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40 हजार प्रवासी श्रमिकों को रोजगार दिलाना प्रशासन के लिए अब चुनौती
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लखीमपुर खीरी। लॉकडाउन के बाद अपने गांव लौटे प्रवासियों की संख्या 60 हजार को पार कर चुकी है। मनरेगा से ज्यादातर अकुशल श्रमिकों को ही रोजगार मिल पाया है, जबकि 40 हजार से अधिक प्रवासी श्रमिक कुशल और अर्धकुशल क्षमता रखते हैं, जिन्हें रोजगार दिलाने के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। ऐसे श्रमिकों को कुशल या अर्धकुशल दक्षता के आधार पर रोजगार दिलाना अब प्रशासन के लिए चुनौती है।
जनपद में कुल 1167 ग्राम पंचायतें हैं, जिनमें से 1062 ग्राम पंचायतों में 60 हजार से अधिक प्रवासी श्रमिक दूसरे राज्यों से लौटे हैं। सिर्फ 105 ग्राम पंचायतें ही ऐसी हैं, जिनमें एक भी प्रवासी श्रमिक नहीं आया है। गांवों में लौटे ज्यादातर श्रमिक महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली जैसे बड़े शहरों में नौकरी करके जीवन यापन कर रहे थे। लॉकडाउन के बाद अपने गांव लौटे प्रवासियों की संख्या 60 हजार पार कर चुकी है। इन श्रमिकों को उनके गांव में ही रोजगार दिलाने के लिए सरकार मनरेगा का खजाना खोल चुकी है, लेकिन इसका लाभ सिर्फ अकुशल श्रमिकों को ही मिल रहा है। जबकि कुशल और अर्धकुशल श्रमिकों को रोजगार दिलाने में प्रशासन अब तक नाकाम रहा है। मनरेगा योजना में अब तक 18,640 प्रवासी श्रमिकों ने आवेदन किया है, जिसमें से 9271 प्रवासी श्रमिकों को काम मिल पाया है। जबकि 40 हजार से अधिक अन्य प्रवासी श्रमिकों को रोजगार दिलाने के लिए भी प्रशासन को कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी। क्योंकि अभी चीनी मिलें बंद होने से काफी सीजनल श्रमिक भी रोजगार के अवसर ढूढेंगे। जनपद में ज्यादातर उद्योग-धंधे कृषि और वन उत्पादों से संबंधित हैं। लिहाजा प्राइवेट संस्थानों और फैक्ट्रियों में नौकरियों के लिए भी काफी मारामारी रहेगी।
मनरेगा से अकुशल श्रमिकों को रोजगार दिया जा रहा है। दूसरे राज्यों से आए प्रवासी श्रमिकों में काफी श्रमिक कुशल और अर्धकुशल भी हैं, जिनकी सूची तैयार कराई जा रही है। जल्द ही इन्हें भी उनकी क्षमता के मुताबिक रोजगार दिलाया जाएगा।
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-शैलेंद्र कुमार सिंह, डीएम
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जनपद में कुल 1167 ग्राम पंचायतें हैं, जिनमें से 1062 ग्राम पंचायतों में 60 हजार से अधिक प्रवासी श्रमिक दूसरे राज्यों से लौटे हैं। सिर्फ 105 ग्राम पंचायतें ही ऐसी हैं, जिनमें एक भी प्रवासी श्रमिक नहीं आया है। गांवों में लौटे ज्यादातर श्रमिक महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली जैसे बड़े शहरों में नौकरी करके जीवन यापन कर रहे थे। लॉकडाउन के बाद अपने गांव लौटे प्रवासियों की संख्या 60 हजार पार कर चुकी है। इन श्रमिकों को उनके गांव में ही रोजगार दिलाने के लिए सरकार मनरेगा का खजाना खोल चुकी है, लेकिन इसका लाभ सिर्फ अकुशल श्रमिकों को ही मिल रहा है। जबकि कुशल और अर्धकुशल श्रमिकों को रोजगार दिलाने में प्रशासन अब तक नाकाम रहा है। मनरेगा योजना में अब तक 18,640 प्रवासी श्रमिकों ने आवेदन किया है, जिसमें से 9271 प्रवासी श्रमिकों को काम मिल पाया है। जबकि 40 हजार से अधिक अन्य प्रवासी श्रमिकों को रोजगार दिलाने के लिए भी प्रशासन को कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी। क्योंकि अभी चीनी मिलें बंद होने से काफी सीजनल श्रमिक भी रोजगार के अवसर ढूढेंगे। जनपद में ज्यादातर उद्योग-धंधे कृषि और वन उत्पादों से संबंधित हैं। लिहाजा प्राइवेट संस्थानों और फैक्ट्रियों में नौकरियों के लिए भी काफी मारामारी रहेगी।
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मनरेगा से अकुशल श्रमिकों को रोजगार दिया जा रहा है। दूसरे राज्यों से आए प्रवासी श्रमिकों में काफी श्रमिक कुशल और अर्धकुशल भी हैं, जिनकी सूची तैयार कराई जा रही है। जल्द ही इन्हें भी उनकी क्षमता के मुताबिक रोजगार दिलाया जाएगा।
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-शैलेंद्र कुमार सिंह, डीएम