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बाघ तो अपने घर में ही था, बाइक सवार घुसे उसके दायरे में

Sat, 19 Sep 2020 02:11 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 19 Sep 2020 02:11 AM IST
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men intered in tiger residencial society
हमलावर बाघ की लोकेशन ट्रेस करती वन विभाग की टीम। संवाद - फोटो : LAKHIMPUR
बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के भीरा रेंज की छैरासी बीट जंगल के रास्ते से गुजर रहे राहगीरों पर बाघ के हमले से ग्रामीणों के दिलों में डर समा गया है। घटनास्थल पर वन विभाग की टीमों की मौजूदगी के बावजूद उस रास्ते पर निकलना तो दूर ग्रामीण अपने खेतों में भी जाने से डर रहे हैं। वन विभाग घटना की गहनता से जांच कर रहा है।
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गुरुवार सुबह भीरा रेंज की छैरासी बीट जंगल के रास्ते पर बाघ हमले में तीन लोगों के घायल होने के बाद घटना वाले क्षेत्र में वन विभाग ने कई निगरानी टीमों को तैनात कर दिया है। साथ ही ग्रामीणों को लगातार आगाह किया जा रहा है कि वे धरती के फूल (मशरूम) बीनने के लिए जंगल के अंदर न जाएं। जंगल के रास्ते पर समूह बनाकर निकलें और खेतों में भी काम करते समय आवाज करते रहें। उधर बाघ हमले में घायल तीनों ग्रामीणों की हालत स्थिर बनी हुई है।
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दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के उपनिदेशक डॉ अनिल कुमार पटेल के मुताबिक हमलावर बाघ अपनी टेरीटरी में ही मौजूद है। उसके प्राकृतिवास में व्यवधान डाले बिना यह कोशिश की जा रही है कि वह जंगल के रास्ते पर या जंगल के बाहर न आने पाए। उनका यह भी कहना है कि प्राकृतिवास में खलल पड़ने के कारण ही बाघ आक्रामक हुआ। इसलिए जंगल में घुसपैठ रोकना बेहद जरूरी हो गया है।
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कंपार्टमेंट 13 : बाघ के लिए सर्वाधिक अनुकूल प्राकृतिवास
भीरा रेंज की छैरासी बीट के कंपार्टमेंट 13 के जिस जंगल में बाघ हमले की घटना हुई वह जंगल बाघ का सबसे खूबसूरत और अनुकूल प्राकृतिवास है। घटनास्थल से कुछ दूरी पर उल्ल नदी प्रवाहित होती है तो दूसरी तरफ बरौंछा नाला है। बीच में घना जंगल और झाड़ियां हैं। ऐसा ही वातावरण बाघ को पसंद आता है। वन विभाग के मुताबिक जंगल के इस हिस्से में हमेशा बाघों की मौजूदगी रहती है।

जंगल में घुसपैठ ही ग्रामीणों के लिए खतरे का कारण बनती है। जंगल के रास्तों का विकल्प राजस्व विभाग की सहायता से निकाला जाएगा। जंगल में घुसपैठ रोकने के प्रयास वन विभाग लगातार कर रहा है।
- डॉ अनिल कुमार पटेल, उपनिदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व, बफरजोन
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