघर्ष को करीब से देखने वाले आयुष ने भी ठान लिया था कि वह पढ़ाई में सफलता हासिल कर मां के त्याग को सम्मान देंगे। आज उनकी उपलब्धि ने न सिर्फ मां के संघर्ष को पहचान दिलाई, बल्कि दिवंगत पिता के सपनों को भी नई जिंदगी दी है।
परिवार के बड़े बेटे अक्षय शिक्षक हैं, जबकि नीलेश और ऋतिक भी अपने पैरों पर खड़े होकर मां का सहारा बने हुए हैं। संवाद
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आर्थिक तंगी और संघर्ष के बीच भी उनका एक ही संकल्प था कि बच्चे पढ़ेंगे, आगे बढ़ेंगे और अपने पिता का नाम रोशन करेंगे। आज उसी संघर्ष का परिणाम है कि सबसे छोटे बेटे आयुष गुप्ता ने इंटरमीडिएट परीक्षा में कॉलेज टॉप करने के साथ जिले की मेरिट सूची में चौथा स्थान हासिल किया है। वहीं परिवार के अन्य बेटे भी अब अपने पैरों पर खड़े होकर मां का सहारा बन चुके हैं।
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मैगलगंज के श्रीपाल सिंह सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के छात्र आयुष गुप्ता की सफलता क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है, लेकिन इस सफलता के पीछे उनकी मां सुनीता का वर्षों का संघर्ष और त्याग छिपा है।
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आयुष के पिता अभय शरण गुप्ता उर्फ बब्बन हलवाई का वर्ष 2013 में हृदयाघात से निधन हो गया था। इसके बाद परिवार की जिम्मेदारी पूरी तरह मां सुनीता पर आ गई। साधारण गृहिणी रहीं सुनीता ने हालात से हार मानने के बजाय सिलाई का काम शुरू किया। दिनभर सिलाई मशीन चलाकर और रात में बच्चों की पढ़ाई व भविष्य की चिंता करते हुए उन्होंने परिवार को संभाला।
सुनीता बताती हैं कि कई बार यह समझ नहीं आता था कि अगले दिन घर का खर्च कैसे चलेगा, लेकिन उन्होंने बच्चों की पढ़ाई कभी नहीं रुकने दी। उनका कहना है कि बच्चों की सफलता ही उनके संघर्ष का सबसे बड़ा पुरस्कार है।
मां के संघर्ष को करीब से देखने वाले आयुष ने भी ठान लिया था कि वह पढ़ाई में सफलता हासिल कर मां के त्याग को सम्मान देंगे। आज उनकी उपलब्धि ने न सिर्फ मां के संघर्ष को पहचान दिलाई, बल्कि दिवंगत पिता के सपनों को भी नई जिंदगी दी है।
परिवार के बड़े बेटे अक्षय शिक्षक हैं, जबकि नीलेश और ऋतिक भी अपने पैरों पर खड़े होकर मां का सहारा बने हुए हैं। संवाद