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पर्यावरण सुरक्षा का मखौल उड़ा रही शहर की गंदगी

Wed, 01 Jun 2016 10:42 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो-लखीमपुर खीरी।
अमर उजाला ब्यूरो-लखीमपुर खीरी। Updated Wed, 01 Jun 2016 10:42 PM IST
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Making a mockery of the environmental protection of city dirt
गंदगी - फोटो : अमर उजाला
- ग्रीन सिटी क्लीन सिटी का नगर पालिका का दावा ढोल की पोल
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शहर में जगह-जगह लगे कूड़े के ढेर, गंदगी से बजबजाती नालियों से उठती दुर्गंध हर साल मनाए जाने वाले पर्यावरण दिवस का मखौल उड़ाती नजर आ रही है। नगर पालिका का ‘ग्रीन सिटी क्लीन सिटी’ का नारा यहां बेमानी साबित हो रहा है। करीब सात साल पहले देश के सबसे गंदेे शहरों में तीसरा स्थान रखने वाले लखीमपुर के माथे से अब यह कलंक भले ही मिट गया हो, लेकिन स्थितियों में कोई खास बदलाव नहीं आया है। 
शहर को ग्रीन सिटी बनाने का सपना अभी सपना ही है। शहर से हरियाली लगातार गायब होती जा रही है। शहर के पुराने पेड़ या तो गिर गए या विकास के नाम पर नष्ट कर दिए गए। कहने को शहर में आधा दर्जन से अधिक पार्क हैं लेकिन दो-तीन पार्कों को छोड़कर बाकी में हरियाली नदारद है। ऐसे में शहर का पर्यावरण कैसे संतुलित रहे यह एक बड़ा सवाल है।
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शहर ग्रीन तो हो नहीं पाया क्लीन भी नहीं हो सका। जगह-जगह लगे कूड़े के ढेर, गंदगी से बजबजाती नालियां मच्छर उत्पादन की फैक्ट्री बन गई हैं। नगर पालिका ने सड़क किनारे कूड़ा डलावघर बना रखे हैं, जहां कई-कई दिन तक कचरा सड़ता रहता है। गंदगी से आए दिन मोहल्लों में संक्रामक रोगों का हमला होता है। नगर पालिका कर्मचारियों का टोटा और संसाधनों की कमी की बात कह कर अपना पल्ला झाड़ रही है। 
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खीरी रोड, भुइफोरवानाथ में धर्मकांटा तिराहा, छाउछ चौराहा, स्टेशन रोड समेत कई ऐसे डलावघर हैं जो व्यस्त सड़कों के किनारे हैं। उधर से गुजरने वाले राहगीरों और आसपास रहने वाले लोगों का बदबू के कारण बुरा हाल है। इन डलावघरों में आवारा घूमने वाली गाएं और सुअर मुंह मारते देखे जा सकते हैं। 

पॉलिथीन पर पाबंदी लेकिन शहर में फिर भी ढेर
पॉलिथीन के इस्तेमाल पर पाबंदी है लेकिन इस पाबंदी का असर कहीं दिख नहीं रहा है। खुले आम लोग पॉलिथीन का इस्तेमाल कर रहे हैं। न नगर पालिका इस पर सख्ती कर रहा है न ही प्रशासन इसके प्रति संवेदनशील है। यह पॉलिथीन पर्यावरण को तो नुकसान पहुंचा ही रही है। साथ ही सड़कों पर घूमने वाली गायें इसे खाकर मौत के मुंह में समा रही हैं। पॉलिथीन उड़ कर नालियों में जाती हैं और नालियों को चोक कर देती हैं। इससे जलनिकासी बाधित होती है। 

कचरा निस्तारण प्लांट लगाने को नहीं मिल रही जगह
शहर में कचरा निस्तारण प्लांट शासन से मंजूर है लेकिन इसके लिए जितनी जगह चाहिए उतनी जगह शहर में उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इसके कारण कचरा निस्तारण प्लांट नहीं लग पा रहा है। कचरा निस्तारण प्लांट लगने से गंदगी से काफी हद तक निजात मिल सकेगी और कूड़े का उपयोग भी हो सकेगा। 


नगर पालिका शहर को ग्रीन सिटी क्लीन सिटी बनाने को कृत संकल्प है। सीमित संसाधनों के बावजूद शहर की सफाई व्यवस्था को चाक चौबंद रखने का प्रयास किया जा रहा है। डलावघरों से रोज कूड़ा उठा दिया जाता है। शहर में हरियाली बढ़ाने के लिए उपलब्ध जगहों पर पौधरोपण किया जाएगा। 
- अवनींद्र कुमार, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका लखीमपुर
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