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Lakhimpur Kheri News: शिव-पार्वती की आराधना में डूबीं सुहागिनें, रखा निर्जल व्रत
Tue, 15 Sep 2026 02:07 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Tue, 15 Sep 2026 02:07 AM IST
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गोला के पौराणिक मंदिर में हरियाली तीज (हरतालिका) पर भगवान शिव का जलाभिषेक करतीं महिलाएं। संवाद
गोला गोकर्णनाथ/बांकेगंज। हरतालिका तीज पर सोमवार को नगर के पौराणिक शिव मंदिर में महिलाओं ने निर्जला उपवास रखकर भगवान शिव और माता पार्वती का पूजन किया। श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना की।
पौराणिक शिव मंदिर के कपाट ब्रह्म मुहूर्त में सुबह पांच बजे खोले गए। श्रद्धालुओं ने फल, फूल, दूध, मिष्ठान और गंगाजल से भगवान शिव का जलाभिषेक किया। गोकर्ण तीर्थ के घाट पर पुरोहितों से कथा सुनकर दान-पुण्य किया। महिलाओं ने रात्रि के तीनों प्रहर माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा की। देर रात तक मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रही।
बांकेगंज क्षेत्र में हरतालिका तीज का पर्व सोमवार को श्रद्धा के साथ मनाया गया। सुहागिन महिलाओं ने पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य के लिए निर्जल व्रत रखा। बांकेश्वर महादेव मंदिर परिसर को रंग-बिरंगी बिजली की झालरों और फूलों से सजाया गया।
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छोटी काशी गोला के ज्योतिषाचार्य पं. रामदेव मिश्र शास्त्री ने बताया कि भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया महत्वपूर्ण पर्वों में मानी जाती है। इस तिथि का संबंध भगवती गौरी से है। मान्यता है कि गौरी ने शिव की प्राप्ति के लिए आराधना, पूजन और व्रत किया था। महिलाएं इस व्रत को सौभाग्य और पति की दीर्घायु की कामना के लिए विधिवत करती हैं। संवाद
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पौराणिक शिव मंदिर के कपाट ब्रह्म मुहूर्त में सुबह पांच बजे खोले गए। श्रद्धालुओं ने फल, फूल, दूध, मिष्ठान और गंगाजल से भगवान शिव का जलाभिषेक किया। गोकर्ण तीर्थ के घाट पर पुरोहितों से कथा सुनकर दान-पुण्य किया। महिलाओं ने रात्रि के तीनों प्रहर माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा की। देर रात तक मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रही।
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बांकेगंज क्षेत्र में हरतालिका तीज का पर्व सोमवार को श्रद्धा के साथ मनाया गया। सुहागिन महिलाओं ने पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य के लिए निर्जल व्रत रखा। बांकेश्वर महादेव मंदिर परिसर को रंग-बिरंगी बिजली की झालरों और फूलों से सजाया गया।
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छोटी काशी गोला के ज्योतिषाचार्य पं. रामदेव मिश्र शास्त्री ने बताया कि भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया महत्वपूर्ण पर्वों में मानी जाती है। इस तिथि का संबंध भगवती गौरी से है। मान्यता है कि गौरी ने शिव की प्राप्ति के लिए आराधना, पूजन और व्रत किया था। महिलाएं इस व्रत को सौभाग्य और पति की दीर्घायु की कामना के लिए विधिवत करती हैं। संवाद